ग्वालियर। शहर में लगाई गई धारा 144 को समाप्त करने की मांग को लेकर रक्षक मोर्चा और विभिन्न् सवर्ण संगठनों के कार्यकर्ता मंगलवार को कलेक्टर की जनसुनवाई में पहुंचे। यहां शहर में धारा-144 लगाए जाने के विरोध में अधिकारियों को विरोध पत्र सौंपा और धारा को हटाए जाने की मांग की। कार्यकर्ताओं ने अपर कलेक्टर दिनेश श्रीवास्तव से पूछा कि शांतिपूर्ण माहौल के बीच धारा-144 का उपयोग क्यों किया जा रहा है, खुद पुलिस और प्रशासन ही शहर की छवि बिगाड़ रहा है। अधिकारियों ने वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा करने का आश्वासन दिया।

इस दौरान रक्षक मोर्चा के सुनील पटेरिया ने कहा कि शहर में पिछले दिनों भारत बंद से लेकर रैलियां और सभाएं हुईं, किसी भी आयोजन में कानून व्यवस्था नहीं बिगड़ी, सभी आयोजकों ने अनुशासन का परिचय दिया। धारा-144 को अचानक प्रभावी करने का सीधा ही अर्थ यह है कि जिला पुलिस और जिला प्रशासन यह मान रहा है कि शहर में स्थिति शांतिपूर्ण नहीं है।

कलेक्ट्रेट पहुंचने वालों में रक्षक मोर्चा के कैलाश मिश्रा, राजवीर सिंह राठौड, विजय शर्मा, अमित दुबे, राजा चौहान, गौरव तिवारी, अशोक शर्मा, गिर्राज दुबे, धर्मेन्द्र शर्मा, नीरज शर्मा, अरूण शर्मा, गजेन्द्र तिवारी, वासुदेव मिश्रा, संजीव गर्ग, श्याम सारस्वत, संगम भार्गव, अनुपमा सिंह, शिल्पा डोंगरा, अखिलेश पांडे, शैलेन्द्र सिंह कुशवाह, संजू गोस्वामी आदि शामिल थे।

क्रमिक भूख हड़ताल खत्म

एससी-एसटी एक्ट के विरोध में लक्ष्मीबाई समाधि स्थल पर चल रहा धरना मंगलवार को समाप्त हो गया। धरने के लिए सिर्फ 48 घंटे की अनुमति ली गई थी। धरना स्थल पर स्वामी गीतानंद महाराज, एमएम अंसारी, सुरजीत भदौरिया, पंजाबी सेवा समिति के अध्यक्ष मोहनलाल अरोरा, शिवदयाल चतुर्वेदी, रामवीर शर्मा, सौम्या शर्मा, रश्मि पुरोहित, मकसूद अली, फरजाना हुसैन, कर्मचारी नेता रणवीर सिंह सिकरवार, गंगासिंह चौहान प्रमुख रूप से मौजूद रहे।

सांसदों की सद्बुद्धि के लिए अचलेश्वर पर यज्ञ

पृथ्वीराज चौहान बहुउदेशीय समाज कल्याण समिति, रक्षक मोर्चा और सवर्ण ओबीसी समाज की ओर से बुधवार को अचलेश्वर मंदिर पर सुबह 11 बजे से सांसदों की सद्बुद्धि के लिए यज्ञ का आयोजन किया जाएगा। राजा चौहान ने बताया कि एट्रोसिटी एक्ट को पास करके सवर्णों को खतरे में डालने वाले सांसदों की सद्बुद्धि के लिए यह किया जा रहा है।

शहर में धारा 144 लगाने के आदेश के खिलाफ कोर्ट में याचिका दायर ग्वालियर

जिला सत्र न्यायालय में शासन के उस आदेश के खिलाफ याचिका दायर की गई है, जिसमें नियम विरुद्ध शहर में धारा 144 लागू की गई है। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया है कि एससी-एसटी एक्ट के संशोधन को लेकर सवर्ण समाज शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहा है, लेकिन राजनेताओं के संरक्षण के लिए अवैध रूप से धारा 144 लागू की गई है। कहीं भी कोई भी तोड़फोड़ व उपद्रव नहीं हुआ है। सिर्फ आशंका के आधार पर धारा 144 लागू कर दी है। दो महीने से ज्यादा इसे लागू नहीं रखा जा सकता है, लेकिन एडीएम के आदेश में तारीख का कोई उल्लेख नहीं है। अवैध रूप से लगाई गई धारा144 के आदेश को निरस्त किया जाए।

अधिवक्ता अवधेश सिंह भदौरिया ने धारा 144 के खिलाफ याचिका दायर की है। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया था कि एससी-एसटी एक्ट में सुप्रीम कोर्ट ने एक गाइडलाइन निर्धारित की थी, जिसमें बिना जांच के गिरफ्तारी नहीं होगी, लेकिन संसद में विधेयक पारित कर फिर से उसे लागू कर दिया है। इस एक्ट के खिलाफ सवर्ण समाज शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहा है। शांतिपूर्वक प्रदर्शन करना हर व्यक्ति का संवैधानिक अधिकार है।

इसे मनमाने तरीके से प्रतिबंधित नहीं किया जा सकता है। प्रदर्शन के दौरान हथियार निकाले हैं न किसी ने भड़काऊ भाषण दिया है न ही राष्ट्र की संपत्ति को कोई नुकसान पहुंचाया है। याचिकाकर्ता भी एससी-एसटी एक्ट का जो विरोध हो रहा है, उसका समर्थन करता है। राजनेताओं को विरोध से बचाने के लिए जिला प्रशासन ने अवैध रूप से धारा 144 लगाई है। इसे निरस्त किया जाए। इस मामले पर 4 अक्टूबर को सुनवाई होगी।