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    टीमवर्क से संभव हुए दो साल में 30 ऑर्गन डोनेशन : संजय दुबे

    Published: Sun, 14 Jan 2018 12:26 PM (IST) | Updated: Sun, 14 Jan 2018 12:29 PM (IST)
    By: Editorial Team
    sanjay dubey indore 2018114 122911 14 01 2018

    इंदौर, नईदुनिया रिपोर्टर। जिस तरह इंदौर सबसे स्वच्छ शहर के रूप में देश में जाना जा रहा है, उसी तरह ऑर्गेन डोनेशन में भी शहर ने अपनी अलग पहचान बनाई है। मेट्रो शहरों के बाद इंदौर एकमात्र शहर है, जहां लिवर और हार्ट ट्रांसप्लांटेशन की सुविधा उपलब्ध है, वो भी बड़े शहरों से काफी कम कीमत पर। पिछले दो सालों में शहर में 30 ऑर्गेन डोनेशन हुए हैं। 12 हजार से अधिक लोगों ने ऑर्गेन डोनेशन की शपथ ली है। हमारे यहां से दिल्ली, मुंबई जैसे शहरों को ऑर्गेन उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

    यह बात कमिश्नर संजय दुबे ने शनिवार को फिक्की फ्लो द्वारा 'लाइफ बियॉन्ड लाइफ' विषय पर चर्चा के दौरान कही। उन्होंने कहा कि ऑर्गेन डोनेशन में डोनर की फैमिली, डॉक्टर्स, हॉस्पिटल, पुलिस, एयरपोर्ट अथॉरिटी सभी का योगदान होता है। पूरी टीम के सहयोग से ही मात्र चार घंटे में ऑर्गेन ट्रांसप्लांटेशन संभव हो पाता है।

    दुबे ने बताया कि किस तरह से उन्होंने 2014 में बनाई गई अंगदान सोसायटी द्वारा ऑर्गेन डोनेशन की प्रक्रिया को सरल बनाया। उन्होंने जानकारी दी कि सोसायटी के एक्टिव पार्टिसिपेशन के चलते ही भोपाल की जगह इंदौर में स्टेट ऑर्गेन एंड टिशु ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन बनाया गया है। इसके माध्यम से पूरे प्रदेश में ऑर्गेन ट्रांसप्लांटेशन की प्रक्रिया को को-ऑर्डिनेट किया जाता है।

    इसके साथ ही दुबे ने ऑर्गेन डोनेशन की पूरी प्रक्रिया की भी विस्तार से जानकारी दी, साथ ही लोगों द्वारा पूछे गए सवालों के जवाब भी दिए।

    प्रश्न: कई बार सोशल मीडिया, वाट्सएप द्वारा ऑर्गेन डोनेशन की सूचना आती है। इसकी सत्यता की परख कैसे की जाए?

    उत्तर: सारी जानकारी का रिकॉर्ड रखा जाता है। हर ऑर्गेन डोनेशन की सूचना नेशनल ऑर्गेन एंड टिशु ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन के पास होती है।

    प्रश्न: जिन ऑर्गेन को ट्रांसप्लांट किया जाता है, क्या उनका डोनर और रिसीपिएंट के साथ मैचिंग भी की जाती है?

    उत्तर: ऑर्गेन ट्रांसप्लांट के पहले मेडिकल मैचिंग की पूरी प्रक्रिया होती है। इसमें ब्लड ग्रुप मैचिंग के अलावा यह भी देखा जाता है कि डोनर को किसी तरह का कोई इंफेक्शन तो नहीं है। बायोप्सी और कई मेडिकल टेस्ट कराए जाते हैं।

    प्रश्न: कुछ धर्मों में ऑर्गेन डोनेशन को सही नहीं माना जाता?

    उत्तर: कोई भी धर्म यह नहीं कहता कि किसी को जिंदगी न दी जाए। हम अपने स्वार्थ के चलते इस तरह की बातें सोच लेते हैं।

    प्रश्न: लाइफ डोनेशन और डोनेशन ऑफ्टर डेथ में क्या अंतर है?

    उत्तर: लाइफ डोनेशन सिर्फ किडनी और लिवर का हो सकता है। इसमें आदमी के जिंदा रहते हुए ही ऑर्गेन डोनेट किए जाते हैं। डोनेशन ऑफ्टर डेथ में ब्रेन डेथ घोषित करने के बाद हार्ट, आंखें आदि डोनेट किए जाते हैं।

    प्रश्न- ऑर्गेन डोनेशन में किसे प्राथमिकता दी जाती है?

    उत्तर: सबसे पहले इंदौर के रिसीपिएंट को प्राथमिकता दी जाती है, इसके बाद प्रदेश के रिसीपिएंट और फिर वेस्टर्न रीजन और फिर देश के अन्य भागों को वरीयता दी जाती है।

    कैसे बनाया ऑर्गेन डोनेशन आसान

    - प्राइवेट हॉस्पिटल्स में सरकारी डॉक्टरों द्वारा पोस्टमार्टम की सुविधा।

    - पूरी प्रक्रिया जल्दी निपटाने के उद्देश्य से एक ही साइन से होती कार्यवाही।

    - कमर्शियल फ्लाइट से ऑर्गेन ले जाने की व्यवस्था जिससे खर्चा कम होता है।

    - हॉस्पिटल, एनजीओ, प्रशासन, पुलिस, सरकार सभी के बीच बेहतर समन्वय।

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