इंदौर। भय्यू महाराज बुधवार दोपहर पंचतत्व में विलीन हो गए। मप्र के इंदौर में बापट चौराहा स्थित सूर्योदय आश्रम से मुक्तिधाम का सफर करीब पौन घंटे में तय हुआ। सड़क के दोनों तरफ हजारों लोगों ने नम आंखों से महाराज को अंतिम विदाई दी।

स्कीम 74 स्थित बंगले 'शिवनेरी" से उनका शव उसी शव वाहन से आश्रम लाया गया जो उन्होंने लोगों की सुविधा के लिए तैयार करवाया था। यह वाहन आश्रम में ही रखा रहता था। अंतिम यात्रा में महाराष्ट्र से जुड़े केंद्रीय मंत्री रामदास अाठवले और महाराष्ट्र सरकार की मंत्री पंकजा मुंडे शामिल हुईं। प्रदेश से लेकर केंद्र तक की राजनीति में खासा दखल रखने के बावजूद उन्हें श्रद्धांजलि देने मध्य प्रदेश सरकार का कोई मंत्री नहीं पहुंचा, न ही राजकीय सम्मान के साथ उन्हें विदाई दी गई।

बुधवार सुबह करीब 8.30 बजे भय्यू महाराज का पार्थिव शरीर बॉम्बे अस्पताल से उनके निवास 'शिवनेरी" लाया गया। इसे तीन मंजिला बंगले की तल मंजिल पर बने कमरे में रखा गया। केंद्रीय मंत्री अाठवले ने यहीं उनके अंतिम दर्शन किए। इस दौरान महाराज की पत्नी डॉ. आयुषी, बेटी कुहू, उनकी मां सहित कई परिजन मौजूद थे।

सुबह करीब 10 बजे अंतिम यात्रा शिवनेरी से सूर्योदय आश्रम के लिए निकली। करीब 400 मीटर का सफर भक्तों ने महाराज के शव को कांधे पर रखकर तय किया। इसके आगे शव को आश्रम के शव वाहन से ले जाया गया। सूर्योदय आश्रम शव पहुंचते ही माहौल गमगीन हो गया। हजारों भक्त वहां पहले से मौजूद थे। शव देखते ही वे रो पड़े। दोपहर 2 बजे अंतिम यात्रा आश्रम से मेघदूत मुक्तिाम के लिए रवाना हुई। करीब 3.45 बजे बेटी कुहू ने मुखाग्नि दी।

महाराष्ट्र से आई भजन मंडलियां

अंतिम यात्रा के दौरान महाराष्ट्र के अलग-अलग शहरों से आई भजन मंडलियां भजन गा रही थीं। शव यात्रा में शामिल भक्तों को अपनी व्यथा व्यक्त करने के लिए शब्द नहीं मिल रहे थे। मेघदूत मुक्तिाम के बाहर भी कई लोग पहले से खड़े थे।

सीबीआई जांच की मांग

आश्रम के बाहर खड़े हजारों भक्तों की रुलाई रोके नहीं रुक रही थी। उन्हें विश्वास नहीं हो रहा था कि भय्यू महाराज अब नहीं रहे। ये लोग उनकी मौत की सीबीआई जांच की मांग कर रहे थे।