धार। तस्वीर इंसानियत को शर्मिंदा करने वाली और शहर के कुछ ही किलोमीटर दूर की है। सिस्टम की लापरवाही देखिए शव रातभर सड़क किनारे पड़ा रहा, लेकिन किसी की भी नजर नहीं पड़ी। सुबह जब युवक का शव दिखा तो लोगों ने 108 एंबुलेंस को फोन किया, लेकिन एंबुलेंस व 100 डायल शव को नहीं ले गए।

108 के ड्राइवर का कहना था कि हमें शव ले जाने के आदेश नहीं हैं। इसके बाद पुलिसकर्मियों ने नगर पालिका का कचरा वाहन बुलवाया और शव को उसमें डालकर पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल लाया गया। घटना तोरनोद के पुल के पास गुरुवार सुबह की है।

मृतक का नाम विक्रम राणावत बताया गया है। वह बुधवार शाम जावरा से धार के लिए निकला था। विक्रम के साले प्रदीप ठाकुर ने बताया कि जीजा अपने साढू भाई के अंतिम संस्कार में जावरा के पास किसी गांव में गए थे। शाम को करीब 5 बजे अकेले बाइक से वापस धार के नौगांव के लिए लौट रहे थे।

तोरनोद के पुल के पास किसी अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी। इससे उनकी मौत हो गई। सुबह पुलिस वालों का फोन आया, तो मौके पर पहुंचे। मौके पर 100 डायल व 108 एंबुलेंस दोनों थे, लेकिन उन्होंने शव ले जाने के लिए नगर पालिका से कचरा वाहन बुलाया और पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल लेकर आए।

फोन नहीं उठाया तो समझे कहीं रुक गए होंगे

प्रदीप ठाकुर ने बताया कि जीजा का घर घाटाबिल्लौद में है, लेकिन वे यहां हमारे पास दीदी एश्वरी व तीन बच्चों के साथ रहते थे। साढू के अंतिम संस्कार के कार्यक्रम में सभी गए थे। हम लौट आए। वे बाइक से अकेले आ रहे थे। देर रात को फोन भी लगाया, लेकिन उन्होंने नहीं उठाया तो समझे ठंड के चलते बाइक पर फोन नहीं उठाया। थोड़ी देर बाद लगाया तो फिर नहीं उठाया हम समझे कहीं रुक गए होंगे। सुबह घटना का पता चला।

दो दिन में दोनों जीजा की मौत

प्रदीप ठाकुर ने बताया कि मंगलवार को बड़े जीजा रवि राणावत की बीमारी के चलते निधन हो गया। और बुधवार को छोटे जीजा विक्रम की सड़क हादसे में मौत हो गई। दोनों बहनों की शादी एक साथ की थी। विक्रम के तीन छोटे बच्चे हैं। इसमें 2 लड़कियां हैं जबकि 1 लड़का है। वे अपने माता-पिता की इकलौती संतान थे।

प्रत्यक्षदर्शी बोले- डिवाइडर से हादसा

108 एंबुलेंस को फोन करने वाले राजेश पाटीदार ने बताया कि सुबह गुजर रहे थे। भीड़ लगी थी, लेकिन कोई पुलिस या 108 को फोन नहीं कर रहा था। मैंने 108 को फोन लगाया। पुलिया धंसने से काम चल रहा है। डिवाइडर ही हादसे का कारण रहा है। क्योंकि एक साइड का ही रास्ता चालू है। इससे रात में ज्यादा हादसे की आंशका रहती है।

ये काम पुलिस का है

मामला मेरी जानकारी में नहीं है। हमारा काम मरीजों को छोड़ने का है। यह काम पुलिस का है।

-एसके खरे, सिविल सर्जन, जिला अस्पताल

शव ले जाने के आदेश नहीं

108 एंबुलेंस के स्टाफ का कहना है कि हमें भोपाल से शव ले जान के आदेश नहीं है।

दोषियों पर होगी कार्रवाई

मामला संज्ञान में आया है। अगर कचरा वाहन में शव ले जाया गया है तो गलत है। जांच करवाता हूं। दोषियों पर कार्रवाई होगी।

-बीरेंद्र सिंह, एसपी, धार