इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि । सरकारी मेडिकल कॉलेज में छात्रों पर पढ़ाई और काम का दवाब रहता है, लेकिन निजी मेडिकल कॉलेजों में स्थिति बिलकुल उलट है। यहां काम का नहीं बल्कि हर साल बढ़ती फीस और पेनल्टी का दबाव रहता है। एक दिन अनुपस्थित हो जाओ तो प्रबंधन 10 हजार रुपए तक पेनल्टी लगा देता है। इस मनमानी के आगे छात्र भी बेबस हैं। परीक्षा के ठीक पहले छात्रों को पता चलता है कि उन पर लाखों रुपए पेनल्टी के बकाया हैं। इसकी वसूली के लिए इतना दबाव बनाया जाता है कि छात्र आत्महत्या जैसे कदम तक उठाने को मजबूर हो जाते हैं।

यह कहना है इंदौर के इंडेक्स मेडिकल कॉलेज के छात्रों का। उन्होंने बताया कि उनके पास शिकायत करने का विकल्प भी नहीं होता। छात्रों के आवाज उठाते ही प्रबंधन दमन की नीति पर उतर आता है। गौरतलब है कि इंडेक्स मेडिकल कॉलेज की पीजी फाइनल ईयर की छात्रा ने रविवार देर रात एनेस्थीसिया का ओवर डोज लेकर आत्महत्या कर ली थी।

'नईदुनिया' ने मंगलवार को इस मामले में पड़ताल की तो कई खुलासे हुए। छात्रों ने बताया कि प्रवेश देते वक्त उन्हें जो फीस बताई गई थी उसमें कॉलेज ने बढ़ोतरी कर दी। फीस की वसूली के लिए कॉलेज इतना दबाव बनाता है कि स्टूडेंट अवसाद में आ जाते हैं। ऐसी स्थिति में उनके सामने आत्महत्या जैसे कदम उठाने के अलावा कोई चारा नहीं रहता।

आरोप गलत हैं -

आरोप पूरी तरह से गलत हैं। फीस बढ़ाना कॉलेज के हाथ में नहीं होता। यह फीस रेग्युलेटरी कमेटी तय करती है। हर फीस की रसीद दी जाती है। किसी स्टूडेंट के पास तय फीस से ज्यादा की रसीद हो तो शिकायत कर सकता है। हमने कभी 10 हजार रुपए पेनल्टी नहीं लगाई।

आरसी यादव, प्रबंधक, इंडेक्स मेडिकल कॉलेज