ग्वालियर। खुद को बिजली विभाग में कर्मचारी बताकर 80 हजार रुपए का लोन ले लिया। जब लोन की किस्तें जमा नहीं हुई तो बैंक की रिकवरी टीम घर पहुंचीं। पता लगा कि जिसे वह बिजली कर्मचारी बता रहे हैं वह कहीं पदस्थ नहीं है। इसके बाद उसका कुछ पता नहीं चला। 13 साल बाद धोखाधड़ी करने वाली महिला गोसपुरा में नाम बदलकर रहते हुए मिली है।

पुलिस ने बुधवार को उसे गिरफ्तार करने में सफलता पाई है। इस तरह की ठगी के अब तक 30 मामले कोतवाली थाने में दर्ज हैं। शहर के पोस्ती खाना निवासी रेखा राय पत्नी रूपसिंह राय ने अप्रैल 2005 में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया महाराज बाड़ा ब्रांच में 80 हजार रुपए का लोन निकाला था। लोन लेते समय उसने खुद को रोशनीघर घर में पदस्थ बिजली कर्मचारी बताया था। नौकरी से जुड़े दस्तावेज भी जमा कराए थे। इतना ही नहीं खुद का लोन निकालने के बाद एक अन्य महिला के संबंध में वह जमानतदार भी बनी थी।

लोन होने के बाद उसने एक भी किश्त जमा नहीं की। जब बैंक की रिकवरी टीम उसे तलाशते पोस्ती खाना पहुंचीं तो वह नहीं मिली। रोशनीघर पहुंचने पर पता लगा कि यहां इस नाम की कोई कर्मचारी नहीं है। इससे साफ हो गया कि वह लोन के लिए फर्जी दस्तावेज दिए हैं। इसके बाद बैंक में मामला जांच में चलता रहा। अभी इसी साल कोर्ट के आदेश के बाद कोतवाली थाने में मामला दर्ज हुआ। इस मामले की जांच पीएसआई दिव्या तिवारी, एएसआई एसआर भगत, प्रधान आरक्षक शैलेन्द्र सिंह के पास थी। लगातार टीम काम कर रही थी।

लोन लेने के 13 साल बाद पुलिस को जांच में पता लगा कि रेखा, रजनी नाम से ग्वालियर के गोसपुरा में रह रही है। बुधवार को पुलिस की टीम ने दबिश दी और आरोपी महिला रेखा राय को गिरफ्तार किया।

कुल 30 मामले दर्ज

एसबीआई बाड़ा ब्रांच में वर्ष 2005 से 2007 के बीच 30 लोग इसी तरह बिजली विभाग में नौकरी बताकर फर्जी दस्तावेज पर लोन लेकर गायब हो चुके हैं। वर्ष 2018 में कोर्ट के आदेश पर जांच के बाद पुलिस ने 30 धोखाधड़ी के मामले दर्ज किए हैं। अभी 29 मामलों में आरोपियों की तलाश जारी है।