भोपाल, नवदुनिया प्रतिनिधि। सीबीएसई स्कूलों की मनमानी पर रोक लगाने के लिए शासन भी गंभीर नहीं है। हर साल विभिन्न् प्रकार की फीस के नाम पर स्कूलों द्वारा अभिभावकों से भारीभरकम राशि वसूल की जा रही है। कुछ राशि तो ऐसी ली जा रही है, जिसमें बच्चों की ट्यूशन फीस से कोई लेना-देना नहीं है। सीबीएसई स्कूलों में अगर अभिभावक एक या दो बच्चों को पढ़ा रहे हैं तो उन्हें सालभर में एक से डेढ़ लाख रुपए तक खर्च करने पड़ेंगे।

अगर शहर के कुछ स्कूलों की बात करें तो सेंट जोसेफ कोएड में पांचवीं कक्षा की सालभर की फीस 27,950 रुपए है। वहीं, कार्मल कॉन्वेंट में चौथी कक्षा की फीस 34000 रुपए, कैम्पियन स्कूल में दूसरी कक्षा का फीस 36000 रुपए तक देनी पड़ रही है। वहीं, सागर पब्लिक स्कूल में चौथी कक्षा का सालाना फीस 55,000 रुपए है। सीबीएसई स्कूलों में हर साल री-एडमिशन के नाम पर भी बच्चों से फीस ली जा रही है। हर साल अभिभावकों को लंबी चौड़ी विभिन्न् प्रकार की फीस से संबंधित स्लिप बुक थमाई जा रही है। इसमें कई प्रकार की फीस किस नाम पर ली जा रही है, इस संबंध में अभिभावकों को जानकारी तक नहीं दी गई है।

इसके अलावा स्पोर्ट्स, एक्टिविटी, परीक्षा, कम्प्यूटर, लैब, एलुमनी, मेंटेनेंस, स्मार्ट क्लास आदि 25 प्रकार की फीस भी ली जा रही है। हर स्कूल में क्वॉटरली फीस 15 से 20 हजार रुपए तक की वसूली की जा रही है। अभिभावकों का कहना है कि मार्च से मई तक पूरे तीन माह तक पढ़ाई नहीं होती है, फिर भी स्कूल संचालक पूरे माह के फीस लेते हैं।

छुट्टियों के दौरान भी ट्यूशन व ट्रांसपोर्ट फीस ले लेते है

कोलार निवासी रवि शर्मा का कहना है कि छुट्टी के दौरान मार्च से मई तक बच्चे स्कूल नहीं जाते हैं, फिर भी उन्हें ट्रांसपोर्ट और ट्यूशन फीस देनी होती है। साथ ही स्कूल में हर साल 1000 से 2000 रुपए बढ़ा दिए जाते हैं। यहां तक की फीस बुक, डायरी आदि के नाम पर भी राशि वसूली जा रही है।

पढ़ाई आधे महीने की फीस पूरे की

रचना नगर के बीएस तिवारी का कहना है कि हर साल एनुअल चार्जेस नहीं लेना चाहिए। इसके अलावा मार्च व मई माह में आधे से भी कम कक्षाएं लगती हैं, लेकिन पूरे महीने की फीस ले लेते हैं। शासन निजी स्कूलों की मनमानी नहीं रोक पा रहा है।

सीबीएसई स्कूलों में व्यवस्था को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी मॉनिटरिंग करेंगे और निर्णय ज्वॉइंट डायरेक्टर करेंगे। इसके बाद मान्यता व संबद्धता के लिए दोबारा निरीक्षण के बाद निर्णय होगा। फीस को लेकर अभी तक कोई गाइडलाइन नहीं बनी है। - धर्मेन्द्र शर्मा, जिला शिक्षा अधिकारी