गुना। मध्य प्रदेश में सबसे चौंकाने वाला परिणाम गुना-शिवपुरी सीट का रहा। यहां कांग्रेस महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया को भाजपा के डॉ. केपी यादव ने 1 लाख 24 हजार से ज्यादा वोटों से हराया। केपी यादव सिंधिया के ही समर्थक थे, लेकिन बाद वे भाजपा में शामिल हो गए। भाजपा ने उन्हें ही सिंधिया के सामने लोकसभा का उम्मीदवार बनाकर बड़ा दांव खेला था। सिंधिया की हार प्रदेश में कांग्रेस के लिए दिग्विजय सिंह (भोपाल) के बाद दूसरी सबसे बड़ी हार मानी जा रही है।

बता दें कि इस सीट से चुनाव लड़ रहे सिंधिया ने अपनी जीत तय करने के बसपा उम्मीदवार को भी ऐन चुनाव से पहले अपनी पार्टी में शामिल करा लिया था। लेकिन उसका भी असर होता नहीं दिखा क्योंकि वो पूरे समय गुना में पीछे ही रहे। इस सीट की आठों विधानसभा के शुरुआती रुझान में ही पिछड़ने के बाद से सिंधिया अंत तक मार्जिन कवर नहीं कर सके।

भाजपा प्रत्याशी ने धीमी मतगणना पर नाराजती जताई

शिवपुरी से भाजपा प्रत्याशी केपी यादव ने धीमी गति से मतगणना और राउंड वार जानकारी ना देने पर शिवपुरी जिला निर्वाचन अधिकारी अनुग्रह पी और गुना के निर्वाचन अधिकारी भास्कर लक्षकार पर आरोप लगाए थे कि वह प्रत्येक राउंड वार मतगणना की जानकारी देने में आनाकानी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस मामले में उन्होंने निर्वाचन आयोग को शिकायत की है। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन के अधिकारी सत्ता के दबाव में मतगणना की जानकारी देने में आनाकानी कर रहे हैं। गौरतलब है कि प्रारंभिक दौर की मतगणना में भाजपा के केपी यादव कांग्रेस प्रत्याशी ज्योतिरादित्य सिंधिया से लगभग 16000 वोटों से आगे चल रहे थे। गुना शिवपुरी संसदीय क्षेत्र में भाजपा के केपी यादव ने अपनी बढ़त पर प्रतिक्रिया में कहा कि पूरे देश में मोदी लहर है और गुना शिवपुरी संसदीय क्षेत्र में भी मोदी लहर का असर है।

शुरुआती रुझान में बढ़त मिलने पर भाजपा उम्मीदवार केपी यादव काफी खुश नजर आए और उन्होंने कहा कि, ये चुनाव जनता लड़ रही है और मकसद नरेंद्र मोदी को दोबारा प्रधानमंत्री बनाना है। वहीं भाजपा उम्मीदवार ने इस बार अपनी जीत का दावा भी जताया।

गुना-शिवपुरी लोकसभा सीट पर लोकसभा चुनाव के छठवें चरण में 12 मई को मतदान हुआ था, यहां 70.02 प्रतिशत मतदान हुआ। यहां मुकाबला कांग्रेस के ज्योतिरादित्य सिंधिया और भाजपा के डॉ. केपी यादव के बीच है। गुना-शिवपुरी संसदीय सीट तीन जिलों की आठ विधानसभा सीटों को मिलाकर बनी है। गुना जिले की बमोरी व गुना, अशोकनगर जिले की चंदेरी, मुंगावली व अशोकनगर और शिवपुरी जिले की पोहरी, कोलारस व शिवपुरी विधानसभा शामिल हैं।

तीन पीढ़ियों से इस सीट पर सिंधिया परिवार का कब्जा

मध्य प्रदेश की गुना लोकसभा सीट पर तीन पीढ़ियों से सिंधिया घराने का कब्जा रहा है। ग्वालियर के बाद गुना ही वह लोकसभा सीट है, जहां से सिंधिया परिवार चुनाव लड़ना पसंद करता है। इस सीट से सांसद ज्योतिरादित्य की दादी विजयराजे सिंधिया और पिता माधवराव सिंधिया ने निर्दलीय चुनाव जीतकर इतिहास रचा था। पिछले लोकसभा चुनाव में मोदी लहर में भी गुना सीट से ज्योतिरादित्य ने भाजपा नेता और प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री जयभान सिंह पवैया को एक लाख 20 हजार 792 वोटों से शिकस्त दी थी।

सिंधिया घराने के गढ़ में भाजपा ने कई बार सेंध लगाने की कोशिश की, लेकिन विजयाराजे सिंधिया के बाद से भाजपा को यहां पर कोई ऐसा उम्मीदवार नहीं मिला, जो माधवराव सिंधिया और ज्योतिरादित्य सिंधिया को हरा सके। सिंधिया परिवार की तीन पीढ़ियों को गुना लोकसभा सीट से 14 बार सांसद के तौर जनता ने चुनकर भेजा है। सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया की दादी विजयाराजे सिंधिया छह बार गुना से सांसद रहीं, तो उनके पिता माधवराव चार बार चुने गए थे। ज्योतिरादित्य भी चौथी बार गुना लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया।