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- तहसील के ग्राम दामोदरपुरा के किसान ने 10 एकड़ के रकबे में लगाई फसल

सेंटर फोटो-01 खिरकिया। ग्राम दामोदरपुरा के किसान के खेत में लगी सूरजमुखी फूल की खेती।

खिरकिया। नवदुनिया न्यूज

तहसील के ग्राम दामोदरपुरा के एक किसान ने नई टेक्नोलॉजी का उपयोग कर अपने खेत में चने के साथ-साथ सूरजमुखी की भी खेती की है। किसान का यह हालांकि छोटा सा प्रयास था। किंतु इससे न केवल उसे अतिरिक्त आय होगी, बल्कि उसका यह प्रयास अन्य किसानों के लिए प्रेरणा भी बन सकेगा। दामोदरपुरा के किसान राकेश राजपूत ने बताया कि वह आमतौर पर रबी सीजन में गेंहू और चना ही लगाता रहा है। लेकिन इस साल उसने नेट पर सर्च कर जाना कि चने की फसल को इन्टरक्राफ्टिंग कर सूरजमुखी भी लगाई जा सकती है। इससे चने की फसल को कोई नुकसान नहीं होता है। इसी दौरान ग्राम के ही एक प्रगतिशील किसान गयाप्रसाद खोरे ने भी उसका सहयोग किया। राकेश ने बताया कि जब उसे स्थानीय बाजार में सूरजमुखी का बीज उपलब्ध नहीं हुआ, तो उसने बीज इंदौर से बुलवाया। और 10 एकड़ के रकबे में लगाए गए चने में इन्टरक्राफ्टिंग कर करीब डेढ़ किलो सूरजमुखी का बीज बोया। उन्होंने बताया कि इसके बाद सारी सालसम्हाल चने के साथ-साथ होती गई। अर्थात उसे कोई अतिरिक्त परिश्रम नहीं करना पड़ा। अक्टूबर में बोया सूरजमुखी वर्तमान में लहलहाने लगा है। बकौल राकेश चने की कटाई के बाद सूरजमुखी की कटाई की जाएगी। उनके अनुसार करीब 25 क्विंटल सूरजमुखी का उत्पादन होगा।

सूरजमुखी एक महत्वपूर्ण तिलहनी फसल

मालूम हो कि सूरजमुखी एक महत्वपूर्ण तिलहनी फसल है। बेहतर मुनाफा देने वाली इस फसल को नकदी खेती के रूप में भी जाना जाता है। सूरजमुखी की खेती देश में पहली बार साल 1969 में उत्तराखंड के पंतनगर में की गई थी। यह एक ऐसी तिलहनी फसल है, जिस पर प्रकाश का कोई असर नहीं पड़ता, यानी यह फोटोइनसेंसिटिव है। इसे खरीफ, रबी और जायद तीनों मौसमों में उगा सकते हैं। इसके बीजों में 40-50 फीसदी तक तेल पाया जाता है। इस के तेल में एक खास तत्व लिनोलिइक अम्ल पाया जाता है। लिनोलिइक अम्ल शरीर में कोलेस्ट्राल को बढ़ने नहीं देता है। अपनी खूबियों की वजह से इस का तेल दिल के मरीजों के लिए दवा की तरह काम करता है। पिछले कुछ वर्षों से अपनी उत्पादन क्षमता व अधिक मूल्य के कारण सूरजमुखी की खेती, देशभर के किसानों में दिनोंदिन लोकप्रिय होती जा रही है। सूरजमुखी को बड़े पैमाने पर उगाने से न केवल खाद्य तेल उपलब्ध होगा बल्कि विदेशी मुद्रा की भी बचत होगी।

कम समय की फसल

सूरजमुखी जल्दी पकने वाली फसल है, सूखा को सहन कर सकती है, तापमान एवं प्रकाश के प्रति असंवेदनशील है। अतः सूरजमुखी को खरीफ अथवा रबी के मौसम में उगा सकते हैं।

- राकेश राजपूत, किसान, दामोदरपुरा

अच्छा लाभ कमा सकते हैं किसान

देश में खाद्य तेलों की उपलब्धता प्रति व्यक्ति 8.1 किग्रा है जो मानक से काफी कम है। सरसों में यूरिसिक अम्ल 47 प्रतिशत होता है। ऐसे तेल जिसमें मल्टी असंतृप्त वसीय अम्ल का प्रतिशत अधिक होता है। वे स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होते हैं। सूरजमुखी में 40 प्रतिशत से अधिक तेल तथा 42 से 44 प्रतिशत उधा गुणवत्ता की प्रोटीन पायी जाती है। फसल 95 से 100 में तैयार हो जाती है। इससे आर्थिक लाभ तो होता ही है इसका उपयोग स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक है।

