ग्वालियर। रायरू स्थित ग्वालियर एक्रोबू्र प्रायवेट लिमिटेड (बापना ग्रुप) डिस्टलरी पर कलेक्टर अनुराग चौधरी ने एडीएम-एसडीएम और विभिन्न विभागों के साथ मंगलवार को औचक छापामार कार्रवाई की। खुद कलेक्टर से लेकर संबंधित विभागों के मुखियाओं को देख डिस्टलरी प्रबंधन सकते में आ गया। यहां कलेक्टर व अफसरों ने देशी शराब बनाने वाली यूनिट को देखा और वहां काम करने वाली लेबर से जानकारी ली। किसी भी लेबर का पीएफ नहीं कटता मिला, जिस पर असिस्टेंट लेबर कमिश्नर को केस बनाने के निर्देश दिए। वहीं संदिग्ध शराब मिली जिसकी जांच के आदेश आबकारी विभाग को दिए।

इसके अलावा शराब बनाने में उपयोग होने वाले केमिकल्स के सैंपल कराए गए। इसके साथ ही विभिन्न तरह की गडबड़ियों के जांच के लिए कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को कहा है।

कलेक्टर ने मिक्सिंग प्लांट, डायवर्सन शुल्क, सीएसआर फण्ड से तीन वर्षों में किए गए कार्यों, डिजास्टर मैनेजमेंट प्लान, डिस्टलरी की स्टॉक पंजी आदि का भी अवलोकन किया। मिक्सिंग प्लांट में मौके पर ही केमिकल के साथ अनाज को मिलाकर बनाई जा रही शराब के सैम्पल लिए गए। उन्होंने डिस्टलरी की स्टॉक पंजी को देखा व कितनी मात्रा में भारत के विभिन्न क्षेत्रों में वेयर हाउस में भेजी जाने वाली शराब एवं ग्वालियर के वेयर हाउस में कब कितनी मात्रा में शराब भेजी गई है, इसकी जानकारी ली।

आचार संहिता के चलते संदिग्ध अवैध शराब के मामले में आबकारी विभाग को जांच करने के निर्देश दिए। इस दौरान एडीएम संदीप केरकेट्टा, एसडीएम ग्वालियर सिटी प्रदीप तोमर, असिस्टेंट लेबर कमिश्नर सहित फूड सेफ्टी, इंडस्ट्रीयल सेफ्टी, एक्साइज के अधिकारी मौजूद थे।

डायवर्सन,डीजल,कोयले की जांच करेंगे एसडीएम

कलेक्टर अनुराग चौधरी ने भू राजस्व की जानकारी ली और डायवर्सन है या नहीं, यदि डायवर्सन है तो डायवर्सन शुल्क की कितनी राशि जमा की गई है एवं कितनी राशि शेष है। इस संबंध में अधिकारियों से चर्चा की। साथ ही कुछ किसानों ने पूर्व में शासकीय भूमि पर अतिक्रमण की शिकायत भी की थी। इस संबंध में एसडीएम प्रदीप तोमर को भूमि का सत्यापन के निर्देश दिए हैं। कैंपस में बड़ी मात्रा में कोयले का भण्डारण एवं डीजल की खपत के संबंध में भी संबंधित विभाग को जांच करने के निर्देश दिए हैं।

वेस्ट मटेरियल की जांच करेगा पीसीबी

कलेक्टर अनुराग चौधरी ने स्पष्ट कहा है कि डिस्टलरी का संचालन नियमानुसार किया जाए। यहां के वेस्ट मटेरियल की जांच के लिए भी पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड को लिखा गया है। उन्होंने कहा है कि यह बड़े एरिया में फैली है। यहां बड़ी संख्या में कर्मचारी तैनात हैं। फैक्ट्री का डिजास्टर मैनेजमेंट प्लान होना चाहिए। साथ ही यहां काम करने वाले कर्मचारियों को उन्हें मिलने वाले जरूरी लाभ मिलना चाहिए।