भोपाल। महू में हनी ट्रेप मामले में फंसे सेना के एक जवान अविनाश कुमार की पाकिस्तानी महिला मित्र ने उसे सेना से जुड़ी जानकारियां भेजने के बदले राशि भेजी थी। दोनों दुबई में मिलने वाले थे, लेकिन अविनाश किसी कारण से वहां नहीं जा सका था। भोपाल जिला अदालत ने अविनाश को पूछताछ के लिए 26 मई तक के पुलिस रिमांड पर एटीएस को सौंप दिया है।

बिहार के रहने वाले अविनाश को एटीएस ने गिरफ्तारी के बाद शुक्रवार को भोपाल जिला अदालत में न्यायाधीश श्यामसुंदर झा की विशेष अदालत में पेश किया। अदालत ने अविनाश को पुलिस रिमांड पर सौंप दिया है। पाकिस्तानी जानकारी लेने वाली महिला ने अविनाश को अपना नाम प्रिशा अग्रवाल बताकर दोस्ती की थी। अविनाश ने अब तक की पूछताछ में प्रिशा को दिल्ली या राजस्थान का रहने वाला बताया है। जबकि जांच एजेंसियों को उसके पाकिस्तानी होने की आशंका है। इसकी वास्तविकता जानने के लिए एटीएस द्वारा अदालत से पुलिस रिमांड मांगा गया है।

व्हाट्सएप कॉल से दोस्ती बढ़ी

सूत्रों के मुताबिक अविनाश करीब चार साल से सेना में नौकरी कर रहा है। सोशल मीडिया के माध्यम से वह महिला के संपर्क में आया था जिसने खुद को शुरुआत में राजस्थान निवासी बताया था। दोनों के बीच व्हाट्सएप कॉल के माध्यम से बातचीत होती रही और अविनाश से उसने सेना से जुड़ी जानकारियां मांगी थी। अविनाश ने उसे ये जानकारियां उपलब्ध भी कराईं।

सूत्र बताते हैं कि अविनाश पर केंद्रीय गुप्तचर एजेंसी की नजर थी। सूत्र बताते हैं कि पुलवामा के बाद बालाकोट में भारतीय एयरफोर्स की कार्रवाई के बाद भी अविनाश ने कुछ जानकारियां भेजी। गुप्तचर एजेंसी को शक है कि उसके द्वारा देश के भीतर से सेना के मूवमेंट की जानकारियां भी दी गईं। बालाकोट की कार्रवाई के बाद भी जब अविनाश ने जानकारियां पाकिस्तानी महिला मित्र को भेजी तो गुप्तचर एजेंसी ने राज्य पुलिस से यह सूचना साझा की थी। इसके बाद गुप्तचर एजेंसी ने एटीएस की मदद से कार्रवाई करते हुए अविनाश को गिरफ्तार किया। अब उससेविस्तृत पूछताछ की जा रही है।

बिटकॉइन से राशि मिलने की जांच

सूत्रों ने बताया कि गुप्तचर और मध्यप्रदेश के एटीएस की जांच में यह सामने आया कि अविनाश से राजस्थान निवासी बताकर मित्रता करने वाली महिला वास्तव में पाकिस्तानी थी। वहीं, सूत्र बताते हैं कि पाकिस्तानी महिला मित्र ने अविनाश के खाते में जो राशि भेजी थी, वह सेना के जवान के खाते में जमा भी हुई है। जांच एजेंसी यह पता करने में लगी हैं कि जानकारी देने के बदले मिलने वाली राशि का कुछ भाग बिटकॉइन से तो नहीं मिला।

क्या है बिटकॉइन

बिटकाइन एक डिजिटल मुद्रा है। यह पहली विकेन्द्रीकृत डिजिटल मुद्रा है जिसका अर्थ है कि यह किसी केंद्रीय बैंक द्वारा नहीं संचालित होती। इसे वर्चुअल मुद्रा भी कहा जा सकता है। कंप्यूटर नेटवर्किंग पर आधारित भुगतान हेतु इसे प्रचलन में लाया गया है।