सार्थक पहल : शहरवासियों ने 'नवदुनिया' की मुहिम का समर्थन कर लिया संकल्प

शहर में इस बार भी 100 से अधिक स्थानों पर होगा होलिका दहन

अशोकनगर। नवदुनिया न्यूज

शहर में इस बार भी 100 से अधिक स्थानों पर होलिका दहन किया जाएगा। इस बार जागरूकता अभियान के माध्यम से शहरवासियों से अपील की गई है कि वह इस बार कंडे की होली जलाएं। गोबर से बनी लकड़ी का उपयोग करें ताकि पेड़ों को बचाया जा सके।

इस दौरान प्रबुद्घ वर्ग की ओर से अनेक युवाओं, व्यापारियों और सामाजिक संस्थाओं से जुड़े लोगों ने कहा है कि नवदुनिया ने जो जागरूकता अभियान चलाया गया है वह सराहनीय है। हम कंडे की होली में सहभागिता दिखाएं। पर्यावरण संरक्षण के प्रति हम संकल्प लेते हैं कि इस अभियान को जन-जन तक पहुंचाने में हिस्सा बनेंगे। इस संबंध में लोगों को बताया गया कि नवदुनिया का यह लगातार तीसरा वर्ष है जब कंडे की होली जलाने के लिए लोगों को प्रेरित किया जा रहा है। पिछले दिनों कलेक्टर डॉ. मंजू शर्मा ने भी आम लोगों से अपील की थी कि वह कंडे की होली जलाएं और कंडे की लकड़ी का ही उपयोग करें। इस दौरान सुबह की सैर पर निकलने वाले लोगों ने संकल्प लिया कि वह कंडों की होली जलाएंगे।

पर्यावरण बचाने के लिए यह एक अच्छी पहल

प्रकृति को हरा-भरा बनाए रखने की हम सबकी जिम्मेदारी है। त्योहार हम जैसे मनाएंगे, वैसे मनेंगे, लेकिन प्रकृति का भी ध्यान हमें रखना होगा। हम स्वयं भी इस बार कंडे की होली जलाएंगे और लोगों को भी प्रेरित करेंगे कि वह अपनी कॉलोनी में कंडे की होली जलाए। पर्यावरण का संतुलन बनाने में सहयोग प्रदान करे। कंडे की होली जलाने का अभियान एक शानदार प्रयास है।

शिरीष खैर, व्यवसायी

पेड़ बचेंगे तो प्रकृति का संतुलन बनेगा

कहते हैं कि जितनी प्रकृति हरी-भरी होगी जितने पेड़ होंगे उतनी वर्षा अधिक होगी। अधिक वर्षा होगी तो यह मानव जीवन के लिए श्रेयकर होगा। मानव जीवन के लिए जरूरत है कि अधिक से अधिक पेड़ लगाए जाएं। न कि पेड़ों को काटकर उसकी लकड़ी का उपयोग होलिका दहन में किया जाए। इसके लिए कंडों की होली जलाने की प्रक्रिया बेहतर है। हम संकल्प लेते हैं कि हम कंडों की होली जलाने के लिए लोगों को जागरूक करेंगे।

राजेश कक्का, गल्ला व्यापारी

लकड़ियों का उपयोग नहीं करेंगे

होलिक दहन हर बार होता है, लेकिन जागरूकता का असर अब समाज के लोगों में दिखने लगा है। अधिकांश स्थानों पर जो होलिका दहन होते हैं। इनमें लकड़ी का उपयोग कम होता जा रहा है। उसकी जगह कंडे आकार ले रहे हैं इस बार गोबर की लकड़ी मिलने से यह अभियान और भी सार्थक होगा। हम लोगों को प्रेरित करेंगे।

अवधेश खैरा, पेंटस व्यवसायी

नई पीढ़ी भी जागरूकता के साथ आगे आए

यह हमारे देश की संस्कृति है। यह हमारे सांस्कृतिक त्योहार हैं। इस तरह का अभियान इन सांस्कृतिक त्योहारों को मनाने में जो प्रयास किए जा रहे हैं उससे नई पीढ़ी को भी सबक लेने की जरूरत है। युवाओं को चाहिए कि वह इस अभियान का हिस्सा बने ताकि इस अभियान को आगे तक ले जाया जा सके।

विनोद अग्रवाल, गल्ला व्यवसायी

सकारात्मक सोच से ही परिवर्तन आएगा

हमारी सोच जैसी होगी उसके परिणाम भी वैसे ही मिलेंगे। यदि हम सकारात्मक सोचते हैं तो उसका प्रभाव भी हमें सकारात्मक रूप से मिलेगा। इस दिशा में यदि कंडों की होली का प्रयोग होलिका दहन में किया जाता है तो यह सकारात्मक प्रयास सार्थक होगा। इससे हमें मदद मिलेगी और शहर में 100 स्थानों पर जलने वाली होलिका दहन में यदि कंडों का उपयोग किया जाता है तो कई क्विंटल लकड़ियों को बचाया जा सकता है।

