ग्वालियर से दीपक सविता। चौदहवीं शताब्दी में ग्वालियर रियासत के राजा मानसिंह तोमर और राई गांव की गुर्जरी (मृगनयनी) की अमर प्रेम कहानी के साक्ष्य आज भी नलकेश्वर पर मौजूद हैं। राजा मानसिंह तोमर ने गुर्जरी से विवाह करने का प्रस्ताव रखा था। राजा से विवाह के लिए गुर्जरी ने शर्त रखी थी कि नलकेश्वर का पानी अगर ग्वालियर किले तक पहुंच जाएगा तो वह उनसे विवाह कर लेगी। गुर्जरी की इस शर्त को पूरा करने के लिए राजा मानसिंह तोमर ने नलकेश्वर से लगभग 40 किमी लंबी पानी की पाइप लाइन ग्वालियर किले तक बनवाई थी।

ग्वालियर स्थित तिघरा बांध के पीछे लगभग 10 किमी की दूरी पर यह नलकेश्वर मंदिर स्थित है। यहां पर गोमुख से पानी की धारा बहती है। इसी पानी को किले तक पहुंचाने के लिए पाइप लाइन बिछाई गई थी। यह लाइन पहाड़ी को काटकर बनाई गई थी, जो लगभग 300 फीट की ऊंचाई तक है। साथ ही आगे चलकर यह पाइपलाइन जमीन पर आ गई। बताया जाता है कि पानी को लिफ्ट करने के लिए दो स्टेशन भी बनवाए गए थे।

अब बचे हैं सिर्फ अवशेष

नलकेश्वर पर आज भी गोमुख स्थित है। गोमुख के पास ही भगवान शिव का मंदिर है। बताया जाता है कि इसी शिव मंदिर में मृगनयनी पूजा करने के लिए आती थी। इसी गोमुख से निकलने वाले पानी को पाइप लाइन के जरिए ग्वालियर किले स्थित गूजरी महल तक लाया गया था। हालांकि अब इस पाइप लाइन के अवशेष ही बचे हैं। जंगल के बीच से गुजरने वाली पाइपलाइन तक पहुंचना भी आसान नहीं है।