डबरा/ग्वालियर। डबरा से 27 किलोमीटर दूर सिंध और पार्वती नदी के संगम स्थल पर ग्राम पवाया में धूमेश्वर धाम है। यहां शिव मंदिर पर सावन के हर सोमवार और महाशिवरात्रि पर मेला भरता है। मंदिर में शिव की जो पिंडी है, वह पार्वती नदी से निकली है। इतिहासकारों के मुताबिक नदी के झरने से गिरने वाले पानी में धुआं उठने से इसे धूमेश्वर महादेव के नाम से जाना जाने लगा। इस मंदिर की सबसे खास बात यह है कि यहां पर सुबह सूरज की सबसे पहली किरण शिवलिंग पर पड़ती है। भक्तों का कहना है कि सुबह मंदिर के पट खुलने से पहले ही शिवलिंग पर जल चढ़ा मिलता है।

महाराज वीर सिंह ने कराया था निर्माण -

प्राचीन धूमेश्वर मंदिर का निर्माण ओरछा के महाराज वीर सिंह देव ने वर्ष 1605-1627 के बीच कराया था। इसके बाद वर्ष 1936-1938 में मंदिर का जीर्णोद्धार ग्वालियर स्टेट के शासक महाराजा जीवाजी राव सिंधिया द्वारा कराया गया। इसके अलावा मंदिर के आगे का भाग मुगलकालीन शैली में नजर आता है।

पूर्ण होती हैं भक्तों की मनोकामनाए -

महंत अनिरुद्ध महाराज ने बताया कि सावन के हर सोमवार यहां दूर-दराज से लोग आते हैं। धर्मिक अनुष्ठान के अलावा भगवान शिव का विशेष अभिषेक किया जाता है। यहां भक्तों की मनोकानाएं पूरी हो जाती है। कई भक्त ऐसे भी है जिनकी मनोकामना पूरी होने के बाद उन्होंने धर्मशाला, बैठने के लिए अलग से कक्षों का निर्माण भी कराया है

पार्वती और सिंध नदी का संगम सिंध नदी और पार्वती नदी का संगम यहां पर देखने को मिलता है। पहाड़ों से होते हुए पानी झरने के रूप में जब गिरता है, तो यह दृश्य मनमोहक लगता है। इसके साथ ही मंदिर के चारों ओर हरियाली और बहते झरने को देखने के लिए भी लोग यहां आते हैं।

आज उमड़ेगी भक्तों की भीड़ सावन के हर सोमवार को धूमेश्वर मंदिर में दूर दराज से भक्त भगवान शिव के दर्शन करने के लिए आते हैं। सुरक्षा की दृष्टि से देखते हुए पुलिस व प्रशासन की ओर से यहां पर खास व्यवस्था की जाती है।