रामकृष्ण मुले, इंदौर नईदुनिया। 16 साल बाद एक बार फिर स्वयं सिद्ध मुहूर्त 'अक्षय तृतीया' पर चार बड़े ग्रह अपनी उच्च राशि में होंगे। यह चार ग्रह सूर्य, शुक्र, चंद्र और राहु मिलकर खरीदारी और मांगलिक कार्य के लिए शुभ संयोग बनाएंगे। इस दिन दिवस पर्यंत तृतीया तिथि रहेगी। साथ ही भगवान परशुराम की जयंती भी हर्षोल्लास से मनाई जाएगी। ज्योर्तिविदें के मुताबिक इस दिन मत-मतांतर के साथ बिना मुहूर्त के भी विवाह होंगे।

ज्योर्तिविद् पं. सोमेश्वर जोशी ने बताया कि इस वर्ष सभी प्रकार के कार्यों के लिए अबूझ मुहूर्त और स्नान, दान की पावन तिथि वैशाख शुक्ल पक्ष तृतीया यानी अक्षय तृतीया 7 मई को होगी। तृतीया तिथि इस दिन सुबह 3 बजकर 17 मिनट से लगेगी और दिवस पर्यंत रहेगी। रोहिणी नक्षत्र शाम 4.26 तक और वृष का चंद्रमा भी रहेगा। हिंदू पंचांग गणना के अनुसार 16 साल बाद अक्षय तृतीया पर चार बड़े ग्रहों का शुभ संयोग बन रहा है। ऐसा योग बेहद दुर्लभ होता है। इससे पहले यह संयोग वर्ष 2003 में बना था।

पं. सुमित रावल के अनुसार अक्षय तृतीया पर चार बड़े ग्रह सूर्य, शुक्र, चंद्र और राहू अपनी उच्च राशि में होंगे। इसे बेहद शुभ माना गया है। इसके साथ ही कई अन्य शुभ संयोग भी आखातीज के दिन बन रहे हैं। इस बार रवि, अतिगण्ड योग और राज योग भी रहेंगे। जिनकी राशि से इन दिनों कोई मुहूर्त नहीं हो वे अक्षय तृतीया पर विवाह व शुभ कार्य सकते हैं। न केवल मांगलिक कार्य में अपितु किसी भी वस्तु की खरीदारी भी शुभ रहेगी।

इसलिए खास : अक्षय फल प्रदान करती अक्षय तृतीया, रखते जल भरे मटके

- मान्यता है कि अक्षय तृतीय पर किया गया स्नान, दान, जप, हवन आदि करने पर इसका अक्षय फल मिलता है।

- इस दिन अपने पूर्वजों की याद में ठंडे जल से भरे मटके प्याऊ में रखवाने और शीतल चीजों के दान का विशेष महत्व बताया गया है।

- आखातीज के दिन ही हिंदुओं के पवित्र चारधाम तीर्थयात्रा के बद्रीनाथ और केदारनाथ के कपाट भी खुलेंगे।

- माना जाता है कि इस दिन ही सतयुग और त्रेता युग का प्रारंभ हुआ था। इस दिन भगवान परशुराम का अवतरण भी हुआ था।

- इस दिन भगवान गणेशजी एवं माता लक्ष्मी के पूजन का भी विधान है। कुछ लोग तो इस दिन महालक्ष्मी मंदिर में जाकर धन प्राप्ति की कामना से चारों दिशाओं में सिक्के उछालने की परंपरा भी निभाते हैं।