ग्वालियर (ब्यूरो)। लोकसभा चुनाव में नेताओं की जुबान पर लगाम नहीं है। एक-दूसरे पर व्यक्तिगत कीचड़ उछालने के साथ मर्यादाओं को भी लांघने से नहीं चुक रहे हैं। यहां तक कि चुनाव आयोग को उम्मीदवारों के बोलने पर प्रतिबंध लगाने के लिए मजबूर होना पड़ा।

ग्वालियर-चंबल अंचल दशकों से गोलीबारी व चुनावी हिंसा के लिए बदनाम रहा है। इस तल्ख पूर्ण चुनावी माहौल में ग्वालियर संसदीय क्षेत्र से कांग्रेस उम्मीदवार अशोक सिंह व भाजपा उम्मीदवार विवेक शेजवलकर ने अपना विवेक नहीं खोया। दोनों उम्मीदवारों ने न एक-दूसरे पर व्यक्तिगत आरोप लगाए न ही पार्टी के शीर्ष नेताओं पर निशाना साधा। पूरे संयम के साथ अपना-अपना चुनाव प्रचार किया। इसी का परिणाम है कि लोकसभा निर्वाचन का मतदान शांतिपूर्ण ढंग से सम्पन्न हो गया। नतीजे आने से पहले महापौर विवेक नारायण शेजवलकर शुक्रवार सुबह अशोक सिंह के बंगले पर सौजन्य भेंट करने पहुंचे। दोनों नेता एक-दूसरे गले मिले और चाय की चुस्की के साथ चुनावी चर्चा छोड़कर घर-परिवार की बात की।

लोकसभा चुनाव का परिदृश्य ही बदला हुआ है। नेताओं की जुबां हर रोज फिसल रही है। एक-दूसरे पर कीचड़ उछाल रहे हैं। चोर, बेईमान, भ्रष्ट जैसे आरोपों के साथ नारी सम्मान को आहत पहुंचाने वाले शब्द भी मंच से बोले जा रहे हैं। पं-बंगाल में चुनावी हिंसा के कारण कानून व्यवस्था बिगड़ गई है। इन हालातों के बीच ग्वालियर संसदीय सीट ने चुनाव में समूचे देश में एक मिसाल पेश की है।

कार्यकर्ता नहीं भिड़े

भाजपा व कांग्रेस उम्मीदवार ने चुनाव के दौरान पूरा संयम बनाये रखा। इसके साथ ही कार्यकर्ताओं को भी संयम में रहने के लिए प्रेरित किया। इसी कारण पूरे चुनाव के दौरान शांति व्यवस्था बनी रही। पुलिस को भी कोई मशक्कत नहीं करनी पड़ी।

सौजन्य भेंट की, चुनाव को छोड़कर घर-परिवार की बात

विवेक नारायण शेजवलकर व अशोक सिंह के परिवार की विचारधारा एक-दूसरे के विपरीत होने के बावजूद परिवारिक रिश्ते रहे हैं। साल में दो से तीन बार दोनों परिवारों का एक-दूसरे के घर आना-जाना होता है। इस बार पूर्व मंत्री राजेंद्र सिंह की पुण्यतिथि से पहले कांग्रेस अशोक सिंह के टिकिट का एलान कर चुकी थी। इससे पहले विवेक शेजवलकर को भाजपा भी अपना उम्मीदवार घोषित कर चुकी थी, इसलिए विवेक पुण्यतिथि पर श्रद्धासुमन अर्पित करने नहीं जा सके। शुक्रवार सुबह अचानक विवेक शेजवलकर को अशोक सिंह के बंगले पर खड़ा देखकर समर्थक चौंक गए। अशोक सिंह महापौर को ससम्मान बंगले के अंदर ले गए। 30 मिनट दोनों नेताओं ने चुनाव की बात छोड़कर घर-परिवार की बात की।