इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। नगर निगम ने शहर की 102 और अवैध कॉलोनियों को वैध घोषित करते हुए नगर पालिक अधिनियम की धारा 15 (क) के तहत उनका रजिस्ट्रीकरण कर दिया है। इसी के साथ उक्त कॉलोनियों के नियमितीकरण की प्रक्रिया शुरू हो गई है।

चुनावी साल में अवैध कॉलोनियों में रहने वाले लोगों को बड़ी राहत देते हुए सरकार ने नगरीय निकायों को कॉलोनी नियमितीकरण की प्रक्रिया शुरू करने के आदेश दिए थे। शासन के आदेश पर निगम ने सबसे पहले 572 कॉलोनियों के नियमितीकरण का प्राइमरी नोटिफिकेशन किया था, जिनमें से 101 कॉलोनियों का रजिस्ट्रीकरण पहले ही हो चुका है। दूसरे चरण में 102 कॉलोनियों के लिए यही प्रक्रिया की गई है।

निगम की कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा कॉलोनियों के नियमितीकरण की प्रक्रिया जल्द शुरू हो जाए ताकि चुनावी साल में इसका फायदा सरकार को मिले। दूसरे चरण में जिन कॉलोनियों को सूचीबद्ध किया गया है, अब उनका लेआउट बनाकर इस्टिमेट तैयार किए जाएंगे। इस दौरान रहवासी संघों और कॉलोनाइजरों से बात कर उनसे विकास कार्यों को लेकर अंशदान देने के लिए सहमति बनाई जाएगी।

इस तरह वहन करेंगे विकास शुल्क

अपर आयुक्त संदीप सोनी ने बताया कि शासन द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुरूप सूचीबद्ध हुई जिन अवैध कॉलोनियों में एलआईजी श्रेणी के 70 प्रतिशत से ज्यादा मकान हैं, वहां विकास शुल्क की राशि का 20 प्रतिशत रहवासी-कॉलोनाइजर देंगे, जबकि जिन अवैध कॉलोनियों में एलआईजी श्रेणी के मकान 70 प्रतिशत से कम हैं, वहां निगम और रहवासी-कॉलोनाइजर मिलकर 50-50 प्रतिशत विकास शुल्क वहन करेंगे।

अन्य कॉलोनियां भी होंगी वैध

उपायुक्त ने साफ किया कि विकास शुल्क में केवल स्टॉर्म वाटर लाइन और रोड बनाने का शुल्क शामिल रहेगा। ड्रेनेज, पानी और लाइट आदि का खर्च निगम खुद करेगा और उसे विकास शुल्क में नहीं जोड़ा जाएगा। सोनी ने बताया कि जैसे-जैसे प्रक्रिया पूरी होती जाएगी, वैसे-वैसे निगम अन्य कॉलोनियों के नियमितीकरण की प्रक्रिया भी शुरू करेगा।