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फोटो 1 हरदा। राष्ट्रीय कृषि बाजार कार्यालय।

कैचवर्डः 2016 में शुरू हुई राष्ट्रीय कृषि बाजार योजना में सिर्फ गिने चुने किसानों से ही हुई खरीदी

हैडिंगः ऑनलाइन कृषि बाजार में व्यापारियों की रुचि नहीं, किसान योजना के लाभ से वंचित

हरदा। नवदुनिया प्रतिनिधि

किसानों को उनकी उपज का बेहतर दाम मिल सके। इसके लिए शुरू की गई राष्ट्रीय कृषि बाजार योजना शुरू की थी। जिसके तहत किसानों की उपज खरीदी ऑनलाइन की जानी थी। इस खरीदी में देशभर से कोई भी व्यापारी भाग ले सकता था, लेकिन दो साल बाद भी यह योजना मूर्त रूप नहीं ले सकी है। किसानों को उनकी उपज का बाजिव मूल्य दिलाने की मंशा से शुरू की गई राष्ट्रीय कृषि बाजार योजना स्थानीय कृषि उपज मंडी में दम तोड़ती नजर आ रही है। इस योजना का शुभारंभ 26 अप्रैल 2016 को किया गया था। इस दिन औपचारिकता के रूप में मात्र एक क्विंटल रायड़ा खरीदा गया था। इसके बाद बाहर के व्यापारियों के इसमें शामिल नहीं होने से योजना पूरी तरह से मूर्तरूप नहीं ले सकी। इन दो सालों में कुछ गिने चुने ही किसानों की उपज की खरीदी की जा सकी है। योजना के तहत किसानों की कुछ उपजों की खरीदी ऑनलाइन की जानी थी। इस खरीदी में देश भर से कोई भी व्यापारी भाग ले सकता था, लेकिन दो साल बाद भी इस योजना का लाभ अधिकांश किसानों को नहीं मिल रहा है। यहां के कर्मचारी सैंपल लेकर नेट पर तो डाल रहे हैं, लेकिन बाहर के व्यापारी नीलामी में भाग नहीं ले रहे हैं। फिलहाल स्थानीय व्यापारियों द्वारा ही गेहूं के दो चार लॉट खरीदे जा रहे है। वहीं राष्ट्रीय बाजार में खरीदी नहीं होने के कारण स्थानीय मंडी में व्यापारियों द्वारा किसानों को उपज के भाव भी कम दिए जा रहे है। जिसे किसानों को मजबूरी में उपज बेचना पड़ रहा है। हालत यह है, कि सोयाबीन 3 हजार रुपए से अधिक के दाम पर अभी तक नहीं बिक है।

योजना में शामिल दर्जनों उपज

इस योजना का उद्देश्य था कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलने के साथ ही खरीदी में पारदर्शिता बनी रहे। इस योजना में मसूर, सरसों, उडद, बटरा, ज्वार, चना एवं गेहूं सहित कई प्रकार की उपजों को शामिल किया गया है। इस ऑनलाइन योजना में शामिल होने के लिए व्यापारियों को लाइसेंस लेना अनिवार्य था। लेकिन बाद में इसमें शिथिलता कर दी गई। जानकारी के मुताबिक इस योजना के तहत कई व्यापारियों ने रजिस्ट्रेशन कर रखा है। इसके लिए कम्प्यूटर आपरेटर, लैब ग्रेडर, इनाम मित्र, इनाम प्रभारी आदि करीब दर्जन भर कर्मचारियों की नियुक्ति की गई है। बावजूद इसके किसानों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है।

मंडी में ऐसा होता नहीं दिखाई देता

जानकारी के मुताबिक राष्ट्रीय कृषि बाजार के तहत खरीदी के लिए दिशा निर्देश दिए गए हैं। जिनके मुताबिक जैसे ही किसान अपनी उपज लेकर मंडी के गेट पर पहुंचता है। संबंधित कर्मचारी उपज का नमूना लेकर किसान को एक स्लिप देता है। इसके बाद किसान मंडी परिसर में अपनी ट्राली खड़ी करेगा। कर्मचारी सैंपल लेकर लैब में जाएगा। जहां से क्वालिटी निकालकर पोर्टल पर फीड करेगा और संबंधित ट्रॉली पर चस्पा करेगा। जब व्यापारी नीलामी में भाग लेने जाएंगे उस समय ट्रॉली पर चस्पा क्वालिटी को देखकर संबंधित जिंस की बोली लगाई जाएगी। इस दौरान व्यापारी के पास मोबाइल या टेवलेट होना जरुरी है। जिससे वह अपनी बोली ऑनलाइन फीड करेगा। यह बोली देखकर देश के किसी भी कोने से अन्य व्यापारी भी अपनी बोली फीड कर सकता है। लेकिन स्थानीय मंडी में ऐसा कुछ होते दिखाई नहीं दे रहा है।

पोर्टल पर दर्ज होती है सिर्फ एंट्री

जानकारी के मुताबिक मंडी में आने वाली उपजों की ऑनलाइन नीलामी की जगह सिर्फ राष्ट्रीय कृषि बाजार पोर्टल पर इंट्री की जा रही है। मंडी के कर्मचारियों का कहना है, कि जब तक बाहर के व्यापारी इसमें शामिल नहीं होंगे। योजना मूर्तरूप नहीं ले पाएगी। बाहर के व्यापारी के पास माल खरीदने के बाद उसकी तौल और लोडिंग - अपलोडिंग की समस्या भी है। इसके अलावा मंडी में एलईडी भी नहीं लगे है, जिसमें किसान अपनी उपज का मूल्य सहित अन्य जानकारी देख सके।

बिना देखे खरीदी से क्वालिटी में पड़ता है फर्क

इस संबंध में मंडी के व्यापारियों का कहना है, कि ऑनलाइन खरीदी हरदा जैसे शहर में संभव नहीं हैं। इसके लिए सबसे पहले व्यापारी का पढा-लिखा होना जरूरी है। उसे कम्प्यूटर का ज्ञान होना चाहिए। इसके बाद जब आप जिले से बाहर का माल खरीदेंगे तो जहां माल खरीदा है उस मंडी में आपके माल की तुलवाई कौन कराएगा। बिना देखे खरीदी करने में क्वालिटी का फर्क पडता है। इसके बाद उस माल को कहां रखा जाएगा, उसे लेकर कौन आएगा। आदि तमाम तरह की समस्याओं के चलते ऑनलाइन खरीदी शुरू होना असंभव बताया जा रहा है। यही कारण है कि केन्द्र सरकार की यह महत्वपूर्ण योजना जिले में मात्र औपचारिकता बनकर रह गई है।