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    आदिवासी विकासखंड में जलसंकट के आसार, पानी को लेकर मचेगा हाहाकार

    Published: Tue, 13 Mar 2018 04:10 AM (IST) | Updated: Tue, 13 Mar 2018 04:10 AM (IST)
    By: Editorial Team

    सेकंड लीड खबर पेज 16-

    आधा दर्जन पंचायतों में पानी की कमी

    पत्थरों पर बसे इलाके में तेजी से नीचे जा रहा है भू-जल

    इटारसी। नवदुनिया प्रतिनिधि

    पड़ोसी जिले बैतूल में भीषण जलसंकट के हालात पैदा होने के साथ ही आसपास के सीमावर्ती इलाके में भी पानी को लेकर हाहाकार मचने लगा है। आदिवासी विकासखंड केसला का ग्रामीण अंचल भी आने वाले दिनों में बूंद-बूंद पानी को मोहताज हो सकता है। मौजूदा हालात को देखते हुए सरकारी मशीनरी भी परेशान है और संभावित स्थितियों से निपटने के लिए काम शुरू हो गया है।

    प्रदेश में इस साल कमवर्षा की वजह से कई जिलों में भीषण जलसंकट की स्थिति निर्मित हो रही है। मार्च के पहले पखवाड़े में जैसे ही गर्मी का असर शुरू हुआ है, भूमिगत जलस्तर में तेजी से गिरावट आ रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में हालात खराब होने लगे हैं।

    लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अनुसार विकासखंड के पथरोटा, पांडरी और नागपुर कलां सबसे अधिक जल संकट से जूझते हैं। इसके अलावा पू्रफ रेंज के छीतापुरा, रांची भारना भी जलसंकट की जद में आते हैं। इन गांवों में अभी से स्थिति बिगड़ने लगी है। नागपुर कला गांव में गर्मी आते ही हैंडपंप से पीला पानी आने लगता है। जामई कला गांव में हैंडपंप भू-जल स्तर नीचे गिरने से बंद हो जाते हैं। टांगना में हैंडपंप में पानी कम आता है। यहां एक सार्वजनिक कुआं था वह भी सूख गया है।

    केसला ब्लॉक के चार गांवों में पीने के पानी का संकट पिछले सालों में गहराया था। साथ ही हैंडपंप भी सूख गए थे। कुछ से पीला पानी आने लगा था। ये चार गांव नागपुर कलां, पांडरी, छीतापुरा और पथरोटा हैं। पथरोटा में तो अभी हालात खराब होने लगे हैं। नहर बंद होने से यहां जलस्तर तेजी से नीचे की ओर जा रहा है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की माने तो यहां जलस्तर अभी 110 फीट पर चला गया है। इसी तरह से अभी सुखतवा में 70 फीट पर पानी है, लेकिन पथरीला इलाका होने से आने वाले समय में स्थिति बिगड़ सकती है। अप्रैल से यहां हालात बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है।

    सीएम का वादा अधूराः

    जिले का सबसे बड़ा केसला आदिवासी विकासखंड अभी से पानी की कमी से जूझ रहा है। दरअसल भौंरा, सुखतवा एवं बैतूल जिले के सीमावर्ती इलाके के अधिकांश गांव सतपुड़ा पर्वत श्रृंखला से लगे हुए हैं। अल्पवर्षा के कारण इस बार पहाड़ी नदियों में भी पानी गायब है। इस वजह से वाटर रिचार्जिंग भी नहीं हो सकी। दो वर्ष पूर्व मुख्यमंत्री ने सुखतवा दौरे में यहां जलाभिषेक अभियान की शुरुआत करने की मंशा जताते हुए कहा था कि आप शुरुआत करें, एक दिन मैं भी आऊंगा श्रमदान करने। न तो जल अभिषेक शुरु किया और न मुख्यमंत्री आए। पीएचई विभाग अपने 1600 हैंडपंप और 32 नल-जल योजनाओं के सहारे यहां के आदिवासियों की प्यास बुझाने का प्रयास कर रहा है।

    जल संरक्षण की परवाह नहीं:

