फोटो 05 खरीद केन्द्र पर खुले में रखा गेहूं।

दतिया। नईदुनिया प्रतिनिधि

उदगवां खरीद केन्द्र पर पिछले 10 दिनों से वारदाना नहीं होने के कारण गेहूं की खरीदी नहीं हो पा रही है। वारदाने के अभाव में किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वारदाने के इंतजार में बैठे किसानों को कोई बताने वाला कोई नहीं है कि आखिर वारदाना कब तक आएगा और कब गेहूं की तुलाई होगी। प्रशासन की लापरवाही के कारण किसानों को गर्मी में परेशान होना पड़ रहा है।

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केन्द्र पर नहीं पानी की सुविधा

अंचल में पड़ रही भीषण गर्मी के बाद भी खरीद केन्द्र किसानों के लिए पानी की सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई है, जबकि शासन के आदेशानुसार केन्द्रों पर पानी तथा धूप से बचाव के लिए टेंट की व्यवस्था कराने के लिए केन्द्र प्रभारी को निर्देशित किया गया था, परंतु प्रभारी द्वारा किसानों को किसी प्रकार भी सुविधा उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। गर्मी में प्यास बुझाने के लिए किसानों को हैंडपंप से पानी भरकर लाना पड़ रहा है।

उल्लेखनीय है कि प्रभारी की लापरवाही के कारण खरीद केन्द्र पर पिछले 10 दिनों से वारदाना नहीं पहुंच सका है। जिसके कारण केन्द्र पर आने वाले किसानों का गेहूं की तौल नहीं हो पा रही है। वारदाने न होने के कारण केन्द्र पर आने वाले किसानों को बाजार से खाना-पीने की व्यवस्था करना पड़ रही है।

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किसानों ने लगाए भ्रष्टाचार के आरोप

किसानों का कहना है कि केन्द्र प्रभारी की साठगांठ से खरीद केन्द्रों पर जमकर भ्रष्टाचार किया जा रहा है। किसानों ने बताया कि बीते दिनों ग्राम कमरारी के एक व्यक्ति ने खरीद केन्द्र पर 2 हजार क्विंटल से अधिक गेहूं डाला है जबकि इस बार सूखा होने के कारण बड़े से बड़े किसान के पास 200 से 300 क्विंटल से गेहूं नहीं निकला है।

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सरकार ने किसानों को लाभ पहुंचाने बढ़ाया था बोनस

प्रदेश सरकार ने किसानों को लाभ पहुंचाने के लिए खरीद केंद्र के माध्यम से किसानों का 1735 की रेट पर गेंहू लेकर उसमें 265 अतिरिक्त बोनस जोड़कर 2 हजार रुपए क्विटंल की दर से खरीदने का फैसला लिया था। ताकि प्रदेश के किसानों को कभी कोई परेशानी न हो। लेकिन केंद्र पर चल रही कालाबजारी से किसान परेशान हो रहे है।

क्या कहते हैं किसान

मेरी मां के नाम पर पंजीयन है। मै केंद्र पर पिछले दस दिनों से गेंहू डालने का इंजतार कर रहा हूं, लेकिन वारदाना न होने से तुलाई नही हो पा रही है। मेरा पूरा गेहूं खुले में रखा है। प्रतिदिन मौसम खराब हो जाता है।

शंकर विश्वकर्मा, ग्राम कमरारी