-ड्रामा इन सिटी

-राज्य संग्रहालय में शनिवार को नाटक 'कैनवास' का मंचन

भोपाल। नवदुनिया रिपोर्टर

राज्य संग्रहालय में शनिवार की शाम नाटक 'कैनवास' का मंचन हुआ। यह समाज में फैल रहे घिनौने कृत्य जैसे बाल शोषण पर सीधा प्रहार करता हुआ सा दिखता है। पुरुष चरित्र को घिनौनेपन को चिहिंत करता यह नाटक स्त्री स्वातंत्र्य की वकालत तो करता है, लेकिन साथ में मर्यादा को बनाए रखने के लिए नैतिक मूल्यों की शिक्षा देता है। लगभग डेढ़ घंटे के इस नाटक का लेखन व निर्देशन शाहवेज सिकंदर ने किया है। इसमें ग्लास के जरिए पेंटिंग और अन्य दृश्यों को उजागर किया गया है। इसमें प्रोजेक्टर के जरिए ग्लास पर अलग-अलग तरह के दृश्य दिखाए है।

कला के जरिए समाज को जागरूक करने का प्रयास

नाटक में एक कलाकार की यात्रा दिखाया है। वो घटना से बहुत आहत है। एकांत में रहकर एक विचार की तलाश करता है। कला के माध्यम से समाज को जागरूक करने की कोशिश में यह कलाकार कल्पना की दुनिया में गोते लगाता है। कभी यह एकांत उसके लिए जन्नत बन जाता है। कभी एक अंधेरी गुफा जिसमें वो अपने अस्तित्व को भूल जाता है। इस यात्रा में वो जिस यथार्थ को जी रहा है वो जहर से भी अधिक कड़वा है। प्रकारात्मक दृष्टिकोण से लिखा गया नाटक कल्पनाशीलता को दिखाता है। साथ ही मानव जीवन के बुनियादी उसूलों से जीने का सलीका भी सिखाता है।

किरदार के साथ बढ़ती कहानी

नाटक की शुरुआत में दिखाया कि चित्रकार का अपनी पत्नी से तलाक हो गया है, क्योंकि वह अपनी पत्नी को समय नहीं दे पाता था। वह किसी प्रोजेक्ट को शुरू करता तो उसी में डूबा रहता था। इसी तरह कहानी आगे बढ़ती है, कि कैसे कलाकार सामाजिक विषयों को कैनवास पर उतारने के बारे में सोचता है। ड्रिंक और स्मोक करते हुए सोचता है। खुद को कमरे में बंद करके तो कभी बाहर के लोगों को देखते हुए सोचता है। कहानी इसी प्रोसेस पर आधारित है। अलग अलग किरदार उसके दिमाग में चलते रहते हैं। इसके बाद वह इस निष्कर्ष पर पहुंचता है कि महिलाओं, बच्चों का शोषण करने वाले कहीं बाहरी दुनिया से नहीं आते। हमारी तुम्हारी तरह के लोग ही हैं जो इस सभ्य समाज का हिस्सा है।

नाटक में अभिनय- मोहम्मद आबिद खान, नेहा वाधवानी, मोहन भदौरिया, सत्यम भारद्वाज, इमरान अली, अंगद घेटे, फिरोज खान ने किया है।