भोपाल (ब्यूरो)। जबलपुर के बाद अब ग्वालियर में भी मेट्रो आने का सपना जल्द ही साकार होगा। इसके लिए नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने सदन में डीपीआर तैयार कराने की घोषणा कर दी। साथ ही यह भी बताया कि भोपाल-इंदौर में मेट्रो ट्रेन के डीपीआर का काम अंतिम चरण में पहुंच गया है। नर्मदा सहित प्रदेश की अन्य नदियों के लिए 12 सौ करोड़ रुपए का प्लान बनाया जाएगा। निकायों में गंदगी दूर करने के लिए भी 12 करोड़ रुपए का लोन लिया गया है। तीन साल में सभी निकायों में पेयजल का पुख्ता इंतजाम किया जाएगा।

नगरीय प्रशासन और आवास पर्यावरण विभाग के अनुदानों पर चर्चा के दौरान विभागीय मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बताया कि शहरीकरण के चलते यातायात का दवाब भी बढ़ रहा है। इससे निपटने के लिए सिटी बसें चलाने का फैसला किया गया है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, देवास, बुरहानपुर, कटनी, छिंदवाड़ा, उज्जैन व सागर सहित 16 शहरों में 15 सौ बसें चलाई जाएंगी।

इसके लिए 12 सौ करोड़ रुपए का कर्ज भी लिया गया है। इसी तरह भोपाल-इंदौर में मेट्रो ट्रेन चलाने की दिशा में सरकार काफी आगे बढ़ चुकी है। डीपीआर (विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन) तैयार होने का काम अंतिम चरण में है। मुख्यमंत्री ने जबलपुर में मेट्रो ट्रेन चलाने का एलान किया था।

इसी तरह वरिष्ठ काबीना मंत्री माया सिंह ने ग्वालियर में मेट्रो चलाने की मांग उठाई थी। तय किया गया है कि जबलपुर और ग्वालियर में मेट्रो चलाने को लेकर डीपीआर बनवाया जाएगा। शहरों में प्रति व्यक्ति प्रति दिन 135 लीटर पानी मिलना चाहिए। इस स्थिति को प्राप्त करने के लिए योजना का खाका खींचा जा चुका है। आने वाले 3 सालों में सभी नगरीय निकायों में पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करेंगे।

विजयवर्गीय ने कहा कि प्रदेश की सबसे बड़ी नदी नर्मदा में यूं तो बाकी नदियों की तुलना में प्रदूषण कम है पर ये समस्या धीरे-धीरे बढ़ रही है। नदी को प्रदूषण मुक्त करने के लिए इसके किनारे बसे शहरों का प्लान बनाया जाएगा। इसी तरह अन्य नदियों के लिए भी योजना तैयार होगी। इसके लिए केंद्र सरकार भी मदद के लिए तैयार है। क्षिप्रा नदी से नर्मदा का मिलन हो चुका है। क्षिप्रा से मिलने वाले नालों का प्रबंधन भी किया जाएगा।

सिंहस्थ के लिए जनप्रतिनिधियों की संभागीय कमेटी बनाई जाएगी। निकायों में ई-गवर्नेंस को बढ़ावा देने के लिए नेटवर्क सिस्टम बनाया जा रहा है। इसके साथ ही नगरीय प्रशासनिक सेवा, यांत्रिकी सेवा, स्वच्छता सहित अन्य पदों को छह माह में भरा जाएगा। प्रदूषण निवारण मंडल में भी अमला कम है। इसकी समीक्षा की जा रही है।

विजयवर्गीय ने विधायकों से मांग की कि वे निकायों की समस्याओं के निराकरण का रोडमैप बनाकर लाएं। सरकार प्रदेश के शहरों की तस्वीर बदलने में कोई कसर नहीं रखेगी। चर्चा के बाद ध्वनिमत से 4 हजार 690 करोड़ रुपए की अनुदान मांग को पारित कर दिया गया।