इंदौर। व्यापम घोटाला उजागर होने के पांच साल बाद अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अभियोजन कोर्ट में पेश किया है। ईडी की जांच में व्यापम घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग का खुलासा हुआ है। सबूतों के आधार पर प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत मामला दर्ज करते हुए ईडी ने डॉ. जगदीश सागर, डॉ. विनोद भंडारी, डॉ. पंकज त्रिवेदी के साथ नितिन महिंद्रा को भी आरोपी बनाया है।

ईडी ने मामले में जांच के बाद स्पेशल कोर्ट में 2,505 पेज की जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की है। जांच में ईडी को सबूत मिले हैं कि पीएमटी और प्री-पीजी में सागर और भंडारी व्यापम के तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक पंकज त्रिवेदी और सिस्टम एनालिस्ट नितिन महिंद्रा के साथ मिलकर गड़बड़ी करते थे। इसमें पैसा लेकर विद्यार्थियों का प्रवेश तय किया जाता था। सागर और भंडारी रैकेटियर थे, जबकि व्यापम के त्रिवेदी व महिंद्रा सहयोगी। उम्मीदवारों से वसूला पैसा सभी आरोपी आपस में बांटते थे। इसी पैसे से करीब 14 करोड़ की चल-अचल संपत्ति भी जुटाई गई थी। तीन अटैचमेंट आदेशों के जरिए ईडी पहले ही संपत्ति अटैच कर चुका है।

ये था मामला

देश-प्रदेश में सुर्खियां बटोरने वाले व्यापम घोटाले का सिरा इंदौर पुलिस ने पकड़ा था। 2013 में होटल पथिक में छापा मारकर पुलिस ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा में बैठने वाले फर्जी विद्यार्थियों को पकड़ा था। मामले में 7 जुलाई को एफआईआर दर्ज हुई थी। बाद में जांच एसटीएफ को सौंपी गई थी। मामले में कुल 10 एफआईआर दर्ज की गई थीं। इसी को आधार बनाते हुए ईडी ने भी जांच शुरू की थी।