फोटो 06 खेतों में ट्रैक्टर से गहरी जुताई करता किसान ।

दतिया। नईदुनिया प्रतिनिधि

कृषि विज्ञान केन्द्र, दतिया के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. आरकेएस तोमर ने किसानों को रबी फसलों की कटाई के बाद खाली हुए खेतों की गहरी जुताई करने की सलाह दी है। उन्होंने बताया कि अप्रैल में गर्मी गहरी जुताई के लिए सर्वोत्तम है। अधिकांश किसान एक निश्चित गहराई पर (6-7 इंच) जुताई करते हैं। नीचे कड़ी पर्त बन जाती है इस कारण भूमि के नीचे जल रिसाव रूक जाता है। ग्रीष्म कालीन गहरी जुताई (जो लगभग 9-12 इंच तक गहरी होती है) में यह कड़ी परत टूट जाती है। जिससे बारिश में खेत की जलधारण क्षमता बढ़ जाती है। जल संरक्षण को प्रत्यक्षतः बढ़ावा मिलता है।

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खरपतवार से घट जाता है उत्पादन-

डॉ. तोमर ने बताया कि खरपतवार, फसल उत्पादन को लगभग 20-60 प्रतिशत तक कम कर सकते हैं। कुछ खरपतवार जैसे- कांस, मोथा, दूध आदि की जड़ें काफी गहराई तक रहती है। इनके नियंत्रण का उपाय ग्रीष्म कालीन गहरी जुताई है, जिससे खरपतवारों की जड़ें, राइजोम ऊपरी सतह पर आ जाते हैं, जो बाद में तेज गर्मी में सूखकर नष्ट हो जाते हैं।

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रोग जनक कीट भी हो जाते हैं नष्ट-

गहरी जुताई से फसल रोगों के रोग जनक एवं कीटों के अंडे व शंखी मिट्टी में छिपे रहते हैं। गहरी जुताई से या तो ऊपर आ जाते हैं या गहराई में दबकर मर जाते हैं। ऊपर आने पर तेज गर्मी के संपर्क से नष्ट हो जाते हैं। इस तरह से कीट व रोगों का नियंत्रण संभव हो जाता है। गहरी जुताई वाले खेत पहली बारिश का संपूर्ण पानी सोख लेते हैं, जिससे अधिकतम वायुमंडलीय नत्रजन इन खेतों में अनायस ही आ जाती है। इसके साथ-साथ मृदाक्षरण भी गहरे जुते खेतों में कम होता है। फलतः पोषक तत्वों का बहाव भी रूकता है। उपरोक्त बिन्दुओं से स्पष्ट है कि इस एक मात्र गहरी जुताई से अनेक लाभ किसान अर्जित कर सकते हैं।

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गहरी जुताई के लिए शासन देती है पैसा-

प्रदेश सरकार ग्रीष्म कालीन गहरी जुताई के लिए हलधर योजना के तहत किसानों को अनुदान देती है। खेतों की एक समान जुताई करनी चाहिए तथा बिना जुताई वाला स्थान नहीं रहना चाहिए। फसल के अवशेष व अनावश्यक उगे पौधों को खेत में दबा देना चाहिए। उन्होंने बताया कि गहरी जुताई के समय ध्यान रखें कि कम से कम मृत कूढ़ (नाली) खेत में बने, इसके निदान के लिए पलटीफार प्लाउ का उपयोग करें। गहरी जुताई तीन वर्ष में एक बार अवश्य करें।