संजय अग्रवाल, पेट्रोलपम्प व्यवसायी

खुद भी प्रेरित हो, दूसरों को भी प्रेरित करें

जागरूकता से ही हम लोगों की सोच को बदल सकते हैं इसलिए स्वयं भी प्रेरित हो और अन्य लोगों को भी प्रेरित करें। इसका असर जरूर लोगों पर पड़ता है। हम जो प्रयास करेंगे वह कभी निश्फल नहीं होंगे। सार्थक प्रयास और सार्थक सोच ही हमें आगे तक ले जा सकती है। यह प्रयास हमें होलिका दहन में करना होगा।

महेश शर्मा, सेवानिवृत शिक्षक

जहां जरूरत हो वहां स्वयं भी जाएंगे

कंडे की होली जलाने का जो अभियान चलाया गया है वह एक शानदार अभियान है। इसका असर जरूर इस बार हम होली पर देखेंगे। जहां भी जरूरत पड़ेगी हम वहां लोगों को जागरूक करेंगे। प्रत्येक दिन गल्ला मंडी में कृषक आते हैं, साथ में हम्माल और मजदूर भी मंडी में रहते है ंऔर जरूरत पड़ेगी तो लोगों तक पहुंचकर उन्हें जागरूक करेंगे।

सौरभ गुप्ता, गल्ला व्यवसायी

सामाजिक संगठनों को भी सामने आना चाहिए

कंडे की होली जलाने की जिम्मेदारी जितनी आम आदमी की है उतनी ही जिम्मेदारी सामाजिक संस्थाओं की भी है। शहर की सामाजिक संस्थाओं को आगे आना चाहिए। प्रयास करने से सफलता जरूर मिलती है। हम यदि बदलेंगे तो हमें भी देखकर लोग बदलते है। गायत्री परिवार का मंत्र इस दिशा में सबसे कारगर है। हम बदलेंगे युग बदलेगा।

अखिलेश गुप्ता, मशीनरी व्यापारी

पर्यावरण के प्रति जागरूकता दिखाएं

हम जिस क्षेत्र में है। वहां हमने अपनी कारगर पद्घति से सफलता पाई है। यदि यही पद्घति हम सामाजिक संदर्भ में लाएं तो हम समाज में भी एक नए परिवर्तन की मिशाल पेश कर सकते हैं। इसमें कंडो की होली का उपयोग करना मानवता के लिए सर्वश्रेष्ठ अभियान है। हम संकल्प लेते हैं कि इस अभियान को आगे तक ले जाएंगे।

राहुल गुप्ता, होटल व्यवसायी

गोबर की लकड़ी को अपनाएं और होली मनाएं

जब गोबर से बनी लकड़ी उपलब्ध है। तब पेड़ों की लकड़ी का उपयोग करने की जरूरत समाज में नहीं होना चाहिए। बदले हुए समय में साधन तेजी से सामने आए हैं। ऐसे में हमें गोबर की लकड़ी का उपयोग करना चाहिए। साथ में होलिका दहन के लिए संकल्प लेना चाहिए कि हम पेड़ों को बचाने के लिए आगे रहेंगे और पेड़ों की लड़की का उपयोग होलिका दहन में न करके कंडों की होली जलाएंगे।

संजय गुप्ता, सीमेंट व्यवसायी

सोच ही बदलाव का कारण बने

सोच से ही हम समाज के हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना सकते हैं। इसलिए हमें अपनी सोच में बदलाव लाना होगा। इसके लिए हमें आगे आने की आवश्यकता है। इस तरह का प्रयास जो नवदुनिया ने किया है वह सराहनीय है। इसमें कंडे की होली जलाने का प्रयास सफल हो। हम संकल्प लेते हैं कि हम लोगों को इस होलिका दहन पर कंडे की होली जलाने के लिए प्रेरित करेंगे।

अशोक जैन, गल्ला व्यवसायी

फोटो161ए- सामूहिक रूप से संकल्प लेते हुए शहर के प्रबुद्घ नागरिक।

फोटो161बी- शिरीष खैर।

फोटो161सी- राजेश कक्का।

फोटो161डी- अवधेश गुप्ता।

फोटो161ई- विनोद अग्रवाल।

फोटो161एफ- संजय अग्रवाल।

फोटो161जी- महेश शर्मा।

फोटो161एच- सौरभ गुप्ता।

फोटो161आई- अखिलेश गुप्ता।

फोटो161जे- राहुल गुप्ता।

फोटो161के- संजय गुप्ता।

फोटो161एल- अशोक जैन।