आरक्षक की हत्या का एक आरोपी नोएडा में पान-मसाला और दूसरा गाजियाबाद स्टेशन पर बेच रहा था पूड़ी-सब्जी

- पुलिस ने कभी बाबा तो कभी बैंक कर्मचारी व सेल्समेन बन, ढाई महीनेमें पकड़ा

- करीब एक वर्ष से फरार थे 30-30 हजार रूपए के दोनों इनामी, भोपाल एसटीएस की भी थी नजर

गुना। नवदुनिया प्रतिनिधि

आरक्षक अशोक उरैती हत्याकांड का मुख्य आरोपी नोएडा में सेल्समेन बनकर पान-मसाला, सिगरेट और दूसरा आरोपी गाजियाबाद रेलवे स्टेशन पर वेंडर बनकर सब्जी-पूड़ी बेच रहा था। इतना ही नहीं, दोनों ही आरोपियों ने अपने नाम भी बदल लिए थे। इसी बीच गुना पुलिस को दोनों के दिल्ली के नोएडा सेक्टर में होने की भनक लगी, तो ढाई महीने की मशक्कत के बाद पुलिस आरोपियों तक पहुंच गई। हालांकि, इस दौरान पुलिस को कभी बाबा का वेश धरना पड़ा, तो कभी बैंक कर्मचारी और सेल्समेन भी बनना पड़ा। गौरतलब है कि लगभग एक वर्ष से फरार दोनों आरोपियों पर 30-30 हजार रुपए का इनाम घोषित था। आरोपियों ने अपने सात अन्य साथियों के साथ मिलकर करीब एक साल पहले आरक्षक अशोक उरैती की हत्या की थी। मामले के सभी 7 आरोपी पकड़े जो चुके थे, लेकिन दोनों मुख्य बदमाश फरार थे। बदमाश गैंग बनाने अपने एक साथी को पेशी से लौटते समय छुड़ाने पहुंचे थे और इसी दौरान पुलिस आरक्षक अशोक उरैती शहीद हो गए थे।

हत्याकांड का मुख्य आरोपी रंजीत तोमर निवासी म्याना नोएडा में सेल्समेन बनकर पान-मसाला, सिगरेट आदि बेचने का काम करने लगा था। वहीं दूसरा आरोपी सुनील कुशवाह निवासी बरवटपुरा गाजियाबाद रेलवे स्टेशन पर पूड़ी-सब्जी बेचता था। दोनों अलग-अलग रहते थे और मोबाइल भी नहीं चलाते थे। दोनों ने अपने नाम बदल लिए थे, जिनमें रंजीत ने सूर्या सिंह और सुनील ने अपना नाम टोनी रख लिया था। हालांकि, दोनों एक-दूसरे के संपर्क में रहते थे और अपना हुलिया भी बदल लिया था। रंजीत पहले से काफी दुबला होकर दाढ़ी रखने लगा था और सुनील स्टाईलिश तरीके से बाल कटाकर, कान में कुंडल और गले में लॉकेट पहनने लगा था। दोनों ने पुलिस से भागने के दौरान फैक्ट्रियों में भी काम किया।

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पुलिस बनी बाबा, सेल्समेन बन बेचा सामान

दोनों बदमाशों की लोकेशन दिसंबर माह में ही पुलिस को मिल गई थी, लेकिन इतने बड़े शहर में बदमाशों को पकड़ना मुश्किल हो रहा था। क्योंकि दोनों ने अपना नाम और हुलिया तक बदल लिया था। इसके बाद पुलिस ने आरोपियों को पकड़ने कभी बाबा बनकर रेलवे स्टेशन पर रात बिताई, तो कभी सेल्समेन बनकर सामान भी बेचा। बैंक से लोन दिलाने वाले कर्मचारी बनकर पुलिस कई फैक्ट्रियों में भी पहुंची, लेकिन बदमाशों से सामना नहीं हो रहा था।

