भक्ति भाव के साथ कि या गया गोवर्धन पूजन

-मां नर्मदा को लगाया 56भोग,घाट पर बनाई आकर्षक रांगोली, दर्शन को उमड़े लोग

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8एचओएस-सेठानी घाट पर अन्नकू ट उतसव,मां नर्मदा को लगाया गया 56 भोग।

8एचओएस- ग्वालटोली में गोवर्धन भगवान के सामने लोगों ने अपने बच्चों को लिटाकर मनाई अपनी परंपरा।

होशंगाबाद। मां नर्मदा के तट पर स्थित सेठानी घाट पर नित्य आरती समिति के द्वारा पूर्व वर्षों की परंपरा को ध्यान में रखते हुए अन्नकू ट उत्सव मनाया गया। इस मौके पर घाट के फर्श पर मां नर्मदा को 56 प्रकार के पकवान का नेवेैध लगाया गया। इस मौके पर सायंकाल शहर की सुप्रसिद्ध सुरवाणी संस्था के कलाकारों के द्वारा भजनों की प्रस्तुति दी गई। जिसमें पं राम परसाई के स्वर संयोजन पं रामसेवक शर्मा,आनंद नामदेव, प्रह्लाद गायकवाड़ के ताल संयोजन में कलाकार ओपी शर्मा, आरएन कानवा, वैशाली शर्मा,रेणुका जैन, वैशाली तिवारी,आकाश जैन आदित्य परसाई ने सुमधुर भजनों का गायन कि या। यहां पर बनारस की कलाकार श्रेया, तान्या जाससवाल द्वारा आकर्षक रांगोली भी सजाई गई। अन्नकू ट और गोवर्धन के साथ ही मां नर्मदा के तट की अलौकि क छटा का दर्शन करने के लिए कई श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।

गोवर्धन रहे आकर्षण का कें द्र

सेठानी घाट पर अन्नकू ट उत्सव स्थल के पास ही फर्श पर माधव दुबे के द्वारा गाय के गोबर से भगवान श्री कृष्ण के गोवर्धन धारी स्वरुप का चित्रण कि या गया। गोवर्धन को इतने आकर्षक तरीके से बनाया गया कि गोबर नजर नहीं आ रहा था। गोबर से प्रतिमा बना कर उसे विभिन्न समाग्री से सजाया गया। भगवान के इस मनोहारी बिग्रह को आकर्षक वस्त्र भी पहनाए गए। मुरली और मोर पंख भी रखा गया।

शाम को हुई मां नर्मदा और गोवर्धन की आरती

मां नर्मदा के तट पर शाम के समय नित्य आरती के सदस्यों ने हर दिन की तरह पं विनोद दुबे के आचार्यत्व में मां नर्मदा की आरती की। इस अवसर पर आरती स्थल के समीप ही बने गोवर्धन महाराज की भी सभी ने मिल कर आरती की। यहां पर शाम के समय दर्शनार्थियों का काफी भीड़ रही।

ग्वालटोली में मनाई प्राचीन परंपरा

ग्वालटोली में गोवर्धन पूजन के अवसर पर ग्वाल समाज के लोगों ने प्राचीन परंपरा का निर्वाह कि या। यहां पर गोबर से बने गोवर्धन की प्रतिमा के पास कई लोगों ने अपने बच्चों को गोर्वधन के सामने लिटाया। समाज के खेमचंद यादवेश ने बताया कि यह परंपरा द्वापर युग से चली आ रही है। भगवान श्रीकृष्ण ने जिस प्रकार गोवर्धन पर्वत को अपनी झिटी अंगुली पर धारण कर गांव के लोगों का संरक्षण कि या था उसी परंपरा के चलते समाज के लोग अपने बच्चों को गोवर्धन की शरण लिटाते हैं। इससे उनके स्वास्थ्य और संरक्षण होता है।