बैराड़ (नासिर खान)। क्षेत्र में उद्योग की संभावनाएं विकसित करने के प्रशासन ने राज्य सरकार को प्रस्ताव बनाकर भेजा था, जिसे सरकार ने वर्ष 2013 में स्वीकृति कर लिया था इसके लिए प्रशासन ने बैराड़ में नवीन कृषि उपज मंडी के पास पोहरी-मोहना रोड पर 405 बीघा जमीन आरक्षित की थी। इसके बाद राजस्व विभाग ने जमीन का सीमांकन करवा कर उद्योग विभाग को आवंटन कर दिया था, लेकिन 5 वर्ष बीत जाने के बाद भी न तो सरकार और न ही उद्योग विभाग बैराड़ में एक भी उद्योग लगा पाया।

विभाग के लिए आरक्षित की गई 405 बीघा जमीन को दबंगों ने कब्जा कर बेच दिया है। इस जमीन को वर्ष 2013 में उद्योग विभाग को आवंटित किया गया था, जिस पर लघु और कुटीर उद्योग लगाने की योजना थी। उद्योग लगने की बजाय गरीब लोगों ने दबंगों से जमीन खरीदकर 600 से अधिक कच्चे-पक्के मकान बन गए हैं। इससे अब उद्योग लगने की उम्मीद कम होती जा रही है। हालांकि पूर्व में शिकायत के बाद तत्कालीन एसडीएम के निर्देश पर तहसीलदार ने यहां से अतिक्रमण हटाने के लिए सीमांकन कर दिया था, लेकिन अवैध रूप से रह रहे इन लोगों को अभी तक नोटिस जारी नहीं किए गए हैं। यही वजह है कि यहां पिछले 5 साल से दिनों-दिन मकानों की तादात बढ़ती जा रही है, जबकि, यहां रह रहे गरीबों का कहना है, हमने गांव की जमीन बेचकर यहां घर बनाने के लिए प्लॉट खरीदा है, अब हम नहीं छोड़ेंगे।

ये थी योजना

पोहरी क्षेत्र में उद्योग की संभावनाएं विकसित करने के लिए प्रशासन ने प्रस्ताव तैयार किया था। इस प्रस्ताव को 5 साल पहले प्रदेश शासन को भेजा गया था। प्रस्ताव से पहले प्रशासन ने कालामढ़ पंचायत में पोहरी-मोहना रोड पर स्थित 405 बीघा 11 विस्वा जमीन आरक्षित की थी। राजस्व विभाग की इस जमीन को अतिक्रमण से बचाने के लिए यहां उद्योग लगाने की अनुशंसा की गई थी। इसके बाद इस जमीन को उद्योग विभाग को आवंटित कर दिया गया था, लेकिन यहां पिछले 5 साल में एक भी उद्योग नहीं लगा, जबकि इस दौरान उद्योग विभाग की जमीन पर मकानों की संख्या 400 से 600 पर पहुंच गई है।

जमीन पर उद्योग लगने से पहले ही बैराड़ क्षेत्र के दबंगों ने पंचायत की जमीन पर कब्जा कर बेच दिया। पोहरी-मोहना रोड पर सर्वे नं. 898/3/3 की 405 बीघा जमीन पर जिन लोगों ने अपने आशियाने बनाए हैं वे ज्यादातर अनपढ़ और मजदूर हैं। इनमें से ज्यादातर अपर ककेटो डैम के विस्थापित लोग हैं, जो कि मजदूरी की आस में यहां मकान बनाकर रहने लगे हैं। इसके अलावा बैराड़ में मूंगफली का काम अच्छा होने की वजह से आसपास के गांव के लोग भी अच्छी मजदूरी मिलने की आस में इस सरकारी जमीन पर अपना आशियाना तानकर निवास कर रहे हैं। इनकी तादाद अब 7 सैकड़ा तक पहुंच चुकी है। एसडीएम पोहरी मुकेश सिंह ने कहा कि आपके द्वारा जानकारी दी गई है। मामले में दिखवाकर नियम के तहत कार्रवाई की जाएगी।

अतिक्रमण कर बेच दी जमीन

कालामढ़ पंचायत में स्थित इस जमीन को स्थानीय दबंगों ने अतिक्रमण कर बेच दिया है।

- इस जमीन पर क्षेत्र के लोगों ने 600 से अधिक कच्चे-पक्के मकान बना लिए हैं।

- जमीन पर रह रहे ज्यादातर लोग अपर ककेटो बांध के विस्थापित और आसपास के गांवों से जमीन बेचकर

आए गरीब लोग हैं।

- दबंगों ने यहां की जमीन को बिना किसी कागजी आधार के गरीबों को 10 हजार रुपए से लेकर 1 लाख

रुपए तक में बेची है।

- पूर्व में अतिक्रमण के विरोध में चल रही मुहिम के तहत सीमांकन कर दिया गया था, लेकिन अभी तक इन

लोगों को नोटिस जारी नहीं किए गए हैं।

यह है योजना

- जिले के अति पिछड़े क्षेत्रों में शामिल बैराड़ में लघु और कुटीर उद्योग लगाए जाएंगे।

- यहां के 1 हजार से अधिक आदिवासी और बेरोजगार युवाओं को रोजगार मिलेगा।

- जमीन पर कृषि, आयुर्वेदिक, दवाएं और पत्थर पर आधारित उद्योग लगाए जा सकते हैं।

- उद्योग लगने से यहां के आर्थिक विकास भी तेजी आएगी। किसानों को भी लाभ मिलेगा।