भोपाल, नवदुनिया प्रतिनिधि । इस बार नवरात्र में पुष्य नक्षत्र के साथ ही सर्वार्थ सिद्धी योग भी है। नवरात्र की शुरुआत जहां पुष्य नक्षत्र में होगी, वहीं 21 जुलाई को सर्वार्थ सिद्धी योग, रवियोग व अमृत सिद्धि योग में नवरात्र का समापन होगा। सभी शुभ योग होने के चलते इस बार नवरात्र पर पूजा करने से विशेष फल प्राप्त होगा।

मां चामुंडा दरबार के पुजारी पं. रामजीवन दुबे का कहना है कि इस साल एकम व दूज एक साथ पड़ने के कारण नवरात्र महोत्सव 8 दिवसीय रहेगा। हालांकि गुप्त नवरात्र का महत्व आम लोगों की अपेक्षा साधु-संत व तांत्रिकों के लिए अधिक माना जाता है। गुप्त नवरात्र तंत्र साधना के लिए जरूरी माने जाते हैं। साधु संतों व तात्रिकों द्वारा मां भवानी की विशेष आराधना की जाती है। सिद्धि प्राप्त करने के लिए साधुओं द्वारा दिन रात हवन किए जाते हैं। हालांकि साधुओं की यह तंत्र साधना सार्वजनिक न होकर एकांत में की जाती है।

इन मंदिरों में होंगे आयोजन -

-श्री मां पीतांबरा बगलामुखी यज्ञ आयोजन निर्देशक मंडल द्वारा नेहरू नगर स्थित महादेव पिपलेश्वर मंदिर में सुबह 11 बजे कलशयात्रा निकाली जाएगी।

-मां वैष्णोधाम आदर्श नौ दुर्गा मंदिर टीन शेड में शाम 4 बजे से गुप्त नवरात्र से श्रीमद् देवी भागवत कथा शुरू होगी।

-प्राचीन मां बगलामुखी मंदिर व आश्रम परिसर आयकर कॉलोनी कोटरा में गुप्त नवरात्रा पर कलशयात्रा निकलेगी।

पूजा के लिए सर्वश्रेष्ठ समय -

स्थिर लगन सुबह 7.49 से 10.01 बजे तक सिंह, दिन 2.27 से 4.44 बजे तक वृश्चिक, रात 8.36 से 10.09 बजे तक कुंभ।

चौघड़िया अनुसार -

सुबह 7.30 से 9 बजे तक शुभ, दोपहर 12 से 1.30 बजे तक चर, 1.30 से 3.00 बजे तक लाभ, दिन 3.00 से 4.30 तक अमृत व गोधूलि वेला में सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त शाम 6 से 7.30 तक लाभ में रहेगा।