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ऐसे पकड़ में आए बदमाश

बदमाशों को पकड़ने के लिए कोतवाली के एसआई राम शर्मा, सायबर सेल प्रभारी मसीह खान, एएसआई असलम खान दिसंबर माह से लगातार नोएडा और गाजियाबाद जा रहे थे और बिना वर्दी में वहां घूमकर बदमाशों की तलाश करते थे। 12 मार्च को राम शर्मा को रंजीत टकराया, जिसके छिपकर राम ने फोटोग्राफ लिए और गुना के वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दी। इसके बाद गुना से प्रधान आरक्षक आमोद तिवारी, कुलदीप भदौरिया, कुलदीप परिहार, धीरेंद्र राजावत, नीरज पंवार आदि को भेजा गया। इसके बाद पहले रंजीत को पकड़ा गया, जिसके माध्यम से पुलिस ने गाजियाबाद रेलवे स्टेशन पहुंचकर सुनील को पकड़ा।

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आरोपी को छुड़ाकर गैंग बनाने की थी आरक्षक की हत्या

आरोपी रंजीत तोमर के पिता, भाई और चाचा म्याना में एक हत्या के मामले के चलते गुना जेल में बंद हुए। कुछ दिन बाद पिता की जेल में ही मौत हो गई। इसके बाद रंजीत अपने भाई और चाचा से मिलने लगातार जेल जाता रहता था। वहीं अन्य आरोपियों से भी उसकी मुलाकात हुई और अपने परिवार की रंजिश का बदला लेने रंजीत ने गैंग बनाने का निर्णय लिया। उसने राज मराठा, जीतू शर्मा, मुकेश, गणेश प्रजापति, लल्लू जाट, प्रदीप धाकड़, परमाल सोलंकी, सुनील कुशवाह आदि से संपर्क किया और लूट के मामले में गुना जेल में बंद एक अन्य बदमाश लोकेश उर्फ कपिल दांगी निवासी सेमरा बैरसिया भोपाल को छुड़ाने की योजना बनाई। इसी क्रम में 7 फरवरी 2017 को जब प्रधान आरक्षक राजेश सिंह बघेल, आरक्षक अशोक उरैती, राम सिंह जादौन लोकेश को मुल्जिम पेशी के लिए शिवपुरी से बस द्वारा लौट रहे थे, तभी शाम करीब 6 बजे रंजीत, जीतू, राज और सुनील वंदना ढाबा के समीप बस में चढ़ गए और लोकेश को पुलिस से छुड़ाने लगे। बदमाशों ने पुलिस पर चाकू और कट्टे से हमला किया, इस हमले में अशोक की गोली लगने से मौत हो गई थी, लेकिन बदमाश अपने साथी को नहीं ले जा पाए थे।

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फरारी के दौरान भी दर्ज हुए मामले

सुनील और रंजीत पर फरारी के दौरान नोएडा और गाजियाबाद में रहते हुए भी चोरी, मारपीट आदि के मामले दर्ज हुए। जबकि म्याना में जिस परिवार से रंजीत की दुश्मनी थी, वह परिवार भी कई बार रंजीत आदि द्वारा हमले किए जाने की शिकायत पुलिस को करता रहा। गुना पुलिस सुनील और रंजीत के फरार रहने के दौरान का रिकार्ड गाजियाबाद पुलिस से ऑनलाइन मंगा रहा है। भोपाल एसटीएफ भी आरोपियों की तलाश कर रही थी, लेकिन गुना पुलिस को सफलता हाथ लगी।

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अब पुलिस करेगी चाकू के बारे में पूछताछ

आरोपी रंजीत और सुनील को पूछताछ के लिए रिमांड पर लिया जा रहा है। आरोपियों से घटना में प्रयुक्त चाकू की बरामदगी पुलिस को करनी है। मामले के सभी आरोपी आपराधिक प्रवृत्ति के हैं, जिनमें से ज्यादातर जेल में बंद थे, जो जमानत पर बाहर आए थे। लेकिन लोकेश की जमानत नहीं होने से गैंग पूरी होने में दिक्कत में आ रही थी, जिसे साथी बदमाशों द्वारा छुड़ाने के दौरान अशोक शहीद हो गए। लेकिन उन्होंने बदमाशों को अपने मंसूबे में कामयाब नहीं होने दिया। मुख्य आरोपी रंजीत पढ़ाई में अव्वल बताया जाता है, उसे काफी नॉलेज भी है। हत्याकांड से पहले रंजीत नोएडा में ही रहकर अच्छी प्राइवेट जॉब करता था।

नोट-फोटो केप्शन

1403जीएन-08-गुना। शहीद अशोक उरैती की वीरगाथा एसपी ऑफिस गेट पर चस्पा की गई है।