    भूमिगत जलस्रोत दुनियाभर की चिंता का विषय है। अधिक चिंता इस बात की है कि नागरिक अब भी निश्चित हैं और पानी की जिम्मेदारी शासन और सरकार की ही है, ऐसा मानकर बेहिसाब पानी व्यर्थ बहाते हैं। जागरुकता की कमी, अशिक्षा, मनमानी और लापरवाही से ऊपर जाकर सोचने की जरूरत हैं। सरकारी भवनों, स्कूलों, पंचायत भवनों एवं गांवों में वॉटर रिर्चाजिंग के कोई प्रयास न होने से भूमिगत जलस्तर तेजी से नीचे खिसक रहा है। पहाड़ी नदियों, पोखरों का अस्तित्व भी संकट में आ गया है। बारिश के दिनों में बर्बाद होने वाले प्राकृतिक जल को सहेजने के लिए स्टॉपडेम, तालाब के प्रयास कागजों में ही हो सके हैं।

    फैक्ट फाइलः

    हैंडपंप- 1600

    बंद - 13

    नलजल योजना 32

    बंद - 04

    डिमांड - 70 नए हैंडपंप

    केसला ब्लॉक की स्थिति

    केसला ब्लाक में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के माध्यम से पेयजल के लिए 1600 हैंडपंप हैं। जिनमें से 13 जलस्तर गिरने के कारण बंद हैं। शेष में से भी ज्यादातर किसी न किसी कारण से खराब हो जाते हैं, जिनको दुरुस्त करके काम चलाया जा रहा है। इसी तरह से 32 नल-जल योजनाएं संचालित हैं। इनमें से चार बेलावाड़ा, गजपुर, छीतापुरा और कासदा रैयत में जल स्रोत सूखने के कारण बंद हो गई हैं। पीएचई विभाग ने इस वर्ष के लिए 70 नए हैंडपंप खनन की डिमांड भेजी है, इसमें कुछ आदिवासी परियोजना से और कुछ लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग से कराए जाएंगे, लेकिन भूमिगत जलस्तर गिरने से हैंडपंप भी दम तोड़ रहे हैं। हैंडपंप में आने वाली गड़बड़ियों को ठीक करने के लिए कुल 8 मैकेनिक हैं। ब्लाक में ग्रामीणों को पेयजल के लिए सारे स्रोत बनाना, सुधार आदि व्यवस्था करने का जिम्मा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग का होता है। जनपद पंचायत विशेष परिस्थिति में यह जिम्मा उठाती है। जनपद पंचायत केसला के सीईओ एसएस पठारिया के अनुसार जब हालत बिगड़ते हैं तो एसडीएम के आदेश से जनपद पंचायत को टैंकरों से संकटग्रस्त गांवों में पानी भेजना होता है, जो ग्राम पंचायतों के माध्यम से जनपद अपनी भूमिका निभाती है।

    बैतूल जिले में हाहाकारः

    इधर पड़ोसी जिले बैतूल के शहरी क्षेत्र में पेयजल के भीषण हालात निर्मित हो गए हैं। बताया गया है कि नपा के पास आने वाले 15 दिनों में पूरी आबादी के लिए पेयजल की उपलब्धता कराना मुश्किल हो रहा है। यही हालात जिले के ग्रामीण अंचलों में निर्मित हो रहे हैं।

    जलसंकट के हालात

    गर्मी शुरू होने के साथ ही कई पंचायतों में तेजी से पानी घट रहा है। अप्रैल में हालात ज्यादा गंभीर हो सकते हैं। अपने पास उपलब्ध संसाधनों से ग्रामीणों को पेयजल उपलब्ध कराने के लिए प्रयासरत हैं। इस वर्ष 70 नए हैंडपंप की अनुमति मांगी है।

    अनुराग कुमार मेहतो, सब इंजीनियर पीएचइ केसला

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    चौधरी बने होशंगाबाद के प्रभारी

    इटारसी। भारतीय जनता पार्टी पिछड़ा वर्ग मोर्चा के जिला सोशल मीडिया प्रभारी नीलेश चौधरी को होशंगाबाद नगर का प्रभारी बनाया गया है। श्री चौधरी यहां पर पिछड़ा वर्ग के संगठन को मजबूत करने के लिए काम करेंगे और विशेष रूप से प्रत्येक बूथ पर मोर्चा की टीम तैयार करेंगे। आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए जिला अध्यक्ष जयकिशोर चौधरी ने ये जिम्मेदारी उन्हें सौंपी है।

    12 आईटी नीलेश चौधरी

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