दतिया/ सेंवढ़ा। रतनगढ़ माता मंदिर पर लख्खी मेला गुरुवार सुबह से शुरु हो गया। शाम 5 बजे तक 3 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने मां रतनगढ़ वाली के दर्शन किए। श्रद्धालुओं की भीड़ मंदिर पर पहुंचने का क्रम लगातार जारी है।

जिला प्रशासन ने रतनगढ़ माता मंदिर पर दौज मेले में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की सुविधाओं व सुरक्षा के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं। पूरे मेला परिसर को 42 सेक्टरों में बांटकर अलग अलग सेक्टर में प्रभारी नियुक्त् किए गए है। 17 वाहन पार्किंग बनाई गई है। पेयजल, प्रकाश व्यवस्था के माकूल इंतजाम है। मेला परिक्षेत्र में सीसी कैमरों से पूरे मेले की निगरानी की जा रही है। मेले की व्यवस्थाओं की मॉनीटरिंग के लिए वरिष्ठ अधिकारी भी मेला परिसर में कैम्प किए हैं।

मेले में श्रद्धालुओं की टोलियां सुबह से पहुंचने लगी है। शहर में जगह जगह रतनगढ़ वाली माता के श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद काउंटर व चाय नास्ता का इंतजाम पांच सैकड़ा से अधिक समाज सेवी संगठनों द्वारा माता मंदिर तक पहुंचने के लिए सभी रास्तों पर मंदिर से 200 कि मी. पहले से किए गए हैं। पूरी रात प्रसाद काउंटरों पर श्रद्धालुओं को नि:शुल्क प्रसाद की व्यवस्था रहेगी। इस बीच माता के भजन गाते, नाचते व जयकारे लगाते श्रद्धालुओं की टोलियां व उनकी वेशभूषा लोगों के बीच आकर्षण का केन्द्र भी बन रही है।

दरअसल पैदल चलने वाले जत्थे अपने-अपने कस्बों एवं ग्रामों से दीपावली की पूजा के बाद ही निकल पड़े हैं। सर्वाधिक भीड़ पड़वा एवं दौज की मध्य रात्रि में होती है। मेले में बीते वर्ष 20 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के दर्शन करने का दावा प्रशासन ने किया था। इस बार भीड़ अधिक बड़ने की संभावना है। मेले को लेकर देश भर में आस्था और रोमांच का माहौल रहता है।

सर्पदंश पीडित हो जाते है पूर्ण स्वस्थ, इसलिए माता मंदिर पर दौज मेले में जुटती है लाखों की भीड़

रतनगढ़ माता मंदिर पर दीपावली की दौज को सर्पदंश पीडितों के बंध कटते हैं। यहां दीपावली की पूजा के बाद यानि पड़वा से लोगों के पहुंचने का क्रम शुरु हो जाता है। मान्यता है कि अंचल में जब भी किसी को कोई जहरीला सर्प अथवा जहरीला जीव काट ले तो पीडित को रतनगढ़ माता के नाम से बंध लगा दिया जाता है। बंध लगते ही पीडित व्यक्ति स्वस्थ हो जाता है। पर दीपावली की दौज पर उसे रतनगढ़ माता मंदिर आना पड़ता है।

मंदिर से ठीक पहले सिंध नदी से गुजरते ही पीड़ित अचेत हो जाता है और उसके मुंह से झाग निकलने लगता है। अचेत अवस्था में पीडित को परिजन कंधे पर अथवा स्ट्रेचर से मंदिर लाते है। उसे देवी मां के दर्शन करवा कर कुंअर बाबा मंदिर की परिक्रमा दिलाई जाती है और कहा जाता है कि वहां लगे पेड़ों के झाड़ उसके शरीर से लगते ही वह हमेशा के लिए स्वस्थ हो जाता है। सदियों से इस प्रक्रिया को देखने लाखों लोग आते हैं।


मेले की व्यवस्थाओं में 3 हजार कर्मचारी अधिकारी तैनात

रतनगढ़ माता मंदिर पर दीपावली की दौज पर दो दिन चलने वाले मेले में मध्य प्रदेश के अलावा यूपी, राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचते हैं। रतनगढ़ मंदिर पर पिछले कुछ सालों में हादसे हो चुके हैं, इसी कारण आसपास के जिलों के अफसर पिछले 7 दिन से रतनगढ़ मेले के लिए होमवर्क कर रहे हैं। मेले में श्रद्धालुओं की सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस विभाग ने 1500 जवान अन्य जिलों से एवं 1000 जवान दतिया जिले से तैनात किए हैं। जिला प्रशासन ने 500 कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई है। मेला परिक्षेत्र में श्रद्धालुओं के वाहन खड़े करने 17 पार्किंग स्थल बनाए गए है।

दो दिन पहले वन विभाग को दिखा था बाघ, प्रशासन ने की अपील जंगल के रास्ते से न जाए श्रद्धालु

प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वह मंदिर पहुंचने के लिए जंगल के रास्तों का उपयोग न करें, मुख्य मार्ग से ही जाएं। यहां सेंवढ़ा वन क्षेत्र में दो दिन पहले बाघ दिखाई दिया था। इसके बाद प्रशासन ने मंदिर आने वाले लोगों को अलर्ट जारी कि या है।

रेंजर आनंद कुमार श्रीवास्तव के मुताबिक बाघ की लोकेशन वाले स्थानों पर सुरक्षा कर्मचारी तैनात कर दिए गए हैं। इसके बाद भी खमरोली, डिरोलीपार व अन्य जगह के लोग मंदिर तक आने के लिए जंगली रास्ते का उपयोग न करें। मेले में आने वाले लोग घने जंगल की ओर न जाएं। रेंजर ने श्रद्धालुओं से सिंध नदी में नहाते वक्त भी सावधानी बरतने को कहा है। रेंजर के मुताबिक पुल के आस पास ही स्नान करें। दूर जाने पर उन्हें मगरमच्छ मिल सकते हैं।

इनका कहना है

मेले में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं, मेला परिक्षेत्र में पेयजल, साफ सफाई, स्वास्थ्य सुविधा के अलावा सिंध नदी में बोट भी उलब्ध रहेंगी।

राकेश परमार, एसडीएम सेंवढ़ा

मेले में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा एवं सुरक्षा सर्वोपरि है। स्थल निरीक्षण कर पूरा नक्शा तैयार किया है। चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात है। 2 हजार से अधिक जवान एवं 50 से अधिक पुलिस अधिकारी मेले की पूरी व्यवस्था की निगरानी कर रहे हैं।

नरेंद्र सिंह गहरवार, एसडीओपी सेंवढ़ा