बनखेड़ी (राजकुमार शर्मा)। सतपुडा पर्वत श्रेणी की इस पहाड़ी में बनखेड़ी से 12 किलोमीटर दूर दक्षिण दिशा में मोनेश्वर धाम में शिवरात्रि को हजारों लोग पहुंचते है। सतपुडा पर्वत श्रंखला नरसिंहपुर, होशंगाबाद और छिंदवाडा जिले की सीमाएं छूती है। बिना शासन प्रशासन की मदद से बनखेड़ी की मोनेश्वर धाम समिति इस स्थान को प्रसिद्धि दिलाने और विकसित करने का प्रयास कर रही है। यहां पहुंचने के लिए अत्यंत दुर्गम मार्ग से गुजरना पडता है। पहाड़ी के नीचे ही लोग अपने वाहन खडे करते है और लगभग 5 किलोमीटर की कठिन चढ़ाई करना पड़ती है। बड़ी संख्या में छिंदवाडा चावल पानी ग्राम से भी दर्शनों के लिए पहुंचते है।

मुख्य आकर्षण है शिव का त्रिनेत्र

सैकड़ों फीट ऊंची पहाड़ी में प्राकृतिक रूप से बना हुआ आडा शिवलिंग है। जो भगवान शिव के त्रिनेत्र के समान दिखता है। इसी त्रिनेत्र के पीछे माता पार्वती भी विराजमान है। पहली बार 2006 में मोनेश्वर धाम के संरक्षक बालमुकुंद साहू ने इसी त्रिनेत्र के दर्शन किए। उन्होंने ही बनखेड़ी में लोगों को आकर बताया। बालमुकुंद साहू बताते है कि इस धाम का वर्णन नरसिंहपुराण के 66 वें अध्याय में श्री चक्रतीर्थ के नाम से मिलता है। भक्तिकालीन युग में संत शिरोमणि मौनी बाबा ने यहां तप किया, इसलिए इसका नाम मौनेश्वर धाम है।

पांच कुंड है मीठे पानी के

पहाड़ी पर ही मीठे पानी के 5 कुंड हैं। जिनमें बारह महीने पानी रहता है। दर्शन को जाने वाले लोग इस पानी का उपयोग पीने के लिए भी करते है। इन 5 कुंडो का नामकरण भी स्थानीय समिति द्वारा कर दिया गया है। इन्हें आकाश कुंड, गंगा कुंड, नर्मदा कुंड, हनुमान कुंड और स्नान कुंड के नाम से पहचाना जाता है।

पत्थरों को पीसकर रेता बनाई फिर किया मंदिर का निर्माण

मोनेश्वर धाम की पहाड़ी में दो मंदिर बनाए गए। जिसमें एक मंदिर अधूरा है। मंदिर में भगवान शिव का परिवार विराजमान है। ईंट की जगह पहाड़ के पत्थरों को लगाया गया है। सीमेंट पहुंचाने के लिए भक्तों द्वारा पांच-पांच किलो की थैली में सीमेंट पहाड़ पर पहुंचाई। लेकिन रेत पहुंचाना कठिन कार्य था। इसलिए पहाड़ के कच्चे पत्थरों को पीसकर रेत का चूरा बनाया गया और उसे रेत के विकल्प पर उपयोग किया गया। वहीं इस वर्ष बनखेड़ी नगर और पडरई पंचायत के लोगों के सहयोग से वहां रास्ता सुगम करने के लिए सीढ़ी बनाई जा रही है। लगभग 300 सीढ़ियों का निर्माण हो चुका है।