उज्जैन। नर्मदा-शिप्रा बहुउद्देशीय माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना से क्षेत्रीय किसान भी खुश हैं। नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण (एनवीडीए) ने प्रशासन के अफसरों की मौजूदगी में बुधवार को किसानों को प्रोजेक्ट बताया और इससे होने वाले फायदे भी बताए। इससे किसान इतने खुश नजर आए कि एक ने तो सरकार को बधाई भी दे दी।

बृहस्पति भवन में बुधवार को इस प्रोजेक्ट को लेकर किसानों के साथ सीधी बातचीत की गई। एनवीडीए के अधिकारियों ने बताया सरकार ने नर्मदा-मालवा लिंक अभियान की घोषणा की है। इसके तहत मालवा की शिप्रा, गंभीर, पार्वती और कालीसिंध नदी कछारों तक नर्मदा जल उद्वहन कर ले जाने की परियोजना तैयार की है। यह योजना नर्मदा-मालवा लिंक अभियान का महत्वपूर्ण चरण है।

इस योजना के धरातल पर उतरने से उज्जैन व शाजापुर जिलों में 30 हजार हेक्टेयर सिंचाई कमांड क्षेत्र सृजित होगा और पेयजल तथा उद्योगों के लिए पानी उपलब्ध कराया जाएगा। बैठक में किसानों ने बताया इस परियोजना से सभी को फायदा होगा। पीने के लिए पानी मिलेगा और फसलों का उत्पादन दोगुना हो जाएगा। योजना के बारे में जानकर एक किसान ने हाथोंहाथ बधाई भी दे दी। बैठक में प्रशासन की ओर से एडीएम जीएस डावर मौजूद थे।

2215 करोड़ का प्रोजेक्ट, ऐसे आएगा प्रोजेक्ट से पानी...

- प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत 2215 करोड़ 84 लाख रुपए होगी।

- ओंकारेश्वर जलाशय से 15 क्यूमेक (15 घनमीटर प्रति सेकंड क्षमता) नर्मदा जल उद्वहन होगा।

- प्रथम पंपिंग स्टेशन से कुल 435 मीटर जल का उद्वहन कर पांच पंपिंग स्टेशनों से सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराया जाएगा।

- जल उद्वहन के लिए करीब 89 मेगावाट बिजली की खपत होगी।

- प्रोजेक्ट 42 माह में पूरा करने का लक्ष्य।

- कुल 15 घनमीटर प्रति सेकंड जल उद्वहन होगा, इसमें से 10 घनमीटर प्रति सेकंड सिंचाई के लिए व 5 घन मीटर प्रति सेकंड पेयजल, उद्योग व घाट के लिए उपयोग किया जाएगा।

- अंडरग्राउंड पाइपलाइन के माध्यम से जल वितरण किया जाएगा।

- किसानों को हर 2.5 हेक्टेयर तक 20 मीटर दाबयुक्त पानी मिलेगा। इससे किसान अपने खेतों में ड्रिप या स्प्रिंकर पद्घति से सिंचाई कर सकेंगे।