मनीष शर्मा, ग्वालियर। अगर सोच क्रिएटिव हो तो कम संसाधनों में कुछ अनूठा तैयार किया जा सकता है। छोटी- छोटी चीजों से भी ऐसा कुछ तैयार किया जा सकता है, जिसे देखकर हर किसी के मुंह से खुद-ब-खुद 'वाह' निकल उठे। कुछ ऐसा ही काम किया है राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय नाटक एवं रंगमंच संकाय के तृतीय वर्ष के छात्र अतिशय जैन ने। उन्होंने कबाड़ के सामान से एक एकतारा वाद्ययंत्र बनाया है।

खास बात यह है कि इससे अन्य पारंपरिक वाद्ययंत्रों की तरह सात स्वर निकलते हैं। उनका दावा है, इस वाद्ययंत्र से किसी बड़े समारोह में संगत भी की जा सकती है। उनके क्रिएशन को लेकर जब संगीत विश्वविद्यालय के अन्य विशेषज्ञों से चर्चा की तब उन्होंने अतिशय द्वारा बनाया गया इकतारा से पारंपरिक वाद्ययंत्रों जैसी धुनें निकलती हैं। वहीं अतिशय ने इस वाद्ययंत्र को तैयार करने की वजह एक भिखारी से मिली प्रेरणा को बताया।

हैं कई खासियत

यह सिर्फ एकतारा ही नहीं है, इसे एक स्वर में सेट कर तंबूरे की तरह भी बजाया जा सकता है। इतना ही नहीं इसे फ्री स्टाइल में भपंग की तरह भी बजा सकते हैं। गिटार के साथ ताल दे सकते हैं, साथ ही ढोलक और अन्य वाद्ययंत्रों से निकले सुरों को खूबसूरती प्रदान की जा सकती है।

कर सकते हैं संगत भी

अतिशय बताते हैं कि इस वाद्ययंत्र को बनाने की प्रेरणा उन्हें एक भिखारी द्वारा बजाए जा रहे एक तारा से मिली। उन्होंने उसके वाद्ययंत्र को देखकर सोचा कि वे भी एक ऐसा ही वाद्ययंत्र बनाएं, लेकिन इससे निकलने वाली आवाज और मधुर हो। इसके अलावा वह मल्टीपरपज वाद्ययंत्र हो। इसके बाद उन्होंने छह माह की कड़ी मेहनत के बाद यह वाद्ययंत्र तैयार कर लिया।

इसे बनाने में महज 30 रुपए की लागत आई है। उन्होंने जो वाद्ययंत्र बनाया है, वो इकतारा, तानपुरा, भपंग और तम्बूरा का मिश्रण है। इस पर कोई भी गाना बजाया सकता है। इस वाद्ययंत्र को उल्टा करके ढप की तरह भी बजाया जा सकते हैं। इस तरह यह एक वाद्ययंत्र कई म्यूजिक इंस्ट्रूमेंट की जरूररत पूरा करता है।

छोटे-छोटे सामान से बन गया वाद्ययंत्र

इस वाद्ययंत्र को बनाने में काफी कम लागत आई है, क्योंकि इसे बनाने के लिए मामूली चीजों का इस्तेमाल किया गया है। ऐसी चीजें हैं, जो हर घर में आसानी से मिल जाती हैं। वाद्ययंत्र को एक टिन के डिब्बे, पुराने ढोलक के पल्ले, एक लंबी गोल लकड़ी, एक तार और कील से तैयार किया गया है।