ग्वालियर। क्या आप जानते हैं, पिछले कुछ वर्ष में देशी शराब के शौकीनों की संख्या घटती जा रही है। जबकि विदेशी शराब, बियर पीने के शौकीन लगातार बढ़ते जा रहे हैं। यह हम नहीं कह रहे हैं बल्कि मध्य प्रदेश के आबकारी विभाग के आंकड़े बंया कर रहे हैं। मतलब साफ है शराब से सरकार का खजाना बढ़ा है पर समाज के लिए मुसीबतें भी बढ़ी हैं। ज्यादा बिकती शराब का असर दूसरी तरफ जुआ, सट्टा व अवैध शराब कारोबार के मामले बढ़ने से समाज पर भी इसका प्रभाव पड़ा है और तानाबाना भी बिगड़ा है।

आंकड़े पर ही नजर डाले तो सत्र 2016-17 के मुकाबले बीते वर्ष 2017-18 में देशी शराब की खपत में 21 लाख प्रूफ लीटर की कमी आई है। जबकि विदेशी शराब में लगभग 8 लाख प्रूफ लीटर और बियर में 96 लाख बल्क मीटर की वृद्धि दर्ज की गई है।

आबकारी विभाग मध्य प्रदेश सरकार को सबसे ज्यादा राजस्व देने वाला विभाग ऐसे ही नहीं कहलाता है। देशी और विदेशी शराब की बिक्री से हर साल सरकार का खजाना बढ़ता जा रहा है। पिछले दो वर्षो की बात करें तो सिर्फ शराब बिक्री से ही जहां वर्ष 2016-17 में 7519.42 करोड़ का मुनाफा हुआ था तो वहीं बीते वर्ष 2017-18 में यह मुनाफा 8223.38 करोड़ दर्ज हुआ है। जबकि इस वर्ष भी यह आंकड़ा साढ़े आठ हजार करोड़ के लगभग आने की उम्मीद ह

शराब के चलन से समाज की बिगड़ी चाल

प्रदेश में शराब की लगातार बढ़ती बिक्री से समाज की चाल भी बिगड़ी है। ग्वालियर जिले की बात ही करें तो यहां बीते तीन वर्ष में जुआ, सट्टा, हथियार तस्करी व शराब का अवैध कारोबार बढ़ने से समाज पर विपरीत प्रभाव पड़ा है। यह हैं दो साल के आंकड़े।

ब्लड में शराब की मात्रा बढ़ने पर अक्रामक भी हो जाते हैं

शराब के पीने पर निर्भर करता है कि आम व्यक्ति पर उसका क्या असर पड़ता है। यदि शराब का सेवन ज्यादा किया जाए और ब्लड़ में उसकी मात्रा बढ़ती है तो आदमी सुस्त होने लगता है। इतना ही नहीं मात्रा और बढ़ने पर सेंस खत्म होता है। मतलब किस्से क्या बोलना है क्या करना है। कदम भी डगमगाते हैं। इसके साथ ही व्यवहार आक्रामक हो जाता है। ऐसे में अपराध होने की संभावना 90 फीसदी रहती है। लम्बे समय से अधिक मात्रा में सेवन करने से शरीर पर भी विपरित प्रभाव पड़ता है।

-डॉ. मुकेश चुंगलानी, मनोचिकित्सक