- संजय जैन, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी, खिरकिया

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आज से शुरू होगी नवमीं और ग्यारहवीं की वार्षिक परीक्षा

- परीक्षा के लिए समस्त स्कूलों को भेजे गए मुद्रित प्रश्न-पत्र

फोटो- फोटो के लिए स्कूल के केरीकेचर का उपयोग करें।

खिरकिया। नवदुनिया न्यूज

ब्लॉक में आज 12 फरवरी मंगलवार से नवमीं और ग्यारहवीं कक्षा की वार्षिक परीक्षा शुरू हो रही है। यह परीक्षा ब्लॉक के 14 हाईस्कूलों और 12 हॉयर सेकंडरी स्कूलों में शुरू होगी। परीक्षा 28 फरवरी तक चलेगी। तथा परिणाम 31 मार्च तक घोषित कर दिए जाएंगे। जानकारी के अनुसार कक्षा नवमीं की वार्षिक परीक्षा में ब्लॉक के 2 हजार, 283 विद्यार्थी सम्मिलित होंगे। जबकि कक्षा ग्यारहवीं की वार्षिक परीक्षा में 965 विद्यार्थी सम्मिलित होंगे। बीईओ डीएस रघुवंशी ने बताया कि राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत शैक्षणिक सत्र 2018-19 के लिए कक्षा नवमीं तथा ग्यारहवीं की वार्षिक परीक्षाएं 12 फरवरी से प्रारंभ हो रही हैं। कक्षा नवमीं की परीक्षा सुबह 9 से दोपहर 12 बजे तक तथा कक्षा ग्यारहवीं की परीक्षा दोपहर एक से चार बजे तक होगी। परीक्षा के लिए समस्त स्कूलों को मुद्रित प्रश्न-पत्र जिला मुख्यालय से प्राप्त हो चुके हैं। मूल्यांकन के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश अलग से जारी होंगे। उन्होंने बताया कि मप्र लोक शिक्षण आयुक्त के निर्देशानुसार पर्यावरण शिक्षा एवं आपदा प्रबंधन की परीक्षा संस्था स्तर पर आयोजित होगी। वहीं परीक्षा के दौरान सार्वजनिक या स्थानीय अवकाश होने पर भी कार्यक्रम में कोई बदलाव नहीं होगा तथा परीक्षा शुरू होने के 15 मिनट बाद प्रवेश बंद कर दिया जाएगा।

कक्षा नवमीं की समय सारिणी

12 फरवरी 2019 को सामाजिक विज्ञान, 14 फरवरी को विशिष्ट भाषा (हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत, उर्दू), 16 फरवरी को तृतीय भाषा (सामान्य) संस्कृत, उर्दू (मराठी, बंगला, गुजराती, तेलगू, तमिल, पंजाबी, सिंधी आदि), 20 फरवरी को गणित समेत पेंटिंग (मूकबधिरों के लिए) तथा संगीत (दृष्टिहीनों के लिए), 23 फरवरी को विज्ञान, 25 फरवरी को द्वितीय व तृतीय भाषा (सामान्य) हिंदी, 28 फरवरी को द्वितीय व तृतीय भाषा (सामान्य)- अंग्रेजी तथा दो मार्च को वोकेशनल एजुकेशन की परीक्षा होगी।

