अजय जैन, विदिशा।

जिले में सीधे किसानों के बैंक खातों में राशि डालने के चक्कर में सूखा राहत के 263 करोड़ रुपए अटक गए हैं। जिले में राशि आए 20 दिन हो गए हैं। लेकिन सभी किसानों के बैंक खाते नहीं मिल पाने के कारण यह राशि उनके खातों में जमा नहीं हो पा रही है। वित्त विभाग द्वारा बदली गई व्यवस्था के कारण यह स्थिति बन रही है।

मालूम हो अल्प वर्षा के कारण राज्य सरकार ने विदिशा जिले को सूखा प्रभावित घोषित किया है। इसी के बाद राहत देने के लिए राज्य सरकार ने करीब 2 लाख किसानों के लिए 263 करोड़ रुपए की राशि पिछले महीने मंजूर की थी। राज्य शासन द्वारा करीब 20 दिन पहले यह राशि कलेक्टर के खाते में जमा करा दी गई है। लेकिन वितरण व्यवस्था में बदलाव के कारण इस राशि का वितरण नहीं हो पा रहा है। अधिकारिक सूत्रों के अनुसार इस बार राज्य शासन ने सूखा राहत की राशि कलेक्टर के माध्यम से सीधे किसानों के बैंक खातों में जमा करने के आदेश दिए हैं। इतनी अधिक संख्या में किसानों के बैंक खाते उपलब्ध नहीं होने के कारण राशि का वितरण नहीं हो पा रहा है। इधर, कलेक्टर अनिल सुचारी का कहना है कि सूखा राहत की राशि के शीघ्र वितरण के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। पटवारियों के माध्यम से किसानों के बैंक खातों की जानकारी एकत्रित कराई जा रही है।

वित्त विभाग ने खारिज किया प्रस्ताव

जिला प्रशासन ने राहत राशि वितरण में हो रही देरी को देखते हुए वित्त विभाग को व्यवस्था में परिवर्तन का प्रस्ताव दिया था। जिसमें कहा गया था कि किसानों को राहत राशि का वितरण सहकारी बैंक के माध्यम से किया जाए। प्रस्ताव के अनुसार राहत राशि का चेक सहकारी बैंक में भेज दिया जाएगा। जहां से सभी सहकारी समितियों में संचालित किसानों के खातों में यह राशि ट्रांसफर कर दी जाएगी। लेकिन वित्त विभाग ने जिला प्रशासन के इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है।

यह आ रही हैं दिक्कतें

सूखा राहत की राशि वितरण में राजस्व अमले को काफी दिक्कतें आ रही हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार कई किसान शहरी क्षेत्रों में रहते हैं। लेकिन उनकी जमीनें गांवों में हैं। इसके अलावा संयुक्त खाते वाले किसानों के बैंक खाते जमा करना भी मुश्किल हो रहा है। वहीं कोली और ठेके पर दी गई जमीन के मामलों में सुनवाई के बाद भुगतान की स्थिति होने के कारण देरी हो रही है। विदिशा एसडीएम रविशंकर राय के मुताबिक तहसील में करीब 40 हजार किसानों को राशि का वितरण होना है। इनमें से अब तक मात्र 20 हजार किसानों के ही बैंक खाते उपलब्ध हो पाए हैं। यही स्थिति अन्य तहसीलों में भी बन रही है।