ग्वालियर। पत्थर माफिया पर कार्रवाई करने तिघरा रेंज के शिकारी खो गया वन विभाग का अमला खुद ही घिर गया। बुधवार शाम 6 जब पत्थर जब्त कर अमला लौट रहा था तभी माफिया ने अमले पर हमला कर दिया। पहाड़ो पर छुपकर एक सैकड़ा लोगों ने 40 की संख्या में फोर्स को एक खोह में शिकार की तरह घेरकर पत्थर फेंके और अंधाधुंध गोलियां चलाईं।

माफिया ने 30 मिनट में रुक-रुककर करीब 20 फायर किए। बचाव में वन अमले ने भी कुछ फायर किए। पर खुद को घिरता देख वन अमले में भगदड़ मच गई। पत्थर माफिया की गोली से वनपाल सहित दो लोग घायल हुए हैं। अमले को खदेड़ने के बाद माफिया पत्थर से भरे ट्रैक्टर-ट्रॉली भी छुड़ा ले गए।

बुधवार सुबह वन विभाग के अधिकारियों को सूचना मिली कि तिघरा रेंज लखनपुरा वन चौकी के पास माफिया बड़ी मात्रा में अवैध उत्खनन कर ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में पत्थर भरकर ले जा रहे हैं। जिस पर वन विभाग की टीमों ने घेराबंदी शुरू कर दी। घाटीगांव वन रेंज, तिघरा रेंज, ग्वालियर रेंज से करीब 40 वनकर्मी व अधिकारियों की टीम को माफिया पर कार्रवाई के लिए भेजा गया।

दोपहर 12 बजे टीम तिघरा रेंज के लखनपुरा के पास पहंुची। तभी टीम ने पत्थर माफिया को खदेड़ दिया। अचानक वन अमले को देखकर वहां उत्खनन कर रहे एक दर्जन लोग भाग गए। भागने से पहले ही उन्होंने ट्रॉली छोड़कर व ट्रैक्टर अलग-अलग खो में छुपा दिए। दोपहर करीब 1 बजे से वन अमले ने पत्थर से भरी ट्रॉलियों को वहां से ले जाने का प्रयास किया, लेकिन ट्रैक्टर नहीं मिल रहे थे। दो घंटे की तलाश के बाद एक खो में ट्रैक्टर छुपे मिले।

यहां से ट्रैक्टर लिए पर ओवरलोड होने के कारण ट्रॉली आगे नहीं ले जा सके। जब्ती के पूरे दस्तावेज तैयार कर जैसे-तैसे ट्रैक्टर की मदद से ट्रॉलियों को निकालकर शिकारी खो में लेकर आए। इस सब में शाम 6 बज गए। इसी समय वन अमले को पहाड़ी पर चारों तरफ से घेर लिया। पत्थर माफिया अचानक 10 से 15 की संख्या से बढ़कर एक सैकड़ा हो गए। पहाड़ी पर चारों ओर से वन अमले को घेरकर पथराव और ताबड़तोड़ फायरिंग की गई।

20 गोलियां चलाईं, जान बचाने जहां जगह मिली वहीं छुप गए

अचानक हुए हमले से वन अमला घिर गया। पत्थर माफिया ने करीब 20 गोलियां चलाईं, जबकि वन अमला बचाव में दो से तीन फायर ही कर सका। लगातार फायरिंग होने से वन अमला तितर बितर हो गया। जिसको जहां जगह मिली वहीं छुप गया।

इस दौरान वनपाल ग्वालियर रेंज व वीरपुरा चौकी प्रभारी हरिवल्लभ चतुर्वेदी और सेवानिवृत्त सेना के जवान हरिशचन्द्र चौहान पुटठे और जांघ में गोली लगने से घायल हो गए। जबकि कई वनकर्मी को पत्थर लगे हैं। घायलों को बसंत विहार स्थित निजी नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया है।

दहशत फैलाकर छुड़ा ले गए ट्रॉलियां

पत्थर माफिया एक ओर से हमला कर रहा था तो वहीं दूसरी ओर से उनके ही लोग नीचे शिकारी खो में उतरे और ट्रैक्टर-ट्रॉलियां छुड़ाकर ले गए। यह पहली घटना नहीं है। इस तरह की एक महीने में तीसरी बार माफिया वन अमले पर हमला कर चुके हैं।

बिना पुलिस बल के क्यों भेजते हैं अधिकारी

घटना के बाद अस्पताल पहुंचे वन कर्मचारी संघ के उप प्रांताध्यक्ष राजेन्द्र कुमार का आरोप है कि अधिकारी बिना पुलिस फोर्स के हमारे लोगों को कार्रवाई के लिए क्यों भेजते हैं। सीधे वन कर्मियों की गोली मारकर हत्या कर दें। कब तक हम ऐसे ही बिना हथियार और गोली चलाने की इजाजत के मरते रहेंगे।

तिघरा पुलिस ने नहीं की मदद

जिस समय अमला कार्रवाई कर रहा था हमले की आशंका के चलते अधिकारियों ने रेंहट वन चौकी प्रभारी विजय सिंह को तिघरा थाने में मदद मांगने के लिए भेजा था। पर उनका कहना है कि तिघरा थाना प्रभारी ने क्राइम मीटिंग में होने का हवाला देते हुए मदद करने से इनकार कर दिया। जिस पर डीएफओ डॉ. एए अंसारी ने एसपी ग्वालियर से बात की। जिसके बाद तिघरा पुलिस पहुंची, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी।