ग्वालियर। आय से अधिक संपत्ति के मामले में जेल की हवा खा रहीं बर्खास्त आईएएस टीनू जोशी जब लोकायुक्त से बचते हुए फरार चल रहीं थी तो उन्होंने अपने शातिर दिमाग का इस्तेमाल पहचान छिपाने में किया। वह अपनी बीमारी का इलाज कराने के लिए ग्वालियर के जयारोग्य अस्पताल पहुंची थी। यहां टीनू ने अपनी पहचान छिपाने के लिए कहीं भी अपना नाम टीनू नहीं लिखवाया। टीनू ने जेएएच के रेडियोलॉजी विभाग में अल्ट्रासाउंड करवाने से पहले एंट्री रजिस्टर में पहचान छिपाते हुए जोशी वाइफ ऑफ अरविंद लिखवाया।

आईएएस दंपत्ति अरविंद जोशी और टीनू जोशी आय से अधिक संपत्ति के मामले में मार्च 2014 से फरार चल रहे थे। लोकायुक्त उनकी तलाश प्रदेशभर में कर रही थी। टीनू जोशी ने 13 जनवरी को जिला सत्र न्यायालय भोपाल में सरेंडर किया। यहां सामने आया कि फरार रहने के समय टीनू इलाज कराने के लिए चुपचाप ग्वालियर पहुंची थी।

ग्वालियर के जयारोग्य अस्पताल में टीनू फरार रहने के दौरान जुलाई माह में दो से तीन बार इलाज के लिए गई और तीन दिन तक ग्वालियर रही। टीनू जोशी ने जयारोग्य अस्पताल में इलाज करवाने के दौरान पूरी तरह से अपनी पहचान दबाए रखी। पहचान छिपाने के लिए टीनू ने बहुत ही चालाकी से ओपीडी पर्चे से लेकर अल्ट्रासाउंड करवाने तक अपना नाम लिखवाने की जगह सरनेम लिखवाया। जिससे उन पर जरा भी किसी को संदेह न हो सके।

सूत्रों की मानें तो टीनू सबसे पहले 30 जुलाई को इलाज के लिए जेएएच पहुंची। यहां ओपीडी में पर्चा उन्होंने जोशी नाम से बनवाया। इसके बाद 1 अगस्त को टीनू जेएएच के रेडियोलॉजी विभाग में अल्ट्रासाउंड के लिए पहुंची थी। यहां अल्ट्रसाउंड से पहले रजिस्टर में एंट्री होती है। इसमें उन्होंने अपना नाम टीनू लिखवाने की जगह जोशी लिखवाया। पति का नाम भी पूरा न बताते हुए अरविंद ही लिखवाया। रजिस्टर में 1 अगस्त के सबसे पहले सीआर नंबर 20316 पर जोशी वाइफ ऑफ अरविंद के नाम से एंट्री है।

चर्चित आईएएस फिर भी किसी ने नहीं पहचाना:

आय से अधिक संपत्ति के मामले में जब अरविंद जोशी और टीनू जोशी के घर छापा मारा गया था तो पूरे प्रदेश का यह बहुचर्चित मामला बन गया था। वहीं टीनू ग्वालियर में पदस्थ भी रह चुकी हैं। इसके बाद भी टीनू को किसी ने नहीं पहचाना यह बहुत ही चौंकाने वाली बात है। यह कहीं न कहीं इस ओर भी इशारा करती है कि जेएएच में भी टीनू की पहचान छिपाने की कोशिश की गई है।

सभी मरीजों के नाम और टीनू का सरनेम:

जेएएच इस वजह से भी संदेह में है, क्योंकि जिस रजिस्टर में जोशी के नाम की एंट्री की गई है, उस रजिस्टर में एक ही जगह जोशी वाइफ ऑफ अरविंद लिखा हुआ है, जबकि इसके अलावा सभी मरीजों के नाम लिखे हुए हैं।