जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की खंडपीठ ने इस मत के साथ महिला सरपंच की रिट अपील खारिज कर दी कि जाति विशेष का दावा करने वाले को ही अपनी जाति सिद्ध करना होगी। अपीलकर्ता अपनी जाति को सिद्ध करने में असफल रही।

पन्ना जिले के ग्राम पंचायत बरौली की निवासी कुलसुमा बेगम खातून वर्ष 2015 में ओबीसी के लिए आरक्षित सीट से चुनाव लड़कर सरपंच निर्वाचित हुई थीं। लेकिन उनके खिलाफ काजी जियादुद्दीन ने आपत्ति दर्ज कराई थी कि उन्होंने गलत जानकारी देकर मोमिन जाति का प्रमाण-पत्र हासिल किया है। इस मामले में पन्ना सत्र न्यायालय में प्रकरण भी दायर किया गया। 24 नवंबर 2017 को पिछड़ा वर्ग मंत्रालय ने महिला सरपंच का जाति प्रमाण-पत्र निरस्त कर दिया। इसके बाद महिला सरपंच को पद से हटा दिया गया। जाति-प्रमाण निरस्त किए जाने के खिलाफ कुलसुमा बेगम ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की।

हाईकोर्ट की एकल पीठ ने जाति-प्रमाण निरस्त किए जाने के आदेश को सही मानते हुए याचिका खारिज कर दी। इसके खिलाफ युगल पीठ में रिट अपील दायर की गई। अनावेदक की ओर से अधिवक्ता काजी फखरुद्दीन ने दलील दी कि अपीलकर्ता ने गलत जानकारी देकर जाति प्रमाण-पत्र हासिल किया था। जिसे विधि सम्मत तरीके से निरस्त किया गया है। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने रिट अपील भी खारिज कर दी है।