कपिल नीले, इंदौर। उच्च शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए यूजीसी ने शिक्षकों की योग्यता का पैमाना तय किया है। 2021 से उन्हीं शिक्षकों को पढ़ाने को मौका दिया जाएगा, जिनके पास पीएचडी की उपाधि होगी। नए नियमों के मुताबिक विदेशी यूनिवर्सिटी से पीएचडी करने वाले भारतीय को तब विश्वविद्यालय और कॉलेज में पढ़ाने के लिए मान्य किया जाएगा, जब उनकी पीएचडी यूजीसी नियम 2010 के मापदंड के मुताबिक होगी। इसका फैसला एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटी (एआईयू) करेगी। एसोसिएशन की सूची में आवेदक की यूनिवर्सिटी का नाम शामिल है, तो उसे नौकरी के लिए नेशनल इलिजिबिलिटी टेस्ट से छूट मिलेगी।

अधिकारियों के मुताबिक फॉरेन यूनिवर्सिटी को लेकर एआईयू ने कुछ नियम बनाए हैं। उनकी सूची के आधार पर ही इन विवि के शोधार्थियों को नौकरी के लिए पात्र माना जाएगा। यूजीसी ने इसके लिए जून के पहले सप्ताह में आदेश जारी किया है। इसमें इसी सत्र से सभी विवि को भर्ती प्रक्रिया के दौरान नियम का पालन करने को कहा है। अधिकारी की माने तो कई ऐसे कॉलेज और निजी विवि हैं, जहां विदेशी यूनिवर्सिटी से पीएचडी किए हुए शिक्षक रखे गए हैं।

अब यूजीसी की मंशा है कि वहां से पीएचडी करने वाले उन्हीं लोगों को पढ़ाने का मौका मिले, जिन्होंने गवर्नमेंट व अच्छे संस्थानों से शोध कार्य किए हैं। जिससे विद्यार्थियों और शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने में फायदा हो सके। हालांकि छह महीने पहले हुई समीक्षा के दौरान यह सामने आया कि कुछ शिक्षकों ने ऐसी विदेशी यूनिवर्सिटी से पीएचडी की है जिसका स्तर भारतीय विवि के मानकों पर खरा नहीं उतरता है। यही वजह है कि यूजीसी ने इनकी पीएचडी और विवि को लेकर एआईयू की मंजूरी लेने को कहा है।

लुभाते हैं विद्यार्थियों को -

कई निजी विवि और कॉलेजों में विदेशों से पीएचडी कर चुके शिक्षक पढ़ा रहे हैं। इनके जरिये प्रबंधन विद्यार्थियों को अपने संस्थान में दाखिले को लेकर लुभाते हैं। सूत्रों के मुताबिक एडमिशन लेने के बाद विद्यार्थियों को यह लगता है कि जिस तरह दाखिले के दौरान बताया गया था, संस्थान में वैसी पढ़ाई नहीं होती है। इसके चलते कई विद्यार्थी एडमिशन ट्रांसफर करवा लेते हैं। इसे लेकर यूजीसी ने नया नियम सख्ती से लागू करने पर जोर दिया है।

बगैर पीएचडी के नहीं बन सकेंगे शिक्षक -

मानव संसाधन मंत्रालय के निर्देश पर यूजीसी ने भर्ती नियमों में बदलाव किया है। अब 2021 से विवि में बगैर पीएचडी वालों की भर्ती नहीं की जाएगी। जबकि कॉलेज में नेट क्वालिफाइ आवेदकों को शिक्षक बनाया जाएगा। मगर उनका प्रमोशन तभी होगा, जब वे पीएचडी खत्म कर चुके होंगे।

इसी सत्र से लागू होगा नियम -

यूजीसी ने साफ किया है कि जिन विदेशी विवि की पीएचडी का स्तर यूजीसी नियम 2010 के मुताबिक नहीं होगा, उन्हें नेशनल इलिजिबिलिटी टेस्ट (नेट) देना होगा। इसके बाद ही वे लेक्चरर, रीडर और प्रोफेसर के लिए पात्र होंगे। वहीं जिनकी पीएचडी नियम मुताबिक होगी उन्हें नेट देने की जरूरत नहीं होगी। हालांकि उन पर बाकी भर्ती नियम लागू किए जाएंगे। नियम इसी सत्र से लागू होगा।

यूजीसी का सही निर्णय -

बांग्लादेश, भूटान और यूरोप के छोटे देशों की प्राइवेट यूनिवर्सिटी से पीएचडी कर कई शिक्षक नौकरी पा चुके हैं। इससे शिक्षा का स्तर गिरता जा रहा है। यूजीसी ने नए नियम लागू कर सही निर्णय लिया है। विदेशी यूनिवर्सिटी के पीएचडी के लिए अब एआईयू की मंजूरी जरूरी है। इस प्रक्रिया से अच्छे शिक्षक मिलेंगे। - डॉ. अभय कुमार प्रभारी, रुसा प्रोजेक्ट, डीएवीवी

नियम का सख्ती से हो पालन -

यूजीसी नियम 2010 के मुताबिक नौकरी के लिए पीएचडी होना जरूरी है। यह नियम विदेशी विवि से पीएचडी करने वालों पर भी लागू होगा। इसके लिए उनकी पीएचडी का मापदंड जांचने की जिम्मेदारी एआईयू को दी है। उसकी मंजूरी के बाद ही आवेदक को भर्ती प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा। - डॉ. रजनीश जैन, सेक्रेटरी, यूजीस