-नवदुनिया गुरुकुल के तहत वर्ल्ड वे इंटरनेशनल स्कूल में वर्कशॉप का आयोजन

भोपाल। नवदुनिया रिपोर्टर

संस्कार, नैतिक शिक्षा और संवेदनशीलता विकसित करने के उद्देश्य से नवदुनिया की ओर द्वारा गुरुकुल गतिविधि का आयोजन शहर के अलग-अलग स्कूलों में किया जा रहा है। शनिवार को गुरुकुल की कहानी कार्यशाला का आयोजन बावड़ियाकलां क्षेत्र स्थित वर्ल्ड वे इंटरनेशनल स्कूल में हुआ। जिसमें कहानी के माध्यम से बच्चों को अच्छे संस्कार और बेहतर इंसान बनने की सीख दी गई। स्कूल में मैं नहीं हम कहानी पढ़ने की गतिविधि हुई जिसे रंगमंचीय अंदाज में खेला गया। गतिविधि में स्कूल छात्र, शिक्षक और प्राचार्य मौजूद थे।

-भा गया आरुषि का किरदार

स्कूल में रंगमंच विशेषज्ञ नितिन तेजराज ने बच्चों को कहानी अभिनय के जरिए कहानी का भाव समझाया। कार्यशाला में आरुषि के साथ रिया का किरदार बच्चों को भा गया। कार्यशाला में बच्चों को सिखाया कि आरुषि ने सही समय पर गिलहरी को अस्पताल पहुंचाया। तभी उसकी जान बच सकी। हमें भी कई बार जीवन में सही निर्णय लेकर किसी जरुरतमंद की मदद करनी चाहिए। रंगमंच के जरिए कलाकारों ने कहानी का भाव समझाया जिसमें संवेदनशीलता, मानवीयता और जिम्मेदारी का भाव शामिल था। मंच पर स्टूडेंट प्रांजल और आरुषि समेत कई कलाकारों ने कहानी के किरदारों को निभाया।

-कहानी से नए विचारों का सृजन

नवदुनिया में प्रकाशित कहानी मैं नहीं हम को स्कूल के बच्चों ने खूब सराहा। साथ ही कहानी की सीख को जीवन में अमल करने का प्रण लिया। इस मौके पर शिक्षकों ने बच्चों को बताया कि कहानी से नए विचारों का सृजन होता है। कहानियां ही हमें जीवन में कुछ नया सीखने का मौका देती हैं। किसी भी जीव या इंसान से हमारा संबंध जज्बाती होना चाहिए। तभी हम एक अच्छे इंसान बन सकते हैं। हमें जीवन में सभी के लिए संवेदनशील होना चाहिए।

-दूसरों को भी सुनाएं कहानी

बच्चों को बताया गया कि गुरुकुल की कहानियां में जीवन की कई स्थितियों को सरल तरीके से समझाया गया है। इन कहानियों हमें दूसरों को भी सुनना चाहिए ताकि वे भी सीख ले सकें। नवदुनिया में प्रकाशित मैं नहीं हम कहानी के मुख्य किरदार आरुषि ने अपने काम से मानवीयता का स्तर ऊंचा किया। बच्चों ने सीखा कि जीवन में हमें सभी के लिए संवेदनशील बनना चाहिए। चाहे वे मनुष्य हों या फिर कोई जीव। दोनों के लिए ही संवेदनशीलता का भाव हमें मानवीयता की ओर ही ले जाता है।

वर्जन

नवदुनिया का प्रयास हमें भी बहुत कुछ करने की प्रेरणा देता है। कहानी मैं नहीं हम को बच्चों ने अभिनय के जरिए प्रस्तुत किया जो हमें काफी प्रभावी लगा। अब हम भी गुरुकुल की तर्ज पर कहानियों का वाचन और मंचन करने की योजना बना रहे हैं। हमारी कोशिश यहीं होगी कि इस गतिविधि को लगातार करें। गुरुकुल जैसी प्रेरणादायिक कहानियों को हम बच्चों के लिए अब पढ़ेंगे।

-पूनम रायजादा, प्राचार्य, वर्ल्ड वे इंटरनेशनल स्कूल

गुरुकुल की कहानी से मुझे सीखने मिला कि यदि हम संवेदनशील होना सीख सके तो बेहतर मानव बनेंगे। हमें अपनी जिम्मेदारियों और कर्तव्यों का बोध कराने के लिए गुरुकुल का प्रयास अच्छा लगा। मैं नहीं हम जैसी कहानी मुझे बेहद पसंद आई।

-सौम्या खरे, स्टूडेंट, वर्ल्ड वे इंटरनेशनल स्कूल

हम जीवन में किसी की मदद कर सकते हैं, तो हमें भी कोई जीवन में मदद करता है। ईश्वर हमारी मानवता की कई बार परीक्षा लेता है। कहानी मैं नहीं हम ने मुझे अपनी जिम्मेदारी बताई। कहानी से मुझे जीवन में जीवों के प्रति संवेदनशील बनने की सीख मिली।

-आन त्रिवेदी, स्टूडेंट, वर्ल्ड वे इंटरनेशनल स्कूल