इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। चाचा नेहरू बाल चिकित्सालय में 17 महीने की अतिकुपोषण का शिकार बच्ची रिमझिम का इलाज चल रहा है। चार दिन में उसका वजन लगभग 400 ग्राम बढ़ा है। डॉक्टरों के अनुसार यदि कुछ दिन और इलाज नहीं होता तो बच्ची की मौत हो सकती थी। माता-पिता ने पहले भी इस बच्ची को एनआरसी (पोषण पुनर्वास केंद्र) में भर्ती कराया था, लेकिन 14 दिन इलाज कराने के बाद उसकी छुट्टी कर दी गई थी।

पिता का कहना है कि डॉक्टरों ने यह तक कह दिया था कि बच्ची कुछ दिन की मेहमान है, वह बच नहीं पाएगी। इसके बाद उन्होंने निजी अस्पताल में भी इलाज कराया लेकिन आर्थिक स्थिति सही नहीं होने से पूरा इलाज नहीं करा सके। वहीं एनसारसी में डॉक्टरों द्वारा कही गई बच्ची की मरने की बात के कारण वे दोबारा चाचा नेहरू अस्पताल नहीं पहुंचे, जिससे बच्ची की हालत और बिगड़ गई।

बीते मंगलवार को एलआईजी थाने के पीछे सोमनाथ की नई चाल में घूमते हुए चाइल्ड लाइन को कुपोषित हालत में बच्ची रिमझिम मिली थी। उसे चाचा नेहरू बाल चिकित्सालय में भर्ती कराया गया था। उसकी हालत इतनी ज्यादा नाजुक थी कि कुछ दिन और इलाज नहीं मिलता तो उसकी मौत हो जाती। 2 अक्टूबर को 2018 को उसे 13 दिन के लिए भर्ती किया गया था। इसके बाद 14 अक्टूबर को उसकी छुट्टी कर दी गई थी। इसके बाद न तो एनआरसी ने फॉलोअप लिया, न ही आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और एएनएम ने बच्ची के हाल जाने।

अधिकारी आंकड़ों पर निर्भर

महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों के पास संभाग सहित पूरे जिले के आंकड़े आते हैं। प्रत्येक कुपोषित व अतिकुपोषित बच्चे की भी जानकारी इनके पास होती है। इसके साथ ही एनआरसी में भर्ती होने वालों के भी दस्तावेज होते हैं। संभाग व जिला कार्यक्रम अधिकारी की भी जिम्मेदारी है कि वे मौके पर जाकर बच्चों की जानकारी लें, लेकिन ऐसा नहीं होता। यही कारण है कि रिमझिम जैसे कई बच्चे अब भी महिला एवं बाल विकास विभाग के आंकड़ों में शामिल नहीं हैं।

महू में लगाया शिविर, 22 बच्चों को आज करेंगे भर्ती

महू में महिला एवं बाल विकास विभाग ने कुपोषित बच्चों की जांच के लिए शनिवार को शिविर लगाया था। इसमें लगभग 37 बच्चे मिले थे। इनमें से 22 बच्चों को सोमवार को एनआरसी में भर्ती किया जाएगा। इन्हें 14 दिन भर्ती करने के बाद उनका लगातार फॉलोअप कर पूरी तरह स्वस्थ किया जाएगा।