ग्वालियर। सनातन हिंदू धर्म में गाय को सबसे अधिक महत्व दिया गया है। बुजुर्ग हमेशा कहते हैं कि घर में पहली रोटी गाय के लिए निकाली जानी चाहिए। गाय को रोटी, घास खिलाने से बहुत पुण्य मिलता है। आज के दौर में मल्टियों के अंदर निवास करने वाले लोग इस पुण्य से वंचित हैं। क्योंकि वहां पर गाय नहीं पहुंच पाती है। नगर निगम की लालटिपारा गौशाला में संतों और अधिकारियों के साथ समाजसेवी संगठन ने मिलकर नई पहल प्रारंभ की है। इन्होंने मल्टियों में गौपात्र रखना प्रारंभ किए हैं। लोग अपने घरों से रोटी एवं सब्जी व फलों के छिलके लाकर गौपात्र में डाल देते हैं। प्रतिदिन एक गाड़ी गौशाला से इन मल्टियों में पहुंचकर इसे एकत्रित कर गायों तक पहुंचा देती है।

एक समय तक सबसे अधिक बदनाम गौशालाओं में शुमार रही नगर निगम की लालटिपारा गौशाला अब अनूठे और नए प्रयोगों के लिए देशभर में अपनी अलग पहचान बना रही है। नगर निगम की लालटिपारा गौशाला में अब नई पहल प्रारंभ की गई है। इस पहल के तहत अब शहर के सभी मल्टियों से गौग्रास एकत्रित करना प्रारंभ करेंगे। मंगलवार को शहर के बड़े अपार्टमेंटों में शुमार केशर अपार्टमेंट में इस योजना का शुभारंभ किया गया। केशर अपार्टमेंट में गौशाला के संतों एवं समाजसेवी सहित नोडल अधिकारी केशव चौहान ने पहुंचकर लोगों से संपर्क किया। इसके साथ ही अपार्टमेंट के अंदर दो ढक्कन वाले डस्टबीन रखे गए हैं। जिन्हें गौपात्र का नाम दिया गया है। अपार्टमेंट में निवास करने वाले सभी लोगों से मंगलवार को संत ऋषि महाराज और नोडल अधिकारी केशव सिंह चौहान ने मुलाकात कर कहा कि वह गौपात्र में ही खाना डालें। इस पर सभी लोगों ने सहमति दी है।

सागर पैराडाइज एवं डीबी सिटी में चल रही है यह व्यवस्था

शहर में नगर निगम की ओर से सागर पैराडाइज में भी यह व्यवस्था प्रारंभ की गई है। जबकि डीबी सिटी में भी यह व्यवस्था लम्बे समय से चल रही है। यहां पर प्रतिदिन गौशाला से एक गाड़ी आकर गौपात्र में रखा गया भोजन लेकर गौशाला जाती है।

गायों का भरेगा पेट

गौशाला के नोडल अधिकारी केशव चौहान के अनुसार प्रत्येक घर से दिनभर में लगभग एक किलो ऐसे पदार्थ निकलते हैं जोकि गायों के खाने योग्य होते हैं। इनमें बची हुई रोटी, सब्जी, दाल, सब्जी के छिलके साथ ही फलों के छिलके भी शामिल हैं। इसके साथ ही लोग अपने घरों से पहली रोटी गाय के लिए निकालकर भी इन गौपात्रों में रख देते हैं। इससे इन लोगों को बिना घर से कहीं बाहर जाए गौभोग का पुण्य प्रतिदिन प्राप्त हो रहा है।

लगभग 200 किलो भोजन हो रहा है एकत्रित

गौशाला प्रभारी केशव चौहान के अनुसार लगभग एक घर से एक किलो कचरा एकत्रित होता है। इस हिसाब से केशर अपार्टमेंट में लगभग 100 परिवार निवास कर रहे हैं। इसी प्रकार सागर पैराडाइज में भी 60 से 70 परिवार निवास करते हैं। जबकि डीबी सिटी में करीब दो सैकड़ा परिवार निवास करते हैं। इनमें से एक अनुमान के मुताबिक 200 किलो खाना ( भोजन) एकत्रित हो रहा है।

शहरभर में यह अभियान चलाने की योजना

गौशाला के नोडल अधिकारी केशव चौहान के अनुसार यह योजना शहर की प्रत्येक मल्टी में चलाने की है। इससे एक तो गायों को भोजन प्राप्त हो जाएगा। वहीं लोग पॉलीथिन में खाने का बचा हुआ सामान भरकर नहीं फेंकेंगे । इससे सड़कों पर घूमने वाली गायों की जान भी बच जाएगी।

बिना पैसा लगाए भर जाएगा गायों का पेट

गौशाला की व्यवस्था संभाल रहे संत ऋषि महाराज के अनुसार ग्वालियर में लगभग 2 लाख परिवार निवास करते हैं। इनमें से प्रत्येक परिवार से भी अगर 2-2 रोटी गायों के लिए निकाली जाएं और प्रत्येक घर से सब्जियों और फलों के छिलकों सहित खाने का बचा हुआ सामान एकत्रित कर लिया जाए तो लालटिपारा गौशाला में रहने वाली 7000 गायों का प्रतिदिन पेट आराम से भर जाएगा।

ट्रू फ्रैंडस एसोसिएशन ने संभाला मोर्चा

गौपात्र से खाना एकत्रित करने की जिम्मेदारी टू्र फ्रैंडस एसोसिएशन ने संभाली है। इस एसोसिएशन द्वारा तैयार की गई गाड़ी इन मल्टियों से खाना एकत्रित करेगी। वहीं डीबी सिटी से पूर्व से ही नगर निगम द्वारा गौग्रास एकत्रित किया जा रहा है।