कक्षा ग्यारहवीं की समय सारिणी

12 फरवरी को विशिष्ट भाषा-हिंदी, (वोकेशनल समेत), 13 फरवरी को विशिष्ट भाषा-अंग्रेजी (वोकेशनल समेत), 15 फरवरी को द्वितीय भाषा सामान्य-हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत, उर्दू, मराठी, बंगला समेत अन्य भाषाएं, 16 फरवरी को भारतीय संगीत, 18 फरवरी को इतिहास, भौतिक शास्त्र, व्यवसाय अध्ययन, कृषि उपयोगी विज्ञान एवं गणित के मूल तत्व, ड्राइंग-पेंटिंग तथा गृह प्रबंध पोषण एवं वस्त्र विज्ञान, 21 फरवरी को जीव विज्ञान, बुक कीपिंग एंड एकाउंटेंसी, 22 फरवरी को बायो टेक्नोलॉजी, इंफोरमेटिक प्रेक्टिसेस, सूचना प्रौद्योगिकी, सुरक्षा, सौंदर्य एवं देखभाल, रिटेल, बैंकिंग एवं फाइनेंस, हेल्थ केयर, टे्रवल एंड टूरिज्म, फिजिकल एजुकेशन, इलेक्ट्रिकल, 23 फरवरी को राजनीति शास्त्र, पशुपालन, दुग्ध व्यवसाय, विज्ञान के तत्व, भारतीय कला का इतिहास, वोकेशनल, 25 फरवरी को भूगोल, रसायन शास्त्र, फसल उत्पादन एवं उद्यानिकी, 26 फरवरी को अर्थशास्त्र (कला संकाय), 27 फरवरी को समाज शास्त्र, मनोविज्ञान, होम साइंस, 28 फरवरी को उधा गणित, ड्राइंग एंड डिजाइनिंग तथा दो मार्च को विशिष्ट भाषा-संस्कृत व उर्दू विषय की परीक्षा होगी।

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सरस्वती शिशु मंदिर में गायत्री हवन के साथ मनाया समर्पण दिवस

- सरस्वती शिशु मंदिर बाड़ी मैदान एवं खेड़ीपुरा में मनाया बसंत उत्सव

सेंटर फोटो-02 खिरकिया। बसंतोत्सव पर सरस्वती पूजन, गायत्री हवन करते हुए।

खिरकिया। नवदुनिया न्यूज

स्थानीय सरस्वती शिशु मंदिर बाड़ी मैदान एवं खेड़ीपुरा दोनों विद्यालयों में सोमवार को बसंतोत्सव, सरस्वती पूजन, गायत्री हवन तथा समर्पण दिवस एक साथ मनाया गया। गायत्री परिवार के उमाशंकर पाराशर, प्रेमनारायण बोरसे और महेश शर्मा ने दोनों विद्यालयों में गायत्री हवन, सरस्वती पूजन का कार्यक्रम संपन्न कराया। इस दौरान विद्यालय संचालन समिति के सचिव सुधीर सोनी ने बताया कि इसी दिन गौरखपुर में प्रथम शिशु मंदिर की स्थापना हुई थी। इसलिए आज का दिन सरस्वती शिशु मंदिर के लिए महत्वपूर्ण है। जिसे हम समर्पण दिवस के रूप में मनाते है। इस समर्पण राशि द्वारा वनवासी बन्धुओं के लिए एकल विद्यालय एवं चिकित्सा केंद्र चलता है। जिससे वह बन्धु बांधव संस्कृति से विमुख न हो तथा विधर्मी लोग जो धर्मान्तरण के माध्यम से राष्ट्रांतर कराना चाहते है उनकी इच्छा पूर्ण न हो।

विद्यालय के प्राचार्य महेन्द्र यादव ने बताया कि बसंत पंचमी पर वनवासी क्षेत्र में चलने वाले संस्कार केंद्रों के लिए आचार्य परिवार, समिति पदाधिकारीगण, अभिभावकों, समाजसेवियों एवं भैया बहिनों के द्वारा सहयोग निधि समर्पण के माध्यम से एकत्र की जाती है। जिससे संस्कार केंद्रों एवं प्रदेश में चलने वाले नौ आवासीय छात्रावासों का संचालन किया जाता है। उन्होंने बताया कि हरदा जिले के टिमरनी तहसील में भी एक वनवासी छात्रावास बड़ादेव जनजाति बालक छात्रावास कायदा ग्राम में संचालित है। कार्यकम में गायत्री हवन में अभिभावकों, विद्यार्थियों और आचार्य परिवार ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इनमें अनसुइया रमेश राजपूत बावड़िया, अर्चना संतोष कौशल, रिंकी राहुल कौशल, सरोज श्याम कौशल, संध्या गोपाल सोनी, ओमप्रकाश शर्मा, संध्या बायवर, संगीता राय, व्यवस्थापक संतोष गौर प्रधानपाठक प्रभात साकल्लले, सरस्वती शर्मा, दीपक पुरी, रोहित रावत, मोहन चौरे, बाबूलाल राठौर, मनीष जैन, जितेंद्र यादव, वनिता सोले, सुनीता जोशी, आशा यादव, कीर्ति कौशल, कविता शुकला, अनुराधा राठौर, प्रीति खत्री, ज्योति उमरिया, प्रिया मोरी आदि शामिल हैं।

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