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    सतपुड़ा की वादियों में मौजूद है मांसाहारी पौधा ' ड्रोसेरा '

    Published: Mon, 12 Feb 2018 09:13 PM (IST) | Updated: Wed, 14 Feb 2018 07:50 AM (IST)
    By: Editorial Team
    drosera 12 02 2018

    सतीश चौरसिया, सोहागपुर। सतपुड़ा की वादियों में वैसे तो औषधियों का भंडार है, लेकिन यहां पर कुछ ऐसी प्रजातियों के पौधे भी पाए जाते हैं, जिन्हें अक्सर लोग किताबों में पढ़ते हैं या फिर टीवी पर ही देख पाते हैं।

    वन्यप्राणियों की गणना के दौरान वनकर्मी एवं वालेटिंयर्स को सोनभद्रा नदी किनारे ड्रोसेरा नाम के मंसाहारी पौधे मिले हैं ये पौधे कीड़ों का शिकार करते हैं। इन पौधो को बारे में ज्यादातर किताबों में पढ़ा जाता है। लेकिन सतपुड़ा के प्राकृतिक पर्यटन केंद्र मढ़ई में ड्रोसेरा को देखकर सभी आश्चर्यचकित रह गए।

    क्या है ड्रोसेरा

    ड्रोसेरा एक कीटभक्षी पौधा है जो अपने भोजन की पूर्ति के लिए कीटपतंगों का शिकार करता है। सुनने में भले ही अजीब लगे कि एक पौधा जीवित कीटों का शिकार कैसे कर सकता है लेकिन यह है सच। प्रकृति ने ड्रोसेरा की रचना कुछ इस तरह की है कि वह अपने भोजन की पूर्ति कीटों से करता है।

    रेेंजर मुकेश डुडवे ने बताया कि ड्रोसेरा प्राय: नदी या तालाब के किनारे उन क्षेत्रों में पाया जाता है जहां नाईट्रोजन की कमी होती है और वहां की जलवायु शुद्ध होती है। ड्रोसेरा जमीन से नाइट्रोजन प्राप्त करने में असमर्थ होता है इसलिए वह अपने शरीर में नाइट्रोजन की पूर्ति के लिए कीट पतंगों का शिकार करता है।

    मक्खाजाली भी कहा जाता है ड्रोसेरा को

    मांसाहारी पौधे ड्रोसेरा को मक्खाजाली भी कहा जाता है। इस पौधे की गोलाई में करीब 25 पत्तियां होती है। जिसकी पत्येक पत्ती पर 200 से अधिक छोटे छोटे संवेदक बाल होते है। इन बालों की चोटी पर एक चमकीला पदार्थ होता है। जिसे कीट पतंगे मधु समझकर आकर्षित होते और पत्ते पर बैठ जाते है।

    जैसे ही कीट उस पर बैठता है और चिपक जाता है तभी पत्ती पर मौजूद बाल सक्रिय होकर मुड़ने लगते हैं और कीड़े को पकड़ना शुरू कर देते हैं। ड्रोसेरा के पत्तों पर लगे बाल जब कीट को खीचकर बीच में ले जाते हैं तब पत्ते से एक पाचक पदार्थ निकलता है। जो कीड़े के मांस को घोल देता है और पौधा उसे चूस लेता है।

    460 मांसाहारी पौधों में से 35 प्रजातियां भारत में

    जिस तरह मांसाहारी जीव होते हैं उसी तरह मांसाहारी पौधे भी होते हैं। जिन्हें मांसाहारी पादप कहा जाता है। मांसाहारी पौधों की विश्व में 400 प्रजातियां होती हैं। जिसमें से 30 प्रजातियों के पौधे भारत में पाए जाते हैं। ये ऐसे स्थानों पर पनपते हैं, जहां नाइट्रोजन का अभाव होता है।

    भारत में पाए जाने वाले मांसाहारी पौधों में ड्रोसेरा, सुंदरी का पिंजड़ा, घटपर्णी पौधे, पिंगुइकुला(बटरवर्टस),नपेंथिस (कुम्भी पादप), अर्टिकुलेरिया (ब्लेडरवटरर्स) आदि हैं। भारत में ड्रोसेरा की पिंगुइकुला और नपेथिंस प्रजाति हमारे देश में मिलती है।

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