ग्वालियर। बाहरी सौंदर्य क्षणिक होता है, लेकिन आंतरिक सुंदरता नश्वर है। समय के साथ हमारा देह विकृत होगा लेकिन आंतरिक सुंदरता की लौ हमेशा हमारे अंदर जगमगाती रहेगी और यहीं से शुरूआत होगी आंतरिक शांति की। कुछ इस तरह का संदेश दिया गुरूवार शाम नृत्य नाटिका वासवदत्ता में एसकेवी के स्टूडेंट्स ने। 1 महीने की कड़ी प्रैक्टिस के बाद 84 स्टूडेंट्स ने नत्यांगना वासवदत्ता और उपगुरू के पात्रों को मंच पर जीवंत कर दिया।

मौका था स्कूल के 61वें स्थापना दिवस का, जिसमें सांस्कृतिक गतिविधियों के साथ पुरस्कार वितरण समारोह भी हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत में प्राचार्य निशी मिश्रा ने वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत कर की। इस दौरान मुख्य अतिथि के रूप में एमिटी विवि के वाइस चांसलर ले. जनरल वी.के शर्मा मौजूद थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता राजमाता माधवीराजे सिंधिया ने की। इस दौरान बोर्ड मेंबर वी.के गंगवाल, उज्जवला फालके, कीर्ति फालके आदि मौजूद थे। विजया अवॉर्ड डॉ. ज्योति बिंदल को दिया गया।

महिलाएं अपनी जिंदगी की डोर खुद थामें

इस मौके पर मुख्य अतिथि ले. जनरल वी.के शर्मा ने महिला सशक्ता पर अपने विचार रखे। पंडित जवाहरलाल नेहरू के कथन का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि किसी भी देश की स्थिति का अंदाजा लगाना हो तो वहां की महिलाओं की स्थिति देखनी चाहिए। हमारे यहां महिलाओं को देवी का दर्जा दिया गया है, लेकिन फिर भी उनके साथ दुर्व्यवहार होता है। उन्होंने सास-बहू, मां-बेटी का उदाहरण देते हुए कहा कि कई बार एक महिला ही दूसरी महिला की तरक्की में रोड़ा बनती है। क्योंकि वे बेटों और बेटियों में फर्क करती हैं। अंत में महिलाओं को संदेश देते हुए कुछ नियम बताए जिनमें खुद की कीमत पहचानना, अपने फैसले खुद करना, अपनी जिंदगी का कंट्रोल अपने हाथ लेना, समाज के लिए योगदान देना आदि शामिल थीं।

ऑर्केस्ट्रा पर गूंजे 70 के दशक के गीत

सांस्कृतिक कार्यक्रम की शुरुआत शाला गीत 'शतशत प्रणाम' से हुई। इसके बाद विद्यालय के ऑर्केस्ट्रा ने 70 के दशक की धुनों के अलावा कुछ नई धुन भी पेश कीं। इनमें 'कभी शाम ढले तो मेरे दिल में आ जाना... ये शाम मस्तानी... प्यार दीवाना होता है... ऐ मेरी जोहराजबीं' आदि धुन छेड़कर माहौल को मस्ती से भर दिया। इसके बाद इंग्लिश क्वायर ने कुछ हॉलीवुड आर्टिस्ट मेगन ट्रेनर का गीत लाइक आई एम गॉना लूज यू पेश किया। इसके साथ ही कैरोल बेल्स की प्रस्तुति भी दी।

नाटक में दिखा आत्मज्ञान का महत्व

अंत में नृत्य नाटिका वासवदत्ता की प्रस्तुति हुई। रबींद्रनाथ टैगोर द्वारा लिखे गए इस नाटक में वासवदत्ता नाम की सुंदर नृत्यांगना एक बौद्ध भिक्षु उपगुरू को देख मोहित हो जाती है। वह उन्हें अपने महल में आने का प्रस्ताव देती हैं, लेकिन उपगुरू यह कहकर मना कर देते हैं कि अभी सही समय नहीं है। फिर भी वह उनका इंतजार हर मौसम में करती हैं। इस दौरान हर मौसम में स्टूडेंट्स ने नृत्य प्रस्तुति दी है, जिसमें मदन उत्सव, समर डांस, रेन डांस, बसंत डांस आदि शामिल हैं। अंत में वासवदत्ता को एक छूत की बीमारी हो जाती है और उससे शादी करने के इच्छुक लोग भी उसका तिरस्कार कर देते हैं। अंत में वह बेसुध हालत में उपगुरू को मिलती है और वह उसके जख्मों पर लेप लगाते हैं और कहते हैं कि यही सही समय था जब मुझे तुम्हारे पास आना था। इसके बाद वासवदत्ता देह ज्ञान से ऊपर उठ आत्मज्ञान को ओर बढ़ती है।

इन्हें मिले पुरस्कार

विषयों में 100 प्रतिशत लाने पर माधवराव सिंधिया अवॉर्ड

सोशलॉजी और साइकोलॉजी - विजयलक्ष्मी रमन

हिस्ट्री और साइकोलॉजी-ऐश्वर्या नायक,दीपांशी ठाकुर

साइकोलॉजी और होम साइंस-राधा अग्रवाल

साइकोलॉजी- नंदिनी महाजन, निहारिकी पी सिंह, इश्मिता गिरहोत्रा

वोकल म्यूजिक एंड इंस्ट्रूमेंटल- प्रेरणा सिंघानिया, शिवानी खानका

फाउंडर्स गोल्ड मेडल फॉर ऑल राउंड प्रोफिशिएंसी- गुनशीन कौर मधोक

प्रेसिडेंट गोल्ड मेडल- अमृता नेप्रम

इच्छा आनंद मेडल- यश्वी बगारिया

फ्लोरिया विन्सन ट्रॉफी- ऐश्वर्या नायक