- पानी की पाइपलाइन पर मिट्टी डालकर बनाई जा रहीं लोहे की दुकानें

कोलार। नवदुनिया प्रतिनिधि

कोलार पानी की पाइपलाइन पर पिछले तीन सालों से दुकानें बन रही हैं। पाइपलाइन पर पहले मिट्टी व मलबा डाला जाता है। इसके बाद लोहे की दुकानें बनवाकर अतिक्रमणकारी रख लेते हैं। एक-एक कर दुकानों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। दो साल पहले पाइपलाइन के ऊपर दो दर्जन दुकानें थीं। अब चार दर्जन से ज्यादा दुकानें बन गई हैं। अतिक्रमणकारियों ने लोहे की दुकानें बनाकर पाइपलाइन पर रखी हैं। अतिक्रमण करने वालों में से किसी ने चिकन, बैंड, फर्नीचर की दुकान खोल ली है तो कई लोगों ने 3 से पांच हजार माह पर दुकानें किराए पर दे दी हैं। शिकायत के बावजूद नगर निगम दुकानों को हटाने की कार्रवाई नहीं कर रहा है।

इस संबंध में नगर निगम जोन-18 के प्रभारी शैलेष सिंह चौहान ने बताया कि अतिक्रमण शाखा के प्रभारी द्वारा कोलार क्षेत्र में अतिक्रमण विरोधी मुहिम चलाई जाती है। पाइपलाइन पर हुए अतिक्रमण को कई बार हटाया गया है।

सर्वधर्म ब्रिज से भोज मुक्त विवि की ओर जाने वाली पाइपलाइन पर बनी दुकानें

कोलार सर्वधर्म ब्रिज से भोज मुक्त विवि की ओर जाने वाली पाइपलाइन पर अतिक्रमण कर दुकानें खोली जा रही हैं। जल्द ही नगर निगम ने दुकानें नहीं हटाई तो कोलार नहर चौराहे तक पाइपलाइन के ऊपर दुकानें खुल जाएंगी। यहां से रोजाना निगम के अधिकारी आना-जाना करते हैं। इसके बावजूद ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

पाइपलाइन पर ऐसे खोली जा रहीं दुकानें

अतिक्रमणकारी पहले पाइपलाइन पर जगह ढूंढ़ते हैें। दो से तीन बाद मिट्टी व मलबा डालकर पाइपलाइन को दबा देते हैं। डाले गए मिट्टी पर मलबे को समतल करा देते हैं। इसके बाद ऑर्डर देकर लोहे की दुकानें बनवाते हैं। एक से दो सप्ताह तक रात के समय दुकान रखवा देते हैं। कुछ दिनों बाद दुकान खोल लेते हैं।