फोटो 3 हरदा। ट्रैचिंग ग्राउंड के कचरे में लगी आग।

हरदा। नवदुनिया प्रतिनिधि

शहर का कचरा खेड़ीपुरावासियों लिए मुसीबत बन गया है। आए दिन इसमें आग लग रही है, जिसके जहरीले धुएं के कारण सांस लेना मुश्किल हो गया है। हालत यह है, कि गर्मी में भी लोग पंखे व कुलर को चालू नहीं कर रहे हैं। साथ ही शाम होते ही धुएं से बचने के लिए खिड़की - दरवाजे बंद कर देते हैं। मालूम हो कि नगर पालिका द्वारा शहर का कचरा खंडवा बायपास पर मुक्तिधाम के पास डाला जाता है। गुरुवार को कचरे में आग लगा दी जिसके कारण बायपास पर आने जाने वाले वाहनों और स्थानीय रहवासियों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ा। देखते ही देखते पूरा क्षेत्र धुएं में घिर गया। सड़क की स्थिति यह थी कि सामने चल रहा वाहन भी नहीं दिख रहा था। परेशान लोगों ने नपा को सूचना दी। फिर भी फायर बिग्रेड नहीं पहुंचा। यह पहली बार नहीं है। इससे पहले भी सूचना देते हैं पर दमकल पहुंचती और न अधिकारी। एक विडंबना यह भी है, कि इस परेशानी को नपा नजर अंदाज कर रही है। खुलेआम रिहायसी इलाकों में पॉलीथिन युक्त कचरे को जलाया जा रहा है। जिससे लोग कैंसर सहित कई घातक बीमारियों की चपेट में आ सकते हैं। साथ ही वातावरण पूरी तरह प्रदूषित हो रहा है। अब स्थानीय लोगों के साथ ही राहगीरों की भी परेशानी काफी बढ़ गई है। डॉ. राजेश सिसोदिया ने बताया कि कचरा में आग लगाने हानीकारक गैस मिथेन, सल्फर, कार्बन डायआक्साइड, कार्बन मोनो आक्साइड निकलते हैं। जो हमारे पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता है और ओजोन परत को क्षति पहुंचाता है। ये गैस मानव शरीर के लिए खतरनाक व जानलेवा है। इससे कैंसर, जेनेटिक डिजीज, चर्म रोग, सांस की बीमारी, एनिमिया, दांत, दमा, टीबी जैसी बीमारी होती है।

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फोटो 5 हरदा। गोवर्धन का पूजन करती हुई महिलाएं।

गोबर से भगवान गोवर्धन बनाकर किया महिलाओं ने पूजन

हरदा। नवदुनिया प्रतिनिधि

दीपोत्सव के तहत गुरुवार को घरों के बाहर गोवर्धन की पूजा अर्चना की गई। सुबह से ही महिलाओं में इसको लेकर काफी उत्साह दिखा गया। सुबह के समय महिलाएं सजी संवरी और घरों के बाहर गोबर से भगवान गोवर्धन बनाकर उसकी पूजन किया। महिलाओं ने एक दूसरे को दीपोत्सव की रामा श्यामा की और बड़े बुजुर्गों का आर्शीवाद लिया। इस मौके पर घरों के बैलों व गायों का भी पूजन किया गया। किसानों व पशु पालकों ने गाय पूजन किया। महिलाओं ने गोर्वधन बनाकर पूजा अर्चना की गई। गोसांई मंदिर पर भगवान के अन्नकूट उत्सव में बड़ी संख्या में श्रद्घालुओं ने भाग लिया। पुजारियों ने पूजा-अर्चना कर भगवान को व्यंजनों का भोग लगा कर उत्सव मनाया। पंडित सुरेश शर्मा के अनुसार इस दिन भगवान इंद्र की पूजा की जाती थी, लेकिन श्री कृष्ण ने उनकी पूजा बंद करा कर गोवर्धन पूजा आरंभ की। गोवर्धन आपका व मवेशियों का पेट भरते है, इसलिए इन्द्र के बजाए गोवर्धन की पूजा करना चाहिए। गोवर्धन पूजा पर्व को अन्नकूट पर्व के नाम से भी जाना जाता है। कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को गोवर्धन उत्सव मनाया जाता है। इस दिन बलि पूजा, अन्नकूट, मार्गपाली आदि उत्सव भी सम्पन्ना होते है। अन्नकूट या गोवर्धन पूजा भगवान कृष्ण के अवतार के बाद द्वापर युग से प्रारंभ हुई।