खंडवा/ओंकारेश्वर, नईदुनिया प्रतिनिधि। यह कैसी आस्था है! एक ओर जहां नर्मदा को मां का दर्जा दिया जाता है, दूसरी ओर उसके आंचल को मैला करने से भी नहीं चूकते। नर्मदा जयंती पर ओंकारेश्वर से मोरटक्का तक आस्था का सैलाब उमड़ा। हजारों लोगों ने नर्मदा स्नान और पूजन किया। घाटों पर नारियल, फूल-पत्ती चढ़ाने के साथ ही बड़ी संख्या में दीपदान किया गया। जगह- जगह भंडारों का आयोजन हुआ। आस्थावान लोग पूजा-पाठ और नर्मदा स्नान उपरांत अपने पुराने कपड़े, प्लास्टिक आदि कचरा नर्मदा नदी व घाटों पर छोड़ गए।

जल और पर्यावरण को प्रदूषित होने से रोकने के लिए प्रशासन, जनप्रतिनिधि सहित अनेक सामाजिक संगठन प्रयासरत हैं। इसके बाद भी आस्था के नाम पर पर्यावरण से खिलवाड़ नहीं रुक रहा है। इसके लिए अभियान के साथ मां नर्मदा की पवित्रता कायम रखने के लिए जनजागृति की जरूरत है। मां नर्मदा को प्रदूषण मुक्त करने के लिए शासन-प्रशासन के साथ ही तीर्थनगरी को स्वच्छ बनाने के लिए नगर परिषद का अमला अपने स्तर पर प्रयासरत है। मंगलवार को घाटों पर पसरी गंदगी और कचरे को समेटने के लिए दो दिनों से परिषद के कर्मचारी जुटे हैं।

असंख्य लोगों की आस्था मां नर्मदा से जुड़ी हुई है। सभी की मंशा मां नर्मदा के जल को भी स्वच्छ रखने की हैं। पर्व और मेलों के दौरान पूजा-पाठ के दौरान श्रद्धालु नर्मदा के आंचल को मैला होने से बचाने का दायित्व भूल जाते हैं। हजारों लोगों द्वारा की जाने वाली गंदगी व कचरे से निपटने के लिए महापर्व के बाद में सफाई की जिम्मेदारी केवल नगर परिषद के कंधों पर नहीं छोड़ी जा सकती है। इसके लिए मंदिर ट्रस्ट, नर्मदा हाइड्रोलिक डेवलपमेंट कारपोरेशन (एनएचडीसी) और आमलोगों को भी आगे आना होगा। ओंकारेश्वर नगर की भौगोलिक स्थिति अन्य शहरों से विपरीत है।

ओंकार पर्वत सहित पूरे नगर में व घाटों पर कचरा उठाने के लिए वाहन नहीं पहुंच सकते हैं। ऐसे में सफाई के लिए दो-तीन दिन का समय लगता है। परिषद द्वारा गौमुखघाट, केवलरामघाट, श्री पंचायती महानिर्वाणीघाट, कोटितीर्थघाट, चक्रतीर्थघाट की सफाई तो की गई लेकिन परिषद के पास पर्याप्त सफाईकर्मी नहीं हैं। इसी कारण सफाई अभियान में अतिरिक्त कर्मचारियों की आवश्यकता पड़ती है। नगर परिषद के पास इस मद में बजट भी नहीं है। सरकार को महापर्वों के लिए अतिरिक्त बजट की व्यवस्था करनी चाहिए।

साधु-संतों ने की अभय घाट पर सफाई

नर्मदा तट के व्यवस्थित व सुंदर घाटों में से एक मार्कंडेय संन्यास आश्रम का अभयघाट है। यहां भी नर्मदा जयंती पर बड़ी संख्या में लोगों ने नर्मदा स्नान के दौरान पूजन सामग्री व दीपदान किया था। भंडारों की वजह से बड़ी संख्या में कचरा घाट पर पसर गया था। घाट की स्वच्छता कायम रखने के लिए बुधवार को आश्रम के संत-महात्माओं ने सफाई अभियान चलाया।

तीन दिन में पूरी होगी सफाई

नर्मदा नदी के गौमुखघाट, चक्रतीर्थघाट, केवलरामघाट, ब्रह्मपुरीघाट, कोटितीर्थघाट सहित अन्य घाटों की सफाई अभियान में नगर परिषद के कर्मचारी दो दिनों से जुटे हैं। बुधवार को हाट बाजार होने के कारण कर्मचारियों को आधे दिन की छुट्टी दी गई है। अभयघाट और नागरघाट पर सफाई गुरुवार को करवा दी जाएगी। भंडारा के बाद लोग पत्तल-दोने घाटों पर फैला गए हैं। पूजन के दौरान भी श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में घाटों पर सामग्री छोड़ी है जिसे हटाया जा रहा है। तीन दिन में सफाई का कार्य पूरा कर लिया जाएगा। -महेश चौकसे, स्वच्छता निरीक्षक नगर परिषद ओंकारेश्वर