बॉटम खबर पेज 13

फोटो 5 हरदा। दत्तोपंत ठेंगड़ी की जयंती मनाता मजदूर संघ।

दत्तोपंत ठेंगडी ने बनाया था भारतीय मजदूर संगठन : पटेल

भारतीय मजदूर संघ के जिलाध्यक्ष महामंत्री ने धूमधाम से मनाई जयंती

हरदा। नवदुनिया प्रतिनिधि

भारतीय मजदूर संघ द्वारा विश्वव्यापी संगठनों के संस्थापक राष्ट्र ऋषि दत्तोपंत ठेंगडी की जयंती धूमधाम से मनाई गई। संघ के जिला मंत्री जितेंद्र सोनी के निजी निवास पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में भारतीय मजदूर संघ जिलाध्यक्ष अमृत पटेल, उपाध्यक्ष वीरेंद्र गौहर, जिला सह मंत्री सुनील गोल्या, मुकेश निकुम रामविलास टिकेट, मनजीत कौर, लकी बेनीपुरी, उमेश गौर ने मिठाइयां बाटी। जानकारी देते हुए अमृत पटेल और जितेंद्र सोनी ने बताया कि दत्तोपन्त ठेंगडी का जन्म दीपावली वाले दिन (10 नवम्बर, 1920) को ग्राम आर्वी, जिला वर्धा, महाराष्ट्र में हुआ था। वे बाल्यकाल से ही स्वतन्त्रता संग्राम में सक्रिय रहे। 1935 में वे वानरसेना के आर्वी तालुका के अध्यक्ष थे। जब उनका सम्पर्क डॉ. हेडगेवार से हुआ तो संघ के विचार उनके मन में गहराई से बैठ गए। पटेल ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा, कि ठेंगड़ी जी को उनके पिता उन्हें वकील बनाना चाहते थे लेकिन दत्तोपन्त एमए तथा कानून की शिक्षा पूर्णकर 1941 में प्रचारक बन गए। शुरू में उन्हें केरल भेजा गया। वहां उन्होंने राष्ट्रभाषा प्रचार समिति का काम भी किया। केरल के बाद उन्हें बंगाल और फिर असम भी भेजा गया। श्री ठेंगडी ने संघ के द्वितीय सर संघचालक गुरुजी के कहने पर मजदूर क्षेत्र में कार्य प्रारम्भ किया। इसके लिए उन्होंने इण्टक, शेतकरी कामगार फेडरेशन जैसे संगठनों में जाकर काम सीखा। साम्यवादी विचार के खोखलेपन को वे जानते थे। अतः उन्होंने भारतीय मजदूर संघ नामक अराजनीतिक संगठन शुरू किया, जो आज देश का सबसे बडा मजदूर संगठन है।

ठुकराया पद्मभूषण सम्मान

2002 में राजग शासन द्वारा दिए जा रहे ' पद्मभूषण' अलंकरण को उन्होंने यह कहकर ठुकरा दिया कि जब तक संघ के संस्थापक पूज्य डॉ. हेडगेवार और गुरुजी को 'भारत रत्न' नहीं मिलता, तब तक वे कोई अलंकरण स्वीकार नहीं करेंगे। मजदूर संघ का काम बढने पर लोग प्रायः उनकी जय के नारे लगा देते थे। इस पर उन्होंने यह नियम बनवाया कि कार्यक्रमों में केवल भारत माता और भारतीय मजदूर संघ की ही जय बोली जाएगी। 14 अक्तूबर 2004 को उनका देहान्त हुआ। ठेंगडी अनेक भाषाओं के ज्ञाता थे। उन्होंने हिन्दी में 28, अंग्रेजी में 12 तथा मराठी में तीन पुस्तकें लिखीं।