इंदौर। पांच दिन पहले अपहृत बीएससी छात्र शुक्रवार को जिंदा मिला। बदमाशों ने भारी पत्थरों से उसका सिर कुचलकर 500 फीट गहरी खाई में फेंक दिया था। उसके हाथ-पैर बंधे थे और मुंह पर टैप चिपका हुआ था। आरोपियों ने हत्या कबूल ली थी इसलिए पुलिस और परिजन उसका शव ढूंढने गए। जब शव निकालने के लिए लोग रस्सी से खाई में उतरे तो छात्र की सांस चलती मिली। उसे बॉम्बे हॉस्पिटल में भर्ती किया गया है।

शाहगढ़ (सागर) निवासी स्कूल संचालक मोहित भल्ला का 20 वर्षीय बेटा मृदुल उर्फ मनु क्लर्क कॉलोनी (परदेशीपुरा) में साथी सौरभ सेन के साथ किराये के मकान में रहता है। 7 जनवरी को वह लापता हो गया था।

पुलिस ने कॉल डिटेल व सीसीटीवी फुटेज के आधार पर गुरुवार सुबह आरोपी आकाश रत्नाकर निवासी नौलखा, रोहित उर्फ पीयूष परेता निवासी कुशवाह श्रीनगर और विजय परमार निवासी राजदार गांव को गिरफ्तार किया। पूछताछ में आकाश ने अपहरण व हत्या कबूल ली।

हत्या का कारण उसने बताया कि वह कॉलोनी में रहने वाली बीएससी की छात्रा से 4 साल से प्रेम करता है। शक था कि मृदुल के कारण प्रेमिका दूरी बना रही है। दोनों रात 12 से 3 बजे तक ऑनलाइन चैटिंग करते थे इसलिए साथियों की मदद से हत्या का षड्यंत्र रचा और उसे 7 जनवरी को भाई की कार (एमपी 09 सीयू 5956) में अगवा कर जंगल में ले गए।

आरोपी बोले जिंदा नहीं है छात्र

एएसपी प्रशांत चौबे के मुताबिक आरोपी आकाश ने कबूला कि मृदुल को बंधक बनाकर कार में पाटनीपुरा, पलासिया से बायपास पहुंचा था। विजय ने आकाश से कहा कंपेल, खुड़ैल व पेड़मी में सागवान के घने जंगल हैं। उसकी हत्या कर शव ठिकाने लगा देंगे।

दोपहर करीब 3 बजे तीनों पेडमी-उदय नगर रोड स्थित मुआरा घाट पहुंच गए। उन्होंने मृदुल के हाथ-पैर बांधे और मुंह पर टैप चिपकाया। कार से उतारकर पैदल सुनसान जगह ले गए। उसके सिर पर भारी पत्थरों से वार किए। काफी देर तक हलचल नहीं होने पर मरा समझ उसे खाई में धकेल दिया। वह करीब 500 फीट नीचे जा गिरा। पिता मोहित के मुताबिक वह बेटे के जिंदा होने की उम्मीद खो चुके थे। उन्होंने रिश्तेदारों को भी बुला लिया था। सुबह वह जिंदा मिला।

पुलिस ने धमकाकर लौटा दिया था, पिता ने खुद ढूंढे सुराग

छात्र के अपहरण में परदेशीपुरा पुलिस की लापरवाही सामने आई है। लापता होने के बाद रूम पार्टनर सौरभ साथी बृजेश और मनीष खत्री के साथ रिपोर्ट लिखाने गया था। पुलिस ने फटकार लगाकर रवाना कर दिया। दो दिन बाद पिता सागर से इंदौर पहुंचे और गुमशुदगी दर्ज करवाई। उन्होंने मृदुल के दोस्तों की मदद से तलाशना शुरू किया।

क्लर्क कॉलोनी, परदेशीपुरा व बजरंग नगर क्षेत्र में छानबीन की। एक सैलून संचालक ने फोटो देख बताया कि इस लड़के को सफेद कार से अगवा किया गया है। वह बचाओ-बचाओ चिल्लाते हुए जा रहा था। पिता ने वहां के सीसीटीवी कैमरे खंगाले तो कार दिखाई दी। उन्होंने बड़े अफसरों को इसके बारे में बताया। पुलिस तीन दिन बाद गंभीर हुई और चौराहों पर लगे आरएलवीडी कैमरे के फुटेज जांचे।

अपराधियों की तरह रचा षड्यंत्र

टीआई राजीव त्रिपाठी के मुताबिक आकाश महिला डॉक्टर की कार चलाता है। पिता फूल बेचता है। उसने प्रोफेशनल अपराधियों की तरह घटना को अंजाम दिया। वह सुबह कार लेकर क्लर्क कॉलोनी पहुंचा। रास्ते में दूध बांटने वाले राकेश उर्फ मोनू यादव (बाणगंगा) से मोबाइल मांगा और मृदुल को कॉल किया।

उसने कहा कि लड़की (छात्रा) के चाचा कुछ बात करना चाहते हैं। जैसे ही मृदुल रूम से बाहर आया, उसे कार में बैठा लिया। पुलिस के मुताबिक घटना स्थल के समीप एक जिम से भी पुलिस को कार की जानकारी मिली थी। आरोपी रोहित फेब्रिकेशन फिटिंग और विजय लाइट फिटिंग का काम करता है। पुलिस ने कार और मौके से रस्सी, टैप व खून से सने पत्थर बरामद किए है।