ग्वालियर (राजदिल शिवहरे)। समेट कर अपनी ताकत, रही सही बस फिर देखना नामुमकिन कुछ भी नहीं...। पंजाब के हॉकी खिलाड़ी रमनदीप सिंह ने कुछ इसी अंदाज में अपनी हिम्मत को बांधे रखा। 8 महीने पहले जून में नीदरलैंड्स के ब्रेडा शहर में खेली गई चैंपियंस ट्रॉफी में पाकिस्तान के खिलाफ खेलते हुए रमनदीप सिंह का दाहिना घुटना बुरी तरह चोटिल हो गया था।

डॉक्टरों ने उनकी एमआरआई रिपोर्ट परखने के बाद बोल दिया था कि चोट ठीक होने में कम से कम दो साल लग जाएंगे। हो सकता है कि वह फिर से खेल भी न पाए। लेकिन डॉक्टरों के शब्द उनकी हिम्मत को डिगा नहीं सके। आखिरकार, वह ग्वालियर में फिर मैदान पर उतरे और गोल दागना शुरू कर दिया, जिसके लिए वह जाने जाते हैं।

गत रविवार को ग्वालियर में संपन्न 9वीं सीनियर नेशनल हॉकी चैंपियनशिप में पंजाब को रेलवे के हाथों हार का सामना करना पड़ा, लेकिन इस हार के बाद भी रमनदीप ने अपनी गंभीर चोट के बावजूद टीम के लिए एक गोल दागकर विजय प्राप्त कर ली। पंजाब टीम की लाल जर्सीं नं 31 पहनकर खेल रहे 25 वर्षीय रमनदीप ने इस पूरे टूर्नामेंट में कुल चार गोल दागे।

दु:स्वप्न से वापस लौटने जैसा

बीते 7-8 महीने कैसे बीते? लंबी सांस लेते हुए रमनदीप बोले- किसी भी प्लेयर के लिए बड़ी इंजुरी से लौटना आसान नहीं होता। क्योंकि लौटने के लिए 'जीरो" से शुरूआत करना पड़ती है। एक-एक दिन कड़ी मेहनत वो भी धीरे-धीरे कर आगे बढ़ना होता है। तब जाकर वापसी हो पाती है। लेकिन मेरा मानना है कि अगर लगन और मेहनत की जाए तो बड़ी-बड़ी इंजुरी को हराकर मैदान पर वापसी की जा सकती है।

मुझ से ज्यादा मेरे भाई को था भरोसा - रमनदीप

नईदुनिया से विशेष बातचीत में रमनदीप बोले- मैदान पर लौटने का जितना विश्वास उन्हें था, उससे कहीं ज्यादा उनके बड़े भाई हरमनप्रीत सिंह (पूर्व जूनियर हॉकी खिलाड़ी) को था। सर्जरी के बाद जब वह दिल्ली-बैंगलुरू में खुद को मैदान के लिए तैयार कर रहे थे, उस दौरान भाई फोन पर हर बार यही बोलते थे कि तुम फिर से मैदान में लौटोगे और जल्द ब्लू (भारतीय हॉकी टीम) जर्सी पहनोगे।

ब्लू जर्सी पहनना लक्ष्य

रमनदीप ने बताया कि उसे बुरे दौर से उबारने में हॉकी इंडिया, स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया, कोच, ट्रेनर व फिजियो ने सहयोग किया है। अब उसका लक्ष्य फिर से ब्लू जर्सी पहनना है। मार्च में अजलान शाह हॉकी टूर्नामेंट है, उम्मीद है कि हॉकी इंडिया उसे कोर ग्रुप में मौका देगी।

ग्वालियर से ही चुने गए थे पिल्लै

भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान धनराज पिल्लै पहली बार भारतीय टीम में ग्वालियर से ही चुने गए थे। आईएचएफ द्वारा वर्ष 88 में रेलवे हॉकी स्टेडियम ग्वालियर में खेली गई नेशनल हॉकी स्पर्धा में पिल्लै मुंबई टीम से खेलने आए थे। तब उन्होंने शानदार स्टिक प्रदर्शन कर भारतीय टीम में जगह बनाई थी।