इंदौर। आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास द्वारा शनिवार 22 सितंबर को रविंद्र नाट्यगृह में प्रेरणा संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत आदि शंकराचार्य के समक्ष दीप प्रज्वलन और विनया राजन और सैंधवी. एस. द्वारा आचार्य शंकराचार्य के विरचित स्त्रोतों के गायन से हुई। इसके बाद संस्कृति मंत्रालय के अपर मुख्य सचिव और आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता के न्यासी सचिव श्री मनोज श्रीवास्तव ने कहा कि, 'कुछ समय पहले मध्यप्रदेश सरकार ने एकात्म यात्रा निकाली थी, जिसका उद्देश्य आचार्य शंकाराचार्य के वेदांत दर्शन को जन-जन तक पहुंचाना था।

मध्यप्रदेश की भूमि पुण्य है क्योंकि यहां सतयुग में नरसिंहपुर में तप किया तो त्रेतायुग में श्रीराम चित्रकूट आए, द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण ने उज्जैन के सांदिपनी आश्रम से शिक्षा ग्रहण की और कलयुग में आदि शंकाराचार्य को उनके गुरु ओंकारेश्वर में मिले यानी हर युग में यह धरती शिक्षा का केंद्र बिंदु रही है। शंकर बाल प्रतिभा थे। शंकराचार्य जी के योग्यता से बिताए जीवन को वर्षों से नहीं नापना चाहिए। उन्होंने बहुत कम उम्र में ही संन्यास लिया और 32 साल की उम्र में देह त्याग दी। हमें ऐसे विद्वान शंकराचार्य जी के अद्वैत वेदांत दर्शन की शिक्षा को दुनिया के कोने-कोने तक पहुंचाना चाहिए।

कार्यक्रम में प्रख्यात आध्यात्मिक गुरु गोविंद देव गिरि जी ने कहा कि, 'यदि आप इतिहास या भूगोल का अध्ययन करेंगे तो आदि शंकराचार्य जैसे महान व्यक्ति इस दुनिया में बहुत जन्म लेते हैं। उन्होंने अपनी शिक्षा और दीक्षा मध्यप्रदेश में ही अर्जित की और उनके गुरु उन्हें ओंकारेश्वर यानी मध्यप्रदेश में ही मिले। आप देखेंगे कि हर जगह संघर्ष है। उस समय भी था जब शंकराचार्य जन्में थे, तब लोगों के बीच अध्यात्म के बारे में जितनी भी आशंकाएं थीं, उन्हें तर्क के जरिए सिद्ध किया था।

उन्होंने वेदों और उपनिषदों के मत से अद्वैत वेदांत दर्शन की नींव रखी जो अद्वैत की बात करती हैं। अद्वैत यानी हम दो नहीं हैं। सारा संसार अद्वैत है, जो द्वैत नहीं है। इसके भीतर एक ही चेतना है। अद्वैत को समझने के लिए एक सरल उदाहरण यह है कि यदि हम किसी को कांटा चुभोते हैं तो दर्द आपको भी होगा और कांटे को भी कांटे और आपके दर्द को समझना ही अद्वैत है। प्लेटो ने कहा है कि कुछ लोग संसार में खरीदने आते हैं बेचने आते हैं, लेकिन एक तत्ववेत्ता लोगों को विचार देते हैं। जो देश और संस्कृति का निर्माण करते हैं। आज के समय में विज्ञान को हर स्टेप्स लेने के लिए भारत की ओर देखना होगा।

भारतीय प्रबंध संस्थान बेंगलुरु के प्रोफेसर डॉ. बी. महादेवन, आदि शंकराचार्य जी ने अद्वैत वेदांत सिद्धांत देकर उन्हें अद्वैत यानी हम सब एक हैं पथ पर अग्रसर रहने की सीख दी है। आप जिंदगी में उन्नति तभी कर सकते हैं, जब आप सभी को समान समझेंगे। यह जरूरी है क्योंकि हमारे वेद-उपनिषद यही बताते हैं। शंकराचार्य जी जीव जगत में रहकर कैसे अपने जीवन को बेहतर बना सकते हैं, अद्वैत वेदांत में इन्हीं बातों को बताया है। वह आपसी द्वैष, ऊंच-नीच, जातिवाद को खत्म करने की बात करते हैं।

उन्होंने लोगों की वैचारिक उन्नति में वृद्धि करने के लिए वेद-उपनिषद के सार को अद्वैत वेदांत के जरिए बहुत ही सरल तरह से बताया है। इसके साथ ही कार्यक्रम विख्यात कर्नाटक संगीत की गायिका विनया राजन एवं सैंधवी. एस. ने आचार्य शंकर द्वारा विरचित स्त्रोतों का गायन किया। यह जानकारी डॉ. शैलेंद्र मिश्र ने दी। वे वर्तमान में सहायक संचालक, संस्कृति सह प्रभारी अधिकारी हैं एवं मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग, भोपाल के अंतर्गत आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास से जुड़े हैं।

बच्चों ने बनाईं आदि शंकाराचार्य की सुंदर पेंटिंग

आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास द्वारा आयोजित प्रेरणा संवाद कार्यक्रम के अतंरगत शनिवार 22 सितंबर को रविंद्र नाट्यगृह में शासकीय ललित कला संस्थान स्कीम न. 78 के विद्यार्थियों ने आचार्य शंकराचार्य के जीवन से जुड़े कई प्रसंगों को अपनी पेंटिंग्स बनाईं।

सेंधवा के मुकेश विश्वकर्मा ने शंकराचार्य जी के सुंदर पोर्टेट बनाया, उन्होंने पेंटिंग के जरिए आदि शंकाराचार्य के छबि का सुंदर पोर्टेट बनाया। बाल प्रतिभा के धनी मुकेश ने पेंटिंग बनाने की शुरुआत 7 वर्ष की अल्प आयु से की। वह बताते हैं कि बचपन से ही वह आदि शंकराचार्य जी के बारे में पढ़ते हैं और उनकी जो छबि उनके मन में बनी उसे उन्होंने अपने रंगो के जरिए बयां किया है।

इंदौर के अभिषेक वर्मा ने रंगोली बनाई जहां उन्होंने काले और सफेद रंग के मिश्रण से शंकराचार्य के चेहरे की आभा को प्रदर्शित किया। प्रेम शंकर कुशवाह सीहोर से हैं वह बताते हैं कि आदि शंकराचार्य की पेंटिंग बनाने के बाद उन्हें ये अनुभव हुआ कि वह उनके बारे में और शंकराचार्य के अद्वैत वेदांत दर्शन के बारे में अध्ययन की ख्वाहिश रखते हैं।

तो वहीं, क्ले आर्ट के जरिए संस्थान के 6 बच्चों द्वारा सुंदर पेंटिंग बनाई गई। दिव्यांशी, सलोनी, मीना, ज्योति, मयंक और आदित्य ने इसे साकार रूप देते हुए आदि शंकाराचार्य की जीवनी के विविध प्रकल्पों को क्ले आर्ट के जरिए बनाईं।

वहीं, संस्थान के प्रथम वर्ष के छात्र अभिषेक चारकोल से आदि शंकराचार्य का सुंदर चित्र बनाया। भूमिका शर्मा और हर्षा राजपूत ने वॉटर कलर, मोना शर्मा ने पेंसिल से ग्राफिक पेटिंग बनाया। रुपाली यादव और रिव्या बकुत्रा ने भी आदि शंकाराचार्य की पेंटिंग को